Saturday, April 4, 2026
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नेपाली Gen-Z आंदोलन को दिशा देने वाले बालेन शाह बनेंगे PM, भारत में पढ़ाई लेकिन दिल में नफरत: जानें दिल्ली की तरफ झुकेंगे या बनेंगे अमेरिका के पिट्ठू?

बालेन शाह कई बार भारत को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। 2023 में जब भारत में संसद के नए भवन में ‘अखंड भारत’ का नक्शा चर्चा में आया तो इसके जवाब में उन्होंने अपने कार्यालय में ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा लगा दिया। इस नक्शे में भारत के कई क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था।

नेपाल की राजनीति इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। 5 मार्च 2026 को हुए आम चुनाव के बाद जारी मतगणना के शुरुआती रुझानों में 35 वर्षीय बालेन शाह और उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को भारी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। 165 सीटों वाली संसद में उनकी पार्टी 100 से अधिक सीटों पर आगे बताई जा रही है।

यदि अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में आते हैं तो नेपाल की राजनीति में दशकों से सक्रिय पारंपरिक दलों, नेपाली कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों को बड़ा झटका लग सकता है। हालाँकि बालेन शाह का संभावित सत्ता में आना केवल राजनीतिक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राष्ट्रवादी बयानबाजी और पड़ोसी देशों पर तीखी टिप्पणियों से भी जोड़ा जा रहा है।

बालेन शाह खुद को नई पीढ़ी का नेता बताते हैं, लेकिन उनके आलोचक उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो आक्रामक बयानबाजी, जनभावनाओं को भड़काने और राजनीतिक अस्थिरता से फायदा उठाने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर बालेन शाह नेपाल के प्रधानमंत्री बनते हैं तो इसका असर केवल नेपाल की राजनीति तक सीमित रहेगा या भारत-नेपाल संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति पर भी पड़ेगा।

चुनावी रुझानों ने नेपाल की राजनीति में मचाया भूचाल

नेपाल में इस बार का चुनाव सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुआ था। 2025 में देश गंभीर राजनीतिक संकट से गुजरा। सितंबर 2025 में सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध से शुरू हुआ Gen-Z आंदोलन जल्द ही सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया।

राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भी हुई जिसमें लगभग 19 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक लोग घायल हुए। इन घटनाओं के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा और संसद भंग हो गई।

इसके बाद नए चुनाव की घोषणा की गई। अब उसी राजनीतिक अस्थिरता के बाद हुए चुनावों में बालेन शाह की पार्टी को बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। यदि यह रुझान परिणामों में बदलता है तो यह नेपाल की राजनीति में एक बड़ा सत्ता परिवर्तन होगा।

कौन हैं बालेन शाह: रैपर से संभावित प्रधानमंत्री तक

बालेन शाह का पूरा नाम बालेंद्र शाह है। उनका जन्म 1990 में काठमांडू में हुआ था। उनके पिता राम नारायण शाह आयुर्वेद के चिकित्सक थे और उनकी माँ गृहिणी थीं। उन्होंने नेपाल में सिविल और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में भारत के कर्नाटक स्थित विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से मास्टर्स डिग्री हासिल की।

2015 में आए विनाशकारी नेपाल भूकंप के बाद उन्होंने पुनर्निर्माण के कुछ कार्यों में हिस्सा लिया, लेकिन उनकी असली पहचान एक इंजीनियर के रूप में नहीं बल्कि रैपर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट के रूप में बनी। उनकी लोकप्रियता का आधार उनके गाने और सोशल मीडिया पोस्ट रहे, जिनमें वे नेपाल की राजनीति और नेताओं पर तीखे हमले करते थे।

बालेन शाह के कई रैप गाने नेपाल की राजनीति पर सीधा हमला करते थे। उनका गाना ‘बलिदान’ युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इस गाने में उन्होंने राजनीतिक व्यवस्था पर हमला करते हुए कहा कि देश को बचाने का दावा करने वाले नेता ही देश को बर्बाद कर रहे हैं। नेपाल के युवाओं के बीच यह गाने व्यवस्था विरोधी भावना को बढ़ाने वाले माने गए।

आलोचकों का कहना है कि बालेन शाह ने इसी असंतोष को राजनीतिक पूंजी में बदलने का काम किया।

काठमांडू के मेयर बनकर बढ़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षा

2022 में बालेन शाह ने काठमांडू के मेयर का चुनाव स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने पारंपरिक दलों के उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की। उन्हें लगभग 61 हजार से अधिक वोट मिले। हालाँकि मेयर बनने के बाद उनका कार्यकाल भी विवादों से भरा रहा।

उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और राष्ट्रीय नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आक्रामक बयान दिए। कुछ मामलों में उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जिसे कई राजनीतिक विश्लेषकों ने गैर-जिम्मेदाराना बताया।

Gen-Z आंदोलन: समर्थन, उकसावे और राजनीतिक लाभ के आरोप

सितंबर 2025 में हुए Gen-Z आंदोलन में बालेन शाह का नाम लगातार चर्चा में रहा। 7 सितंबर 2025 को उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर युवाओं के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि Gen-Z की सोच और इच्छाशक्ति को समझना जरूरी है और वे उनके साथ हैं।

