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18 साल के अकुल धवन को क्लब ने नहीं दी एंट्री, ठंड से ठिठुरकर चली गई जान: इस साल अमेरिका में अब तक 6 भारतीयों की अस्वभाविक मौत

18 साल के अकुल धवन 20 जनवरी को अमेरिका के इलिनॉयस में मृत पाए गए थे। अब पता चला है कि ठंड में ठिठुरने से उनकी मौत हुई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि अकुल अपने दोस्तों के साथ शाम को क्लब गए थे। लेकिन उन्हें क्लब में घुसने नहीं दिया गया। इसके कारण वे बाहर ही रह गए।

वर्ष 2024 में अब तक कम से कम 8 भारतीय मूल के लोगों की अमेरिका में मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश छात्र थे। इनमें किसी को मार दिया गया तो कुछ की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। अब अकुल धवन की मौत के मामले में नई जानकारी सामने आई है।

18 साल के अकुल धवन 20 जनवरी को अमेरिका के इलिनॉयस में मृत पाए गए थे। अब पता चला है कि ठंड में ठिठुरने से उनकी मौत हुई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि अकुल अपने दोस्तों के साथ शाम को क्लब गए थे। लेकिन उन्हें क्लब में घुसने नहीं दिया गया। इसके कारण वे बाहर ही रह गए। कुछ देर बाद अकुल को जब फ़ोन किया गया तब कोई जवाब नहीं आया। इस इलाके में बहुत ठण्ड होती है और पारा -30 तक चला जाता है। इसी ठंड में ठिठुरने के कारण अकुल की मौत हो गई। बताया गया है कि उन्हें हाइपोथर्मिया हो गया था।

अमेरिका में भारतवंशी की अस्वभाविक मौत का यह अकेला मामला नहीं है। पिछले दो माह में अमेरिका में 8 भारतीय मूल के युवकों की मौत हो चुकी है। इनमें से कुछ भारतीय नागरिक भी थे। इनमें से 7 अमेरिका के अलग-अलग कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे और 1 मृतक टेक इंजीनियर था। जनवरी माह में अमेरिका में 5 भारतीय मूल के लोगों की मौत हुई, जबकि फरवरी में 3 लोगों की मौत हुई है। इन मामलों पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि इनमें से 2 की हत्या की गई थी।

15 जनवरी: जी दिनेश और निकेश की मौत

अमेरिका के कनेक्टिकट में 15 जनवरी 2024 को घर में दो भारतीय छात्रों की लाश मिली थी। इनका नाम जी दिनेश (22) और निकेश (21) था। दिनेश तेलंगाना, जबकि निकेश आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे। दोनों एक माह पहले ही अमेरिका पढ़ने गए थे। उनकी मौत की वजह साफ नहीं है।

16 जनवरी: विवेक सैनी की हत्या

हरियाणा के भगवानपुर गाँव के रहने वाले विवेक सैनी की 16 जनवरी को अमेरिका में हत्या कर दी गई थी। वे यहाँ मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे थे। उनपर हमले का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था। इससे पता चला कि हथौड़े से मार-मारकर उनकी हत्या की गई थी। हत्या करने वाला वही है, जिसकी वे सहायता करते थे।

20 जनवरी: अकुल धवन का शव मिला

भारतीय मूल के अमेरिकी अकुल धवन का शव 20 जनवरी को मिला था। वह अपने माता -पिता की मर्जी के खिलाफ इलिनॉयस यूनिवर्सिटी में पढ़ने आए थे। उनके अभिभावक अमेरिका के ही कैलिफोर्निया में रहते हैं। अब पता चला है कि उनकी मौत यह हाइपोथर्मिया से हुई थी।

29 जनवरी: नील आचार्य की मौत

भारतीय मूल के छात्र नील आचार्य का भी 29 जनवरी को अमेरिका की परड्यू यूनिवर्सिटी में शव मिला। उनकी भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। वह पुणे से पढ़े हुए थे और काफी होशियार थे। नील की माँ ने उनके गायब होने को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी। उनका शव मिलने के बाद चोट आदि के कोई निशान नहीं मिले थे।

2 फरवरी: श्रेयस रेड्डी का शव मिला

भारतीय मूल के श्रेयस रेड्डी का शव अमेरिका के ओहायो राज्य में 2 फरवरी को मिला था। बताया गया कि वह एक बिजेनस स्कूल में पढ़ते थे। उनके माता-पिता हैदराबाद में रहते हैं, लेकिन श्रेयस के पास अमेरिका का पासपोर्ट था। उनकी मौत के कारण के विषय में भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

5 फरवरी: समीर कामथ की आत्महत्या

भारतीय-अमेरिकी छात्र समीर कामथ का शव 5 फरवरी को मिला। वह इंडियाना राज्य में रहते थे। वे एक अमेरिकी नागरिक थे। वह अमेरिका की ही परड्यू यूनिवर्सिटी के छात्र थे। बताया गया कि उन्होंने खुद ही गोली मारकर आत्महत्या कर थी। वह मैकेनिकल इंजिनयरिंग के छात्र थे।

7 फरवरी: विवेक तनेजा की मौत

अमेरिका में भारतीय मूल के छात्र ही नहीं, बल्कि काम करने वाले प्रोफेशनल भी निशाने पर हैं। 2 फरवरी को विवेक तनेजा पर वाशिंगटन के एक रेस्टोरेंट में हमला हुआ था। वह इसमें बुरी तरीके से घायल हो गए थे। इसके बाद उनका इलाज चला। लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका और 7 फरवरी को उनकी मौत हो गई।

गौरतलब है कि इन सभी भारतवंशियों की मौत उस अमेरिका में हुई है जो लगातार मानवाधिकारों के नाम पर भारत को शिक्षाएँ देता रहता है। अमेरिका में जो मौतें हमलों के कारण हुई हैं, उनमें भी विशेष कार्रवाई की उम्मीद नहीं दिखती। जनवरी 2023 में भारतीय छात्रा जानवी कंडूला को एक पुलिसकर्मी ने मार दिया था। अब एक वर्ष बाद उसे एक अमेरिकी अदालत ने छोड़ दिया है। ऐसे में लोग अमेरिकी न्याय व्यवस्था विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही में अमेरिका में बढ़ती ड्रग्स आदि की समस्याओं ने सुरक्षा सम्बन्धी दिक्कतें भी पैदा की हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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