उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हाल ही में सोशल मीडिया पर यूपी की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। सपा प्रमुख ने यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे ‘भ्रष्टपुतली’ तक कह दिया। अखिलेश का आरोप है कि प्रदेश की पुलिस बीजेपी सरकार के इशारे पर काम कर रही है।
पुलिस भाजपा की ‘भ्रष्टपुतली’ बन गयी है और भाजपाई नाइंसाफ़ी के गुनाह में हिस्सेदार भी लेकिन PDA अब शासन-प्रशासन की जुल्म-ज़्यादती से न रुकेगा न झुकेगा।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 20, 2026
महिला आरक्षण की झूठी बात करनेवाले भाजपाई जब एक महिला सांसद के साथ अभद्र व्यवहार कर सकते हैं तो आम महिला का सरंक्षण-सम्मान क्या… pic.twitter.com/7i8WDVseOb
हालाँकि अखिलेश यादव के इन आरोपों के बीच समाजवादी पार्टी की सरकार के वो पुराने किस्से भी फिर चर्चा में आ गए हैं, जब यूपी पुलिस पर माफियाओं, बाहुबलियों और रसूखदार नेताओं के दबाव में काम करने के आरोप लगते थे। सोशल मीडिया पर आज भी ऐसे कई मामले वायरल होते रहते हैं।
जब आजम खान की भैंस खोजने में जुट गई थी पूरी पुलिस
ये मामला साल 2014 का है। प्रदेश में अखिलेश यादव की ही सरकार थी और आजम खान कैबिनेट मंत्री थे। रामपुर स्थित उनके फॉर्महाउस से 7 भैंसें चोरी हो गईं थी। इसके बाद पुलिस प्रशासन पूरी ताकत के साथ भैंसों की तलाश में जुट गया।
हालात ये थे कि बड़े-बड़े अधिकारी मौके पर पहुँच गए। क्राइम ब्रांच को लगाया गया। डॉग स्क्वॉड तक मैदान में उतार दिया गया। कई थानों की पुलिस भैंसें ढूंढने में लगी रही। इस घटना ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरीं।
विपक्ष ने सवाल उठाया कि आम आदमी की एफआईआर पर सुस्ती दिखाने वाली पुलिस आखिर एक मंत्री की भैंसों के लिए इतनी सक्रिय क्यों हो गई?
2005: जब दो विधायकों की हत्या से दहल गया था यूपी
सपा सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर सबसे बड़े सवाल साल 2005 में उठे थे। उस समय प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। उसी साल दो बड़े राजनीतिक हत्याकांड हुए। BSP विधायक राजू पाल और BJP विधायक कृष्णानंद राय की हत्या।
दोनों मामलों में प्रदेश के बड़े बाहुबली अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के नाम सामने आए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इन माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था।
बीच सड़क पर गोलियों से भून दिए गए थे राजू पाल
5 जनवरी 2005 को प्रयागराज में बसपा विधायक राजू पाल की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने उनकी गाड़ी को चौराहे पर घेर लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
हमला इतना खौफनाक था और अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि जब घायल राजू पाल को ऑटो से अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब भी बदमाश पीछा करते रहे और गोलीबारी करते रहे।
इस हमले में राजू पाल के साथ देवी दयाल और संदीप यादव की भी मौत हुई। इस हत्याकांड का आरोप अतीक अहमद और उसके गुर्गों पर लगा। यही वो अतीक अहमद था जिसकी तस्वीरें मुलायम सिंह यादव के साथ वायरल हुईं. जिसमें मुलायम सिंह मंच पर अतीक के कुत्तों के साथ हाथ मिलाते नजर आ रहे थे।
कृष्णानंद राय हत्याकांड ने पूरे पूर्वांचल को हिला दिया
29 नवंबर 2005 को गाजीपुर में BJP विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई। वह एक कार्यक्रम से लौट रहे थे, तभी रास्ते में घात लगाकर उन पर ऑटोमैटिक हथियारों से हमला किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 500 से ज्यादा गोलियाँ चलाई गईं। इस हमले में कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों की मौत हुई थी।
इस हत्याकांड में मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी गैंग का नाम सामने आया। हैरानी की बात ये है कि उस समय मुख्तार अंसारी जेल में बंद था। लेकिन जेल के भीतर ही रहते हुए उसने इस बड़े हत्याकांड को अंजाम दिया था।
बताया जाता है कि जब कृष्णानंद राय की हत्या की खबर मुख्तार को जेल में मिली तो वह ठहाके मार रहा था और कह रहा था कि चोटी काट दी गई। दरअसल, अपराधियों ने हत्या के बाद कृष्णानंद राय की चोटी भी काट ली थी।
सपा सरकार में जेल सजा या आलीशान अड्डा?
