Wednesday, April 1, 2026
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बिस्तर में घुसा, प्राइवेट पार्ट सहलाया, जबरन चूमा: स्पेन के चर्चों में पादरियों की करतूत का ये बस एक नमूना, 99 साल में 2 लाख हुए ‘चर्च नेक्सस’ के यौन उत्पीड़न का शिकार

किनका शोषण हुआ, कौन-कौन दोषी हैं और कितनी संख्या में पीड़ितों को न्याय और मुआवजा मिला इसका भी कोई सही-सही डेटाबेस मिलना मुश्किल है। जो है भी तो उसके सही होने पर खुद ही कई सवाल हैं। अब समय है कि चर्च को अपने बनाए नियमों की समीक्षा करनी चाहिए।

स्पेन के कैडिज व सेउटा डायोसीज के बिशप राफेल जोर्नोसा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 76 वर्षीय जोर्नोसा पर 1990 के दशक में एक किशोर लड़के के यौन शोषण का आरोप है और इसी मामले की जाँच चर्च ट्रिब्यूनल द्वारा की जा रही है। वे स्पेन के पहले ऐसे कैथोलिक बिशप हैं जिनके खिलाफ वैटिकन के स्तर पर सार्वजनिक रूप से जाँच की जा रही है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वैटिकन ने अपने संक्षिप्त बयान में केवल इस्तीफा स्वीकार करने की घोषणा की है और इसमें आरोपों का कोई जिक्र नहीं है। वहीं, कैडिज व सेउटा डायोसीज ने इस महीने बताया कि आरोपों की जाँच मैड्रिड स्थित स्पेन में वैटिकन के दूतावास पर बुलाए गए चर्च ट्रिब्यूनल के माध्यम से चल रही है। यह घटना केवल एक इस्तीफे की खबर भर नहीं है बल्कि इसने एक बार फिर कैथोलिक चर्च में लंबे समय से चले आ रहे यौन शोषण के मुद्दे को उठा दिया है।

क्या है जोर्नोसा के खिलाफ आरोप?

स्पैनिश अखबार ‘EL PAIS’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जोर्नोसा पर 1990 के दशक में एक नाबालिग का बार-बार यौन शोषण करने का आरोप है। जिस समय यह घटना हुई उस वक्त जोर्नोसा गेटाफे में पादरी थे और डायोसेसन सेमिनरी (धार्मिक विद्यालय) का संचालन करते थे।

पीड़ित ने ‘डिकैस्टरी फॉर द डॉक्ट्रिन ऑफ फेथ’ को डाक से एक शिकायत भेजी जिसमें अपने साथ हुए शोषण का विवरण दिया था। पीड़ित ने बिशप पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसका 14 साल की उम्र से लेकर 21 वर्ष की उम्र तक शोषण किया था। पीड़ित ने लिखा, “मैं यह पत्र सिर्फ इस उद्देश्य से लिख रहा हूँ कि जो मेरे साथ हुआ, वह किसी और बच्चे के साथ न हो।” पीड़ित के साथ शोषण की शुरुआत 1994 में हुई थी।

पीड़ित ने अपने पत्र में लिखा है, “14 से 18 साल की उम्र तक मैं लगभग हर हफ्ते ‘सैरो दे लॉस आंजेलेस’ के मेजर सेमिनरी जाता था। इसी दौरान वह मेरा शोषण करता था। रात में वह मेरे कमरे में आता था और मैं यह सब सहता था। वह मेरे बिस्तर में घुस जाता, मुझे सहलाता और चूमता था। सुबह भी वह इसी तरह मुझे जगाता था। मैं डर के मारे शून्य हो जाता था।” पीड़ित के साथ ‘निजी अंगों को छूना, सहलाना और होंठों पर किस करना’ जैसी घटनाएँ रिट्रीट्स और कैंपों के दौरान भी हुई।

राफेल जोर्नोसा

पीड़ित के अनुसार शोषण तब तक जारी रहा जब तक वह 2000 के शुरुआती वर्षों में 21 साल का नहीं हो गया। पीड़ित ने वयस्क होने पर सेमिनरी में प्रवेश लिया। पत्र में पीड़ित ने लिखा, “उसी समय मैंने उसे बताया कि मैं समलैंगिक हूँ। जोर्नोसा ने मुझे सेमिनरी में प्रवेश दिया और मुझे ‘कन्वर्जन थेरेपी’ ले गया ताकि मेरी समलैंगिकता ठीक की जा सके।”

पीड़ित ने बताया कि दो साल तक सेमिनरी में रहने के दौरान जोर्नोसा लगभग हर रात और सुबह उसके बिस्तर में आता था, उसे चूमता और उसके निजी अंगों को छूता था। उसने लिखा, “कई बार मैंने जोर्नोसा से कहा कि हम जो कर रहे हैं, वह सही नहीं है। वह हमेशा इसे सच्ची दोस्ती बताता था।”

पीड़ित का कहना है कि वह जोर्नोसा की हर बात पर आँखें बंद करके भरोसा करता था। पीड़ित अपने कन्फेशन के दौरान समलैंगिक संबंधों को स्वीकार करता और अपने बिस्तर पर चला जाता जिसके कुछ ही मिनटों बाद जोर्नोसा उसके बिस्तर पर होते थे। जब वह सेमिनरी छोड़कर बाहर आया तो पीड़ित को इस बात का अहसास तक नहीं था कि वह शोषण का शिकार हुआ है।

कई साल बाद थेरेपी लेते समय उसे समझ आया कि जोर्नोसा ने उसके साथ यौन शोषण किया था। इसके बाद 32 वर्ष का होने पर पीड़ित ने जोर्नोसा को एक ईमेल लिखा और अपने यौन शोषण का जिक्र किया। पीड़ित ने कहा, “उसने कभी जवाब नहीं दिया और उसी दिन के बाद उसने मुझसे कभी संपर्क नहीं किया।”

इस साल वह जोर्नोसा से मिला और आमने-सामने जाकर उससे शोषण किए जाने की बात कही। पीड़ित ने लिखा, “उसने मुझे आसानी से बस इतना कह दिया कि उसका कोई ऐसा इरादा नहीं था।” इसके बाद पीड़ित ने आगे शिकायत की थी। यह पहली बार है जब स्पेन में किसी बिशप की इस तरह जाँच की जा रही हो। हालाँकि, यह यह शोषण का इकलौता मामला नहीं है बल्कि ऐसे मामलों की संख्या हजारों में है।

यौन शोषण के मामलों पर ‘EL PAIS’ का डेटाबेस

स्पेन में दशकों तक चर्च में होने वाले यौन शोषण के मामलों को नकारा जाता रहा या उन पर चुप्पी साध ली गई। यौन शोषण को लेकर कोई बात तक नहीं की जाती थी और कई अन्य देशों के मामलों का जब जिक्र होता तो स्पैनिश एपिस्कोपल कॉन्फ्रेंस (CEE) कह देती कि स्पेन एक अपवाद है यानी यहाँ ऐसे केस नहीं हैं। कई केसों को लेकर चर्चा होती रही लेकिन उस पर सार्वजनिक चुप्पी ही रही।

दशकों तक इस स्थिति के बाद अक्टूबर 2018 में ‘EL PAÍS’ ने इस मुद्दे की जाँच शुरू करने का फैसला किया। ‘EL PAÍS’ ने जो इस केसों की शुरुआती रिपोर्ट बनाई उसमें सिर्फ 34 केस दर्ज थे जो अदालतों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लिए गए थे। चर्च प्रशासन की इस अस्पष्ट व्यवस्था के कारण, अखबार ने एक ईमेल जारी किया ([email protected]), जहाँ कई वर्षों के दौरान सैकड़ों पीड़ितों और गवाहों ने अपनी कहानियाँ भेजीं।

अप्रैल 2021 में अखबार ने स्पेनिश कैथोलिक चर्च में पैडोफीलिया पर पहला और अब तक का एकमात्र डेटाबेस प्रकाशित किया, जिसे हर नए मामले के सामने आने पर लगातार अपडेट किया जाता है। अखबार के डेटा के मुताबिक, अब तक चर्च द्वारा शोषण का शिकार 2,936 पीड़ित उनके सामने आए हैं जिन्होंने कुल 1,564 आरोपितों पर शोषण के आरोप लगाए हैं।

EL PAIS का डेटाबेस (साभार:elpais.com)

अखबार ने ऐसे केसों की एक लंबी लिस्ट जारी की है। जिसमें हजारों घटनाओं का जिक्र है और उनके बाद हुई कार्रवाई का भी वर्णन है। इस डेटाबेस में उन पादरियों, बिशप और धार्मिक पदाधिकारियों का जिक्र किया गया है जिन्होंने इस घटनाओं को अंजाम दिया था। अखबार को जिस सबसे पुराने मामले की जानकारी मिली है वो 1927 का है। आँकड़ों के मुताबिक, 1960 के दशक में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए, जो कुल मामलों का एक-चौथाई है।

स्पेन में 1940 से अब तक चर्च के लोगों द्वारा 4 लाख+ बच्चों के शोषण का अनुमान

2023 में एक स्वतंत्र आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि स्पेन में 1940 से अब तक रोमन कैथोलिक चर्च के धर्मगुरुओं द्वारा लगभग 2,00,000 बच्चों का यौन शोषण किए जाने का अनुमान है। रिपोर्ट में कोई सटीक संख्या नहीं दी गई थी लेकिन 8,000 से अधिक वयस्कों पर किए गए एक सर्वे में 0.6% लोगों ने बताया कि बचपन में उनका यौन शोषण चर्च के पादरियों ने किया था। स्पेन की लगभग 3.9 करोड़ वयस्क आबादी पर यह प्रतिशत लागू करने पर अनुमानित संख्या करीब 2 लाख बनती है।

करीब 700 पेज की यह रिपोर्ट बनाने वाले लोकपाल (ओम्बुड्समैन) एंज़ेल गाबिलोंदो ने बताया कि जब इसमें चर्च से जुड़े गैर-पादरी (ले-मेंबर्स) द्वारा किए गए शोषण को भी जोड़ते हैं तो यह प्रतिशत 1.13% हो जाता है। इसका मतलब है कि 4 लाख से अधिक स्पेनिश नागरिक बचपन में चर्च से जुड़े व्यक्तियों द्वारा यौन शोषण का शिकार हुए हो सकते हैं।

इन मामलों की जाँच के लिए बने आयोग ने 487 पीड़ितों का इंटरव्यू भी किया था। गाबिलोंदो ने दावा किया था, “शोषण के शिकार कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने आत्महत्या कर ली है… कई ऐसे लोग हैं जो अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर नहीं ला पाए हैं।” पीड़ित इसके कारण होने वाली ‘भावनात्मक समस्याओं’ से जूझ रहे हैं। स्पेन की संसद ने मार्च 2022 में भारी बहुमत से एक स्वतंत्र आयोग के गठन को मंजूरी दी थी। हालाँकि, स्पेनिश कैथोलिक चर्च ने इस स्वतंत्र जाँच में आधिकारिक रूप से हिस्सा नहीं लिया था।

द गार्जियन की रिपोर्ट

इस वर्ष अब तक यौन शोषण की 101 शिकायतें मिली: चर्च का दावा

स्पेन की कैथोलिक चर्च ने बीते शुक्रवार (21 नवंबर 2025) को बताया कि इस वर्ष अब तक उसे यौन शोषण की 101 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। ये सभी शिकायतें उस नई मुआवजा प्रणाली के तहत दर्ज की गई हैं। यह फैसला चर्च पर लगातार बढ़ रहे आरोपों और नाबालिगों के शोषण मामलों में पारदर्शिता की कमी को लेकर उठी आलोचनाओं के बाद लिया गया था।

स्पेनिश एपिस्कोपल कॉन्फ्रेंस के महासचिव फ्रांसिस्को गार्सिया मागान के अनुसार, इनमें से 58 मामले ‘सुलझाए’ जा चुके हैं जबकि 11 मामले समाधान के करीब हैं। बाकी शिकायतों पर समीक्षा अभी जारी है। हालाँकि, मागान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जिन मामलों को निपटाया गया है उनमें पीड़ितों को मुआवजा मिला या नहीं। माना जा रहा है कि यह संख्या असल संख्या जैसे EL PAIS के आँकड़ों से काफी कम है।

चर्च में शोषण पर पादरियों का पहरा?