इसके अगले दिन काठमांडू समेत कई शहरों में हजारों युवा सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए और कई जगह सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। इस आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाने की माँग भी तेजी से बढ़ी।

आलोचकों का कहना है कि बालेन शाह ने युवाओं की नाराजगी को राजनीतिक मौके में बदलने की कोशिश की। हालाँकि बाद में उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांत रहने की अपील भी की।

भारत विरोधी बयान और विवादों का लंबा इतिहास

बालेन शाह कई बार भारत को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। 2023 में जब भारत में संसद के नए भवन में ‘अखंड भारत’ का नक्शा चर्चा में आया तो इसके जवाब में उन्होंने अपने कार्यालय में ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा लगा दिया। इस नक्शे में भारत के कई क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था।

इसी साल फिल्म ‘आदिपुरुष’ को लेकर भी उन्होंने विवाद खड़ा कर दिया। उनका आरोप था कि फिल्म में माता सीता को भारत की बेटी बताया गया है। इसके विरोध में उन्होंने काठमांडू में भारतीय फिल्मों की स्क्रीनिंग पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था। हालाँकि बाद में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह प्रतिबंध हटाना पड़ा।

नवंबर 2025 में बालेन शाह ने फेसबुक पर एक विवादित पोस्ट लिखी जिसमें भारत, अमेरिका और चीन के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इस पोस्ट में उन्होंने कई देशों और राजनीतिक दलों के लिए गालियाँ लिखीं। बाद में यह पोस्ट हटा दी गई, लेकिन तब तक यह सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी थी।

उस पोस्ट में लिखा था: “F**k America, F**k India, F**k China, F**k UML, F**k Congress, F**k RSP, F**k RPP, F**k Maobaadi, Go to hell, you guys all combined can do nothing” दिलचस्प बात यह है कि बाद में बालेन उसी RSP पार्टी में शामिल हो गए, जिसे उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में निशाना बनाया था।

अमेरिका से करीबी संपर्क को लेकर उठते सवाल

बालेन शाह को लेकर यह चर्चा भी रही है कि उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्क काफी मजबूत हैं। उन्हें 2023 में टाइम मैगजीन की प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया गया था। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी उन्हें काफी कवरेज मिली। काठमांडू के मेयर रहते हुए उनकी मुलाकात नेपाल में अमेरिकी राजदूत से कई बार हुई।

इन बैठकों की तस्वीरें भी सार्वजनिक हुईं। इसी वजह से नेपाल की राजनीति में कुछ लोग उन्हें अमेरिका के प्रभाव वाला नेता भी बताते हैं। हालाँकि उनके समर्थक इसे सामान्य कूटनीतिक संपर्क बताते हैं। नेपाल की विदेश नीति लंबे समय से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है।

बालेन शाह ने भी कई बार कहा है कि नेपाल को अपने हितों के आधार पर दोनों देशों के साथ संबंध रखने चाहिए। हालाँकि चुनाव के दौरान उन्होंने चीन से जुड़े कुछ औद्योगिक परियोजनाओं को अपने घोषणा पत्र से हटा दिया। कुछ विश्लेषकों ने इसे भारत को संदेश देने की कोशिश बताया। फिर भी यह स्पष्ट नहीं है कि सत्ता में आने के बाद वे भारत और चीन के बीच किस तरह की रणनीति अपनाएँगे।

अगर बालेन शाह बने PM तो भारत के लिए क्या चुनौती?

भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है और आर्थिक संबंध भी काफी मजबूत हैं, लेकिन बालेन शाह के पिछले बयानों और विवादों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि उनकी सरकार भारत के साथ संबंधों को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपना सकती है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि वे राष्ट्रवादी राजनीति के जरिए घरेलू समर्थन बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे समय-समय पर भारत-नेपाल संबंधों में तनाव पैदा हो सकता है। बालेन शाह की लोकप्रियता मुख्य रूप से सोशल मीडिया और युवाओं के बीच उनकी छवि पर आधारित है।

लेकिन आलोचकों का कहना है कि लोकप्रियता और शासन क्षमता अलग चीजें होती हैं। नेपाल इस समय आर्थिक चुनौतियों, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या एक रैपर से राजनेता बने नेता इन जटिल समस्याओं से निपट पाएँगे या उनकी राजनीति केवल जनभावनाओं को भड़काने तक ही सीमित रहेगी।

अगर वे प्रधानमंत्री बनते हैं तो नेपाल की राजनीति में एक नई शैली देखने को मिल सकती है। लेकिन यह भी संभव है कि उनकी आक्रामक और विवादास्पद राजनीति नेपाल के भीतर और पड़ोसी देशों के साथ नए तनाव पैदा कर दे।

आने वाले दिनों में अंतिम चुनाव परिणाम और उसके बाद बनने वाली सरकार यह तय करेगी कि बालेन शाह का उभार नेपाल के लिए स्थायी बदलाव साबित होगा या नई राजनीतिक अनिश्चितता की शुरुआत।

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सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
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