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धोती-कुर्ता और चप्पल पहने बुजुर्ग को TTE ने शताब्दी एक्सप्रेस में चढ़ने से रोका, रेलवे ने दिया जाँच का आदेश

ऐसी घटना निश्चित ही हमारे दिमाग में एक अलग छाप छोड़ जाती है। धोती-कुर्ता हमारा पारंपरिक परिधान है और सिर्फ पहनावे के आधार पर किसी को ट्रेन में सफर करने से रोकना असंवेदनशीलता की चरम सीमा है।

साल 1893 में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से सिर्फ इसलिए उतार दिया गया था, क्योंकि वो अश्वेत थे। आजादी के 70 साल बाद ऐसा ही कुछ हमारे देश में हुआ है। खबर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पैरों में हवाई चप्पल और बदन पर धोती-कुर्ता होने की वजह से एक बुजुर्ग शख्स को टीटीई ने ट्रेन में यात्रा नहीं करने दी।

दरअसल यह वाकया गुरुवार (जुलाई 4, 2019) की सुबह का है। बाराबंकी के ग्राम मूसेपुर थुरतिया के रहने वाले बुजुर्ग अवधदास ने 4 जुलाई को इटावा जंक्शन से गाजियाबाद जाने के लिए शताब्दी (12033) ट्रेन में अपनी सीट बुक कराई थी। उन्हें C-2 बोगी में 72 नंबर सीट मिली थी। जिसका उल्लेख टिकट चार्ट में भी था। ट्रेन जब गुरुवार सुबह 7:40 बजे प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर आई तो रामअवध दास बोगी में चढ़ने लगे। उसी समय गेट पर मौजूद सिपाही ने उन्हें ट्रेन में चढ़ने से रोका। तभी कोच अटेंडेंट भी आ गया और धोती कुर्ता ओर पैरों में रबर की हवाई चप्पल पहने अवधदास को ट्रेन में चढ़ने से रोकने लगता है। 

इस दौरान बुजुर्ग अपना कन्फर्म टिकट भी दिखाया, लेकिन तब तक 2 मिनट हो चुके थे और ट्रेन प्लेटफार्म छोड़ चुकी थी। जिसके बाद इस अपमान से नाराज रामअवध दास ने स्टेशन मास्टर के पास जाकर शिकायत रजिस्टर में अपनी शिकायत दर्ज कराई और उसके बाद बस से गाजियाबाद के लिए रवाना हुए। फिलहाल रेलवे ने इस मामले में जाँच का आदेश दे दिया है।

ऐसी घटना निश्चित ही हमारे दिमाग में एक अलग छाप छोड़ जाती है। धोती-कुर्ता हमारा पारंपरिक परिधान है और सिर्फ पहनावे के आधार पर किसी को ट्रेन में सफर करने से रोकना असंवेदनशीलता की चरम सीमा है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को विश्व गुरु बनाने की बात करते हैं। हवाई चप्पल पहनने वाले शख्स को भी हवाई जहाज की यात्रा कराने की योजना ‘उड़ान’ देश भर में चल रही है। इस बीच इस तरह की घटनाएँ बेहद निंदनीय है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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