चर्च में यौन शोषण से जुड़े मामलों में कार्रवाई का होना स्पेन में समस्याओं को और बढ़ा रहा है। अलग-अलग रिपोर्ट्स में इन समस्याओं और शोषण के तंत्र के पीछे की कई वजहें होने का जिक्र किया गया है। पादरी या बिशप जैसे अधिकारियों और बच्चों के बीच पावर डायनेमिक्स शोषण की परिस्थितियाँ बना देती है। बच्चे ताकतवर पादरी या बिशप के खिलाफ आवाज उठाने से कतराते हैं जिससे उनका हौसला बढ़ता है।

इसके अलावा चर्च की इनकार (denial) की नीति और आरोपितों को छिपाने की वजह से भी इस समस्या का समस्या बढ़ी हुई है। ओम्बड्समैन की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कई मामलों में आरोपितों को दूसरे शैक्षणिक केंद्रों में भेजा गया था, या दूसरे देशों में ट्रांसफर कर गया ताकि उन्हें बचाया जा सके। इसके अलावा, रिपोर्ट बताती है कि canonical (चर्च का धार्मिक कानून) प्रक्रियाओं में पीड़ितों को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए हैं। अक्सर पीड़ितों को अपनी आवाज रखने का वो स्थान नहीं मिलता है जो उन्हें मिलना चाहिए था।

ऐसे मामलों की जाँच के लिए जब लोकपाल की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया तो उसे भी चर्च के द्वारा मदद नहीं की गई। रिपोर्ट बताती है कि जाँच के दौरान चर्च की प्रतिक्रिया बहुत सीमित और न्यूनतम रही है। चर्च के पुराने आर्काइव तक अधिकतर शोधकर्ताओं की पहुँच नहीं है जिससे इस बारे में और अधिक जानकारी जुटाने में मदद नहीं मिलती है। जैसे ही पीड़ितों को कहीं भी अपनी बात कहने का मौका नजर आया, हजारों की संख्या में लोग बाहर आकर अपना पक्ष रख रहे हैं।

किनका शोषण हुआ, कौन-कौन दोषी हैं और कितनी संख्या में पीड़ितों को न्याय और मुआवजा मिला इसका भी कोई सही-सही डेटाबेस मिलना मुश्किल है। जो है भी तो उसके सही होने पर खुद ही कई सवाल हैं। अब समय है कि चर्च को अपने बनाए नियमों की समीक्षा करनी चाहिए। पीड़ितों को न्याय मिले, मुआवजा मिले और दोषियों को सजा मिले यह तय किया जाना बेहद जरूरी है।

स्पेन के कैथोलिक चर्च में बच्चों के साथ होने वाला यौन शोषण कोई पुरानी बात नहीं है बल्कि आज भी जारी है और काफी गंभीर है। बिशप का इस्तीफा और वैटिकन की जाँच एक बड़ा कदम जरूर है लेकिन इससे पूरी समस्या हल नहीं हो जाती। पुरानी रिपोर्ट्स, पीड़ितों की संख्या और नए मामले बताते हैं कि यह मुद्दा बहुत बड़ा है और सिर्फ मुआवजा देकर इसे खत्म नहीं किया जा सकता।

चर्च को सच में अपनी गलतियों को समझकर खुलकर काम करना होगा और अंदर से बड़े सुधार करने होंगे। वरना जिम्मेदारी लेने की बातें तो होती रहेंगी लेकिन असली दर्द झेलने वाले लोगों की आवाज ठीक से नहीं सुनी जाएगी।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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