इसके अलावा भारत रूस शिखर सम्मेलन में दोनों देश इकोनॉमिक पार्टनरशिप बढ़ाने पर जोर देंगे। इसके तहत 10 इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट और 15 कमर्शियल डील पर साइन होने वाला है। व्यापार बढ़ाने और निवेश के लिए जिन सेक्टर पर फोकस किया गया है, उनमें फार्मा, एग्रीकल्चर, एग्रो-प्रोडक्ट्स, फर्टिलाइजर, इंजीनियरिंग गुड्स और IT शामिल हैं।
सहयोग के पारंपरिक सेक्टर में से सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और स्पेस के क्षेत्र में नए समझौते होंगे। रूस भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर को सपोर्ट कर सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार 4 सितंबर को राष्ट्रपति पुतिन के साथ वन-ऑन-वन डिनर लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर किया है। इस दौरान रक्षा संबंधों, यूरेशियन स्थिरता, यूक्रेन और फाइनेंशियल सहयोग जैसे द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पीएम मोदी के पिछले साल किए गए मॉस्को दौरे के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने भी समिट से पहले एक प्राइवेट डिनर होस्ट किया था।
पुतिन के साथ सात मंत्री और एक बड़ा बिज़नेस डेलीगेशन पहले ही भारत पहुँच चुका है, जिसमें रूस के डिफेंस मिनिस्टर, फाइनेंस मिनिस्टर और सेंट्रल बैंक के गवर्नर शामिल हैं।
भारत के अपने सरकारी दौरे से पहले, पुतिन ने कहा है कि वह रूसी बाज़ारों में भारतीय इंपोर्ट बढ़ाने पर चर्चा करेंगे, और कहा कि मॉस्को भारत और चीन समेत अपने खास पार्टनर्स के साथ आर्थिक जुड़ाव को और गहरा करना चाहता है।
मंगलवार (3 दिसंबर 2025) शाम को मॉस्को में VTB इन्वेस्टमेंट फोरम में बोलते हुए, पुतिन ने कहा, “मैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले दौरे के दौरान भारतीय इंपोर्ट पर चर्चा करेंगे”, उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में भारत और चीन दोनों के साथ बाइलेटरल ट्रेड वॉल्यूम तेज़ी से बढ़ा है।
रक्षा क्षेत्र में बड़ा समझौता
यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार भारत आए पुतिन का राजकीय दौरा दोनों देशों के मजबूत रिश्ते का परिचायक है। इस और मजबूती देने के लिए कई अहम सौगात लेकर पुतिन आए हैं। रूस ने भारत को ‘नो-लिमिट्स’ स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का ऑफर दिया है। ये समझौता रूस ने चीन के साथ भी किया है। रूस का कहना है कि भारत के साथ भी हमारे सहयोग की कोई लिमिट नहीं है। रूस भी उतनी ही दूर जाने को तैयार है, जितनी दूर भारत जाने को तैयार है।
ब्रह्मोस मिसाइल अपग्रेडेशन
रूस के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को अपग्रेड करने पर समझौता होगा। इस मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए थे। एक- एक पाकिस्तानी टारगेट पर अचूक निशाना लगाया था। रूस के साथ ब्रह्मोस के हल्के और ज्यादा काम आने वाले मॉडल जैसे ब्रह्मोस एनजी को लेकर भी समझौता होगा। ये 400 किलोमीटर से दूर से भी टारगेट पर अटैक कर सकते हैं।
ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का एक बहुत ही सफल प्रमाण है। भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना चाहता है इसलिए रक्षा सौदों में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर जोर देता है। इसलिए रूस से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी बातचीत होगी।
SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट डील
रूस ने भारत को SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट डील और S-500 ऑफर किया है। ये हथियार हवा जमीन और स्पेस में भी दुश्मन के हर चाल पर सटीक निशाना लगा सकता है। इस डील से भारत की वायुशक्ति और रक्षा कवच मजबूत होगी।
सुखोई Su-57 रूस का पाँचवाँ जेनरेशन का स्टेल्थ मल्टी रोल फाइटर है। रूस ने Su-57E की सप्लाई के साथ-साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने और लाइसेंस निर्माण का प्रस्ताव रखा है। इसके निर्माण की शुरुआत रूस की फैक्ट्री में होगी, लेकरिन आगे चलकर HAL नासिक में इसका उत्पादन होगा।
Indian Defence News के मुताबिक, SU-57 में ट्विन सैटर्न AL-41F1 इंजन हैं। इसका रेंज, स्पीड और ताकत की कोई सानी नहीं है। ये भारत की हवा में ताकत को कई गुणा बढ़ा देगा।
स्टेल्थ डिजाइन, इंटरनल वेपन बे, आधुनिक रडार और एवियोनिक्स मिलकर फाइटर जेट को नई ऊँचाई देता है, जो मल्टी-रोल में माहिर है। यानी दुश्मन के सोचने से पहले , SU-57 हवा-जमीन और हर मुमकिन जगह से अटैक कर चुका होगा।
हाइपरसोनिक मिसाइल S-500 को लेकर समझौता
S-500 Prometheus का ऑफर भी रूस ने किया है। पुतिन के दौरे के दौरान ये भी भारत को मिलने वाला है। S-500 मिसाइल इंटरसेप्ट और एयर डिफेंस का ड्यूल कवच है। ये बैलिस्टिक मिसाइल, स्टेल्थ फ्लाइट, तेजी से उड़ रहे लक्ष्य चाहे वह स्पेस में हों या