सपा सरकार में मुख्तार अंसारी के जेल में अय्याशी के किस्से आज भी सुर्खियों में रहते हैं जो बताते हैं कि सपा सरकार में अपराधियों को कैसे संरक्षण मिलता था। मुख्तार अंसारी ने अपनी पसंद की मछली खाने के लिए जेल के भीतर ही तालाब खुदवा लिया था।
यही नहीं बड़े-बड़े अधिकारी उसके साथ जेल में बैडमिंटन खेलने आते थे। मुख्तार को इस कदर संरक्षण था कि वो जब मन करे जेल से बाहर आकर घूमता था और फिर जेल में चला जाता था।
जब पुलिस अफसर पर ही चलवा दी गई गोलियाँ
मुख्तार का एक किस्सा मशहूर है जब 1996 में मुख्तार अंसारी ने एक पुलिस अधिकारी उदय शंकर जायसवाल और उनकी टीम पर दिनदहाड़े गोलियाँ बरसाईं थीं। उसने हमला सिर्फ इसलिए किया था क्योंकि पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही थी। तब उसने पुलिस को ललकारते हुए कहा था कि किसकी औकात है जो मुख्तार अंसारी की गाड़ी चेक करे।
वहीं, अतीक ने तो तत्कालीन आईजी जोन आरके चतुर्वेदी तक को धमका दिया था। इस बात का जिक्र खुद आरके चतुर्वेदी ने किया था। उन्होंने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया था कि कैसे साल 2016 में जब सपा की सरकार थी तो अतीक एक दिन मेरे दफ्तर आ गया था और मुझे धमकाया था। बाद में उसने अगले ही दिन मेरा ट्रांसफर करा दिया था।
सपा सरकार में यूपी पुलिस के हर थाने को ये आदेश था कि किसी भी मामले में एक जाति विशेष और धर्म विशेष लोगों के खिलाफ मुकदमा नहीं लिखा जाएगा। कई राजनैतिक पार्टियाँ इस बात को लेकर सपा को घेरती भी रही हैं।
“ये सब तनखैया हैं…” वाला बयान भी रहा विवादों में
ये बात इसलिए भी मौजूं हैं क्योंकि हाल ही में कोर्ट ने सपा सरकार में मंत्री रहे आजम खान को एक मामले में सजा सुनाई है। आजम खान ने एक चुनावी सभा में कलेक्टर को धमकी देते हुए मंच से कहा था कि पुलिस और कलेक्टर-फलेक्टर से डरने की जरूरत नहीं। ये सब तनखैया हैं.. इनसे जूता साफ कराऊँगा।
सोचिए अगर सपा का इतना कद्दावर नेता इस तरह का बयान मंच से देता है तो फिर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पुलिस का क्या हाल सपा सरकार में रहा होगा।
अब योगी सरकार पर हमला, तो पुराने सवाल भी लौटे
अब जब अखिलेश यादव यूपी पुलिस और कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। तो राजनीति में उनके विरोधी सपा शासनकाल की उन्हीं पुरानी घटनाओं को याद दिला रहे हैं, जब यूपी में बाहुबलियों और माफियाओं के प्रभाव को लेकर लगातार सवाल उठते थे।
यही वजह है कि जैसे ही अखिलेश यादव पुलिस पर हमला बोलते हैं, सोशल मीडिया पर ‘भैंस कांड’ से लेकर राजू पाल, कृ्ष्णानंद राय तक के पुराने मामले फिर वायरल होने लगते हैं।


