Homeराजनीतिरेवंत रेड्डी तेलंगाना का CM, राज भवन में हो गई थी तैयारी... शपथ लेने...

रेवंत रेड्डी तेलंगाना का CM, राज भवन में हो गई थी तैयारी… शपथ लेने से पहले कॉन्ग्रेसियों ने ही लगा दिया अड़ंगा

तेलंगाना में कॉन्ग्रेस की बहुमत से जीत होने के बाद कहा जा था कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी प्रदेश में अगले सीएम होंगे। लेकिन अब खबर ये है कि वहाँ कॉन्ग्रेस के जीते विधायकों ने रेवंत रेड्डी के सीएम बनने पर अड़ंगा लगाया है। अब रेवंत रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने का निर्णय दिल्ली में चर्चा होने के बाद आएगा।

तेलंगाना में कॉन्ग्रेस की बहुमत से जीत होने के बाद कहा जा था कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी प्रदेश में अगले सीएम होंगे। लेकिन अब खबर ये है कि वहाँ कॉन्ग्रेस के जीते विधायकों ने रेवंत रेड्डी के सीएम बनने पर अड़ंगा लगाया है।

मीडिया खबरों में बताया जा रहा है कि, रेवंत रेड्डी के शपथ वाले दिन राज भवन में तैयारी हो गई थी। लेकिन उसी समय बीच में आकर कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस कार्यक्रम को टालने की माँग उठाई।

रेवंत रेड्डी का विरोध करने वालों में मल्लू भाटी विक्रमारका, उत्तम कुमार रेड्डी, श्रीधर बाबू और कोमाटी रेड्डी थे। इनकी माँग के कारण कार्यक्रम टाल दिया गया। अब मल्लिकार्जुन खड़गे फैसला लेंगे की क्या रेवंत रेड्डी सीएम बनेंगे या नहीं।

बताया गया है कि अब रेवंत रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने का निर्णय दिल्ली में चर्चा होने के बाद आएगा। इस चर्चा में कर्नाटक के AICC के ऑब्जर्वर डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार और तेलंगाना में ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी के इंचार्ज मणिकराव ठाकरे भी शामिल होंगे। लेकिन इससे पहले ये दोनों तेलंगाना में विधायकों की आम सहमति जानेंगे। ये लोग तेलंगाना में जीतकर आए 64 विधायकों की व्यक्तिगत बातें सुनेंगे फिर चर्चा करके अपना फैसला लेंगे।

गौरतलब है कि पिछले साल भी रेवंत रेड्डी के विरोध की खबरें मीडिया में आई थीं। कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता ने रेड्डी पर आरोप लगाया था कि वो पार्टी में किसी बड़े नेता की नहीं सुनते सिर्फ अपनी-अपनी चलाते हैं। ऐसे में उनके साथ वो काम नहीं कर सकते। उस समय भी उनके खिलाफ उठी आवाजों को लेकर लंबी बैठकें हुई थीं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -