Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीय2300 पहुँचा मृतकों का आँकड़ा: तुर्की-सीरिया के अलावा थर्राया था इजरायल और लेबनान भी,...

2300 पहुँचा मृतकों का आँकड़ा: तुर्की-सीरिया के अलावा थर्राया था इजरायल और लेबनान भी, तेज़ी से बढ़ रही मृतकों की संख्या

ल्लेखनीय है कि ये भूकंप तीन अलग-अलग समय पर आया, जिससे लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। पहला भूकंप सुबह चार बजे, दूसरा भूकंप सुबह दस बजे और तीसरा भूकंप दोपहर 3 बजे आया।

तुर्की और सीरिया में आए तीन शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही हुई है। अब तक कुल 2300 लोगों के मारे जाने की खबर है। अब भी मलबे में दबे लोगों को निकाला जा रहा है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई तस्वीर शेयर किए जा रहे हैं, जो भूकंप की भयावहता बताने के लिए काफी है। भूकंप के झटके इजरायल और लेबनान में भी महसूस किए गए थे। हालाँकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वहाँ जान-माल की क्षति नहीं होने की जानकारी मिल रही है। भूकंप का केंद्र तुर्किये था। इसलिए वहाँ सबसे ज्यादा क्षति की सूचना मिल रही है।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के हवाले से बताया, “तुर्की और सीरिया में घातक भूकंपों के कारण अब तक 2300 से अधिक लोग मारे गए हैं। तुर्की में 7.8, 7.6 और 6.0 तीव्रता के लगातार तीन विनाशकारी भूकंप आए।”

उल्लेखनीय है कि ये भूकंप तीन अलग-अलग समय पर आया, जिससे लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। पहला भूकंप सुबह चार बजे, दूसरा भूकंप सुबह दस बजे और तीसरा भूकंप दोपहर 3 बजे आया। रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा 78 आफ्टर शॉक्स भी महसूस किए गए। बताया जा रहा रहा है कि सीरिया के अलेप्पो और हमा शहर में भी काफी नुकसान हुआ है। सीरिया में तुर्की से सटे इलाकों में कई इमारतें गिर गईं और इसकी राजधानी दमिश्क में भी भूकंप के झटकों के बाद लोग सड़कों पर आ गए थे। वहीं दिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुःख जताया था।

उन्होंने सोमवार (6 फरवरी, 2023) को ट्वीट किया, “तुर्की में आए भूकंप के कारण जनहानि और संपत्तियों को हुए नुकसान से दुखी हूँ। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएँ हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना है। इस विपत्ति की घड़ी में भारत तुर्की के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है। इस भूकंप की त्रासदी से निपटने में हरसंभव मदद के लिए हम तैयार हैं।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -