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गिलगिट-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान ने मोबाइल इंटरनेट पर लगाई पाबंदी, प्रदर्शन को कुचलने के लिए आर्मी उतारी: शिया लगा रहे भारत में शामिल होने का नारा

प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान के सूचना मंत्री मुर्तजा सोलांगी ने गिलगिट-बाल्टिस्तान में शांति और सब कुछ नियंत्रण का दावा किया था। लेकिन डॉन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस दावे के विपरीत प्रदर्शन जारी हैं।

पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय भूभाग गिलगिट-बाल्टिस्तान में बड़े पैमाने पर शिया विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ईशनिंदा के आरोप में शिया मौलवियों की गिरफ्तारी के बाद ये प्रदर्शन शुरू हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की आवाज कुचलने के लिए इलाके में मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है। पाकिस्तानी आर्मी की तैनाती की गई है।

प्रदर्शन का केंद्र स्कर्दू शहर है। प्रदर्शनकारी भारत में विलय की चेतावनी दे रहे हैं। वे ‘खोलो हमारा तारीख-ए-रास्ता हमें नहीं जाना तुम्हारे मुल्क, हम कारगिल की तरफ जाएँगे, रास्ते में रुकावट पैदा करोगे तो हम तुम्हें वहाँ जाकर दिखाएँगे’ जैसे नारे लगा रहे हैं।

प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान के सूचना मंत्री मुर्तजा सोलांगी ने गिलगिट-बाल्टिस्तान में शांति और सब कुछ नियंत्रण का दावा किया था। लेकिन डॉन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस दावे के विपरीत प्रदर्शन जारी हैं।

स्कर्दू में यह विरोध-प्रदर्शन के लोगों ने शिया मौलवी आगा बकीर अल-हुसैनी की गिरफ्तारी के विरोध में शुरू हुआ था। आगा बकीर ने पाकिस्तान में कड़े किए जा रहे ईशनिंदा कानून का विरोध किया था। उन्होंने काउंसिल की बैठक में कहा था कि इस कानून की आड़ में पाकिस्तान में शियाओं को निशाना बनाया जाता है। उनके इस बयान पर सुन्नियों ने 22 अगस्त 2023 को प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

आरोप है कि शिया मौलवी ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। लेकिन उन्होंने इससे इनकार किया था। प्रदर्शनकारी शियाओं ने कराकोरम हाईवे जाम कर दिया था। इसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।

मौलवी की रिहाई की माँग कर रहे प्रदर्शनकारी गृहयुद्ध और भारत में विलय की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यह इस क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विरोध-प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसमें ‘चलो, चलो कारगिल चलो’ के नारे गूँज रहे हैं।

गिलगिट-बाल्टिस्तान का दर्द

दरअसल ब्रिटेन से देश को आज़ादी मिलने से पहले गिलगिट-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर रियासत का अंग हुआ करता था, लेकिन 1947 के बाद से इस पर पाकिस्तान ने जबरन कब्जा जमा रखा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शिया समुदाय पर अन्याय होता आया है। इससे इस समुदाय के लोग खासे परेशान रहते हैं।

पाकिस्तान में इस्लाम के सुन्नी फिरके का वर्चस्व है। वहाँ हिंदू और ईसाई जैसे धार्मिक अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि इस्लाम के शिया और अहमदी फिरके भी जुल्म के शिकार हो रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से गिलगिट-बाल्टिस्तान में एक बड़ी शिया आबादी निवास करती है।

पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह जनरल जिया-उल-हक के शासन से शुरू होकर लगभग सभी सरकारें इस इलाके की जनसांख्यिकीय बदलाव (Demography Change) करने की कोशिश करती रही हैं। बाहर से लाकर यहाँ सुन्नियों को बसाया जा रहा है। गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र तीन प्रशासनिक भाग में विभाजित है- बाल्टिस्तान, दामेर और गिलगिट। इसका मुख्य प्रशासनिक केंद्र गिलगिट और स्कर्दू शहर हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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