भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य टकराव को लेकर यूरोप के एक इंडिपेंडेंट मिलिट्री इंस्टीट्यूट की अहम रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को किस तरह नाकों चने चबवा दिए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान करीब 88 घंटे तक भारत का आसमान पर पूरा नियंत्रण बना रहा। यानी उस समय भारत की वायुसेना पाकिस्तान पर भारी पड़ी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हवाई बढ़त की वजह से पाकिस्तान सैन्य और रणनीतिक रूप से कमजोर हो गया। हालात इतने बिगड़ गए कि आखिरकार पाकिस्तान को युद्धविराम की अपील करनी पड़ी।
यह रिपोर्ट ‘Operation Sindoor: The India-Pakistan Air War (7–10 May 2025)‘ नाम से प्रकाशित हुई है। इसे स्विट्जरलैंड के पुली शहर में स्थित एक इंडिपेंडेंट मिलिट्री इंस्टीट्यूट The Centre for military history and perspective studies (CHPM) ने जारी किया है। इस रिपोर्ट के लेखक एड्रियन फोंटानेलाज हैं। यह संस्थान 1969 से काम कर रहा है और किसी भी सरकार से जुड़ा नहीं है, इसलिए इसके विश्लेषण को निष्पक्ष माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने न केवल अपने सैन्य और नागरिक ठिकानों को अभेद्य सुरक्षा कवच से सुरक्षित रखा बल्कि पाकिस्तान के सैन्य अड्डों पर बेहद सटीक, गहरे और निर्णायक हमले कर उसकी कमर तोड़ दी। इस संघर्ष में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि कब, कहाँ और किस स्तर तक कार्रवाई होगी यह सब भारत तय कर रहा था जबकि पाकिस्तान सिर्फ नुकसान गिनने को मजबूर था।
पहलगाम हमले के बाद बदली भारत की रणनीति
सैन्य रिपोर्ट के मुताबिक, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया इस बार पूरी तरह बदली हुई और कहीं ज्यादा आक्रामक थी। बीते अनुभवों से अलग, इस बार संकट से निपटने की रणनीति न सिर्फ स्पष्ट और सख्त थी, बल्कि हर स्तर पर पूरी तरह तैयार भी दिखी।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस बार राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सशस्त्र बलों को दो-टूक संदेश दे दिया था कि आतंकवाद के खिलाफ आधे-अधूरे कदम नहीं बल्कि निर्णायक, ठोस और परिणाम देने वाली कार्रवाई ही होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों पर पाकिस्तान के भीतर हमले करने की अनुमति दी। साथ ही सेना और वायुसेना को यह छूट दी गई कि वे हालात को देखते हुए कार्रवाई के स्तर को खुद तय करें। 7 और 8 मई की रात जब पाकिस्तान की तरफ से हमलों की पहली कोशिश हुई, तो भारत ने पहले से तैयार दूसरे चरण की सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। इसी कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया।
रिपोर्ट साफ कहती है कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक जवाबी हमला नहीं था बल्कि यह पहले से सोची-समझी पहले से बनाई गई योजना और रणनीतिक सैन्य योजना का हिस्सा था, जिसका मकसद पाकिस्तान और आतंकी नेटवर्क पर दबाव बनाना था।
IAF का स्ट्राइक और पाकिस्तानी एयर डिफेंस की कमजोरी
भारतीय वायुसेना (IAF) ने 8 मई 2025 को पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा हवाई अभियान शुरू किया। इस दौरान एयर इंटरडिक्शन और एयर स्ट्राइक की गई। इन हमलों का मुख्य मकसद पाकिस्तान की सीमा निगरानी रडार सिस्टम, लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइलें (SAM) और एयरफोर्स के अहम ठिकानों को कमजोर करना था।
यूरोपीय सैन्य रिपोर्ट के अनुसार, 8 मई को पाकिस्तान के आठ एयरफोर्स बेस भारतीय हवाई हमलों की चपेट में आए। इसके बाद 9 मई को चार और एयरफोर्स ठिकानों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लगातार हमलों से पाकिस्तान की वायुसेना को भारी नुकसान पहुँचा और उसके एयर डिफेंस सिस्टम पर सीधा दबाव बना।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनियन और पसूर इलाकों में लगे कम से कम दो अर्ली-वॉर्निंग रडार सिस्टम पूरी तरह निष्क्रिय हो गए। ये रडार पाकिस्तान को पहले से हवाई हमले की चेतावनी देने में अहम भूमिका निभाते थे। इसके अलावा भारतीय वायुसेना ने HQ-9 एयर डिफेंस बैटरी को भी निशाना बनाया।
हालाँकि, पाकिस्तान ने यह दावा किया कि उसने 9 मई की सुबह 25 भारतीय ड्रोन मार गिराए लेकिन रिपोर्ट में इस दावे को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं बताया गया है। रिपोर्ट का एक बड़ा खुलासा यह भी है कि सीमा के पास पहले से तैनात IAF की S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान की वायुसेना को पूरी तरह चौंका दिया। इस सिस्टम की मदद से करीब 300 किलोमीटर दूर उड़ रहे एक एरीये या इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान को मार गिराने में सफलता मिली।
इन हमलों के बाद पाकिस्तान का एयर डिफेंस नेटवर्क लगभग ठप हो गया। कई रडार सिस्टम या तो नष्ट हो गए या फिर हमलों से बचने के लिए बंद कर दिए गए। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि भारतीय लड़ाकू विमानों के लिए पाकिस्तान की सीमा के पास और अंदर तक ऑपरेशन करना काफी आसान हो गया।
भारतीय एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान की सैन्य ताकत कमजोर
यूरोपीय सैन्य रिपोर्ट के मुताबिक, 9 मई की शाम पाकिस्तान की ओर से होने वाले संभावित हमले को भारत पहले ही भांप चुका था। जिसके कारण भारतीय वायुसेना ने पहले से तैयार अपनी योजना के तहत 10 मई की रात 2 बजे से 5 बजे के बीच बड़ा और निर्णायक हवाई हमला किया।
इस कार्रवाई में भारतीय वायु क्षेत्र के भीतर से ही Su-30MKI, जैगुआर और राफेल लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। इन विमानों से ब्रह्मोस, SCALP-EG और रैम्पेज जैसी आधुनिक और लंबी दूरी की मिसाइलें दागी गईं। हमलों का दायरा पाकिस्तान के भीतर लगभग 200 किलोमीटर तक फैला हुआ था और कुल सात अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, इन लक्ष्यों में एक एयर डिफेंस SAM बैटरी और पाकिस्तान के पाँच प्रमुख एयर बेस शामिल थे। इस्लामाबाद के पास स्थित नूर खान एयर बेस पर किए गए मिसाइल हमले में पाकिस्तानी वायुसेना का कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर पूरी तरह नष्ट हो गया, जिससे उसे बड़ा झटका लगा।
इसके अलावा मुरीदके एयर बेस, जो पाकिस्तान के MALE ड्रोन बेड़े का मुख्य केंद्र माना जाता है, वहाँ ड्रोन हैंगर और कंट्रोल सेंटर को भारी नुकसान पहुँचा। वहीं रहीम यार खान एयर बेस की रनवे पर हुए हमले से इतना बड़ा गड्ढा बन गया कि यह बेस ऑपरेशन के लायक नहीं रहा।
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि 10 मई की सुबह करीब 10 बजे, जब पाकिस्तान की ओर से जवाबी हमले के संकेत मिले, तो भारतीय वायुसेना ने दूसरी बड़ी हवाई स्ट्राइक को अंजाम दिया। इस बार भी रणनीति वही रही, लेकिन लक्ष्य और ज्यादा अहम और बड़े थे। इस दौरान सरगोधा एयर बेस की रनवे पर हमला कर उसे पूरी तरह तबाह कर दिया गया।
भारतीय वायुसेना के मुताबिक, इन ताबड़तोड़ हमलों में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 4 से 5 F-16 फाइटर जेट, एक विमान, एक C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, कई MALE ड्रोन, दो रडार सिस्टम, दो कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और एक SAM बैटरी नष्ट हुई।
हालाँकि पाकिस्तान ने यह दावा किया कि भोलारी में मौजूद विमान को केवल मामूली नुकसान हुआ और उसे जल्द ठीक कर लिया गया, लेकिन उसने यह भी स्वीकार किया कि इन हमलों में उसके पाँच सैन्यकर्मियों की मौत हुई।
यूरोपीय सैन्य रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लगातार, सटीक और पहले से तय किए गए हवाई हमलों ने पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को तहस-नहस कर दिया। हालात इतने खराब हो गए कि 10 मई की दोपहर तक पाकिस्तानी सैन्य कमान ने भारत से युद्धविराम की अपील करना शुरू कर दिया।
रिपोर्ट स्पष्ट रूप से संकेत देती है कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक जवाबी कार्रवाई नहीं था बल्कि यह भारत की बदलती रणनीतिक सोच, तकनीकी श्रेष्ठता और बढ़ते सैन्य आत्मविश्वास का खुला प्रदर्शन था। लगभग 88 घंटे तक कायम रही हवाई बढ़त ने यह साबित कर दिया कि अब क्षेत्रीय संघर्षों में नियम और शर्तें तय करने की क्षमता भारत के हाथ में है और यही दबाव अंततः पाकिस्तान को सीजफायर के लिए मजबूर करने वाला बना।


