Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयतेल के खेल में मात खाता अमेरिका, रूस के बाद ईरान को देनी पड़ी...

तेल के खेल में मात खाता अमेरिका, रूस के बाद ईरान को देनी पड़ी छूट: जानें- क्या है ‘तेल संकट’ का चीन कनेक्शन?

ट्रंप प्रशासन में ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह तेल बाजार में अब तक की सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा, "कमी इतनी ज्यादा है कि जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे उस कमी के सामने बहुत छोटे पड़ रहे हैं।"

अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध से ना केवल मिडिल ईस्ट के देशों में संकट पनप रहा है बल्कि दुनियाभर में हलचल मची हुई है। दुनियाभर में ऊर्जा संकट मंडरा रहा है और तेल-गैस की कीमतें आसमान की और भागने को तैयार हैं। इस तेल संकट को लेकर अमेरिका खुद भी घबराया हुआ है। उसने पहले रूसी तेल खरीद पर तले प्रतिबंधों में ढील दी थी तो अब ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंधों में भी छूट देने का एलान किया है।

अमेरिका ने क्या कहा?

इसके छूट के तहत 20 मार्च तक जहाजों पर लादा गया तेल 19 अप्रैल तक उतारा जा सकता है। यह युद्ध शुरू होने के बाद तीसरी बार है जब इस तरह की अस्थायी राहत दी गई है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस कदम से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई बढ़ेगी। स्कॉट बेसेंट ने लिखा, “ईरान वैश्विक आतंकवाद का मुख्य केंद्र है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के जरिए अमेरिका इस लड़ाई में पहले से भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

बेसेंट ने लिखा, “ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा ढाँचों पर किए गए हमलों के जवाब में ट्रंप प्रशासन ने फैसला किया है कि वह अमेरिका की आर्थिक और सैन्य ताकत का इस्तेमाल करके दुनिया में ऊर्जा की सप्लाई को बढ़ाएगा, उसे मजबूत करेगा और बाजार को स्थिर बनाए रखेगा। इसी के तह, अमेरिकी वित्त विभाग ने एक सीमित और थोड़े समय के लिए अनुमति दी है जिससे समुद्र में फँसे हुए ईरानी तेल को बेचा जा सके।”

चीन जमा कर रहा है तेल: अमेरिका

स्कॉट बेसेंट का कहना है कि इस युद्ध और प्रतिबंधों के बीच ईरान के तेल को खरीदकर चीन जमा कर रहा है। उन्होंने कहा, “अभी की स्थिति यह है कि प्रतिबंधों के कारण ईरान का तेल सस्ता खरीदकर चीन जमा कर रहा है। अब इस फँसे हुए तेल को अस्थायी रूप से वैश्विक बाजार में लाकर, अमेरिका करीब 14 करोड़ (140 मिलियन) बैरल तेल दुनिया को उपलब्ध कराएगा। इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई बढ़ेगी और जो अस्थायी कमी आई है उसे कम करने में मदद मिलेगी।”

किस तेल को मिली छूट?

बेसेंट ने बताया है कि यह अनुमति केवल उस तेल के लिए है जो पहले से रास्ते में है। उन्होंने कहा, “इससे नए तेल की खरीद या उत्पादन की इजाजत नहीं दी गई है। साथ ही, ईरान के लिए इस बिक्री से होने वाली कमाई तक पहुँच बनाना भी मुश्किल रहेगा। अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखेगा और उसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सिस्टम से दूर रखने की कोशिश जारी रखेगा।”

अमेरिका का कहना है कि अब तक ट्रंप प्रशासन ने करीब 44 करोड़ (440 मिलियन) बैरल अतिरिक्त तेल वैश्विक बाजार में लाने की दिशा में काम किया है। अमेरिका इसके जरिए ईरान की उस रणनीति को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है जिसके जरिए ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ हार्मुज’ में रुकावट डालकर दबाव बनाने की कोशिश में है।

क्यों तेल के खेल में मात खा रहा अमेरिका?

28 फरवरी से ईरान के खिलाफ शुरू हुईं अमेरिका और इजरायल की एयरस्ट्राइक के बाद ईरान ने जवाबी हमले किए हैं। इसमें मिडिल ईस्ट में तेल डिपो और गैस डिपो जैसी महत्वपूर्ण जगह भी शामिल हैं। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से ईंधन लेकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को भी लगभग रोक दिया है। इस स्ट्रेट से दुनिया के ईंधन का करीब 20% हिस्सा गुजरता है और इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ा झटका लगा है।

इसके बाद दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा हो रहा है और जाहिर है कि इसके लिए दुनियाभर के देश अमेरिका को जिम्मेदार ठहराएँगे जिससे दुनिया में उसकी थू-थू होगी। अमेरिका इसी थू-थू से बचने की कोशिश में लगा है। CNN की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए हर कोशिश आजमा रहे हैं और इसके लिए भले ही उन्हें उसी देश पर लगे प्रतिबंधों में ढील क्यों न देनी पड़े, जिससे वे लड़ रहे हैं।

हालाँकि, ईरान के साथ युद्ध के तीन हफ्ते बाद ही प्रशासन के बाद आसमान छूती कीमतों को काबू करने के विकल्प तेजी से कम हो रहे हैं। अधिकारी मान रहे हैं कि इस युद्ध के चलते बढ़ी कीमतें कई महीनों तक बनी रह सकती हैं। अब अमेरिका सरकार ने अपने सारे हथियार इस्तेमाल कर लिए हैं और सरकार के पास जो विकल्प बचे हैं वे या तो ज्यादा असरदार नहीं हैं या फिर इतने कठोर हैं कि उन्हें लागू करना मुश्किल है।

ट्रंप के प्रशासन ने पहले ही रणनीतिक भंडार से करोड़ों बैरल तेल जारी करने का फैसला लिया है। रूसी तेल पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है और अमेरिका के भीतर तेल की सप्लाई तेज करने के कदम उठाए हैं। ट्रंप प्रशासन में ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह तेल बाजार में अब तक की सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा, “कमी इतनी ज्यादा है कि जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे उस कमी के सामने बहुत छोटे पड़ रहे हैं।”

दोधारी तलवार पर अमेरिका

इस फैसले की छवि (optics) थोड़ी उलझी हुई लगती है। एक तरफ अमेरिका सैन्य रूप से ईरान की सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है लेकिन दूसरी तरफ उसी ईरान को आर्थिक फायदा भी मिलने दे रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को बंद करके ईरान ने अमेरिका पर कितना बड़ा आर्थिक और राजनीतिक दबाव बना दिया है।

फिर भी अमेरिका के अंदर यह माना जा रहा है कि इस फैसले के फायदे, नुकसान से ज्यादा हैं। करीब 14 करोड़ (140 मिलियन) बैरल तेल बाजार में लाने से सप्लाई की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

ट्रंप प्रशासन के अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि इससे ईरान को बहुत बड़ा फायदा नहीं होगा क्योंकि यह वही तेल है जो पहले से ही समुद्र में मौजूद था। यानि कोई नई कमाई नहीं हो रही सिर्फ पहले से उपलब्ध तेल को बाजार में लाया जा रहा है।

क्या भारत खरीदेगा ईरानी तेल?

अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद एशिया के दूसरे देशों के साथ-साथ भारत की रिफाइनरियाँ भी ईरान से कच्चा तेल खरीदने की तैयारी कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 3 रिफाइनिंग कंपनियों के सूत्रों ने कहा है कि वे ईरानी तेल खरीदना चाहती हैं लेकिन इसके लिए उन्हें सरकार के निर्देशों और वॉशिंगटन से कुछ अहम बातों पर स्पष्टता का इंतजार है। कंपनियाँ जानना चाहती हैं कि इस तेल का भुगतान कैसे किया जाएगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

शिव
शिव
7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

भगवान राम का अपमान, आजादी के नारे और तिरंगे से बदसलूकी: कॉकरोचों को ये तक नहीं पता कि वे क्यों आए हैं, पढ़ें- CJP...

कॉकरोचों के प्रदर्शन में छात्रों के मुद्दे नहीं बल्कि आजादी के नारे, डफली गैंग, तिरंगे से बदसलूकी और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान दिखा। पढ़ें रिपोर्ट।

तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति के ‘घृणा मॉडल’ को अन्नामलाई की चुनौती, पेरियार नहीं, कलाम हैं आदर्श: समझें- ‘We The Change’ से राष्ट्रवाद का शंखनाद...

अन्नामलाई ने कहा कि तमिल संस्कृति-भाषा पर गर्व और भारत माता के प्रति समर्पित रहना एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
- विज्ञापन -