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ब्रिटेन में कोरोना वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल: इंसान को दी पहली खुराक, जानवरों पर सफल रहा था परीक्षण

फिलहाल दुनिया भर में 120 जगहों पर कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें 13 जगहों पर मामला क्लीनिकल ट्रायल तक पहुँचा है।

दुनिया भर में कहर बरपा रही महामारी के बीच हर किसी को कोरोना वायरस की वैक्‍सीन का इंतजार है। कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए पूरी दुनिया एक साथ मिलकर काम कर रही है। इस बीच कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छी खबर आई है।

ब्रिटेन में कोरोना वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण करने की तैयारी शुरू हो गई है। लंदन के इंपीरियल कॉलेज की क्लीनिकल टीम को इसके लिए एक स्वस्थ प्रतिभागी मिल गया है। लंदन के इंपीरियल कॉलेज के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किए गए वैक्सीन की खुराक इस स्वस्थ प्रतिभागी को दी गई।

फिलहाल प्रतिभागी ने अपना नाम गुप्त रखने के लिए कहा है। बताया जा रहा है कि क्लीनिकल टीम उस प्रतिभागी की निगरानी कर रही है। फिलहाल वो बिल्कुल स्वस्थ और सुरक्षित हैं।

इस वैक्सीन का ट्रायल लंदन के इंपीरियल कॉलेज में 300 लोगों के ऊपर किया जाएगा। यह RNA (saRNA) बेस्‍ड वैक्‍सीन है। यह वैक्सीन के विकास में क्रांति ला सकता है और साथ ही वैज्ञानिकों को भी उभरती हुई बीमारी के बारे में फौरन पता चल सकता है।

ब्रिटेन की सरकार ने 41 मिलियन पाउंड से अधिक इस टीके के निर्माण के लिए दिए हैं। कई वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि इस वैश्विक महामारी को प्रभावी टीके से ही रोका जा सकता है, जिसे विकसित करने में सामान्य तौर पर कई वर्ष लग सकते हैं। बता दें कि इस प्रोजक्ट की अगुवाई इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर रॉबिन शटॉक कर रहे हैं।

प्रोफेसर रॉबिन शटॉक ने इस बारे में बात करते हुए कहा, “पहला प्रतिभागी हमारे saRNA वैक्सीन प्लेटफॉर्म के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पहले कभी मनुष्यों में नहीं हुआ था। अब हम परीक्षण के लिए बेसब्री से प्रतिभागी का इंतजार कर रहे हैं ताकि हम वैक्सीन की सुरक्षा और इसकी एंटीबॉडी का उत्पादन करने की क्षमता का आकलन कर सकें।”

उन्होंने आगे बताया कि जिस प्रतिभागी को पहली खुराक दी गई है, उसे चार सप्ताह के भीतर दूसरा बूस्टर खुराक दिया जाएगा। कई अन्य प्रतिभागियों को आने वाले दिनों में पहली खुराक दी जाएगी।

इम्पीरियल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. कैटरीना पोलक ने कहा, “इस महत्वपूर्ण कार्य का हिस्सा बनना एक विशेषाधिकार है और हमारी टीम हमारे प्रतिभागियों के उत्साह और समर्थन के लिए बेहद आभारी हैं, जिनके बिना क्लीनिकल रिसर्च संभव नहीं है।”

जानकारी के मुताबिक किसी भी नई वैक्सीन की ट्रायल के लिए पहले किसी स्वस्थ इंसान को वायरस से संक्रमित किया जाता है और फिर उसमें वैक्सीन की खुराक डालकर शोध किया जाता है। इसके लिए प्रतिभागी स्वेच्छा से खुद ही सामने आते हैं। उनके ऊपर ही ये ट्रायल किया जाता है।

बताया जा रहा है कि इस वैक्सीन का जानवरों पर किया ट्रॉयल सफल रहा है। फिलहाल दुनिया भर में 120 जगहों पर कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें 13 जगहों पर मामला क्लीनिकल ट्रायल तक पहुँचा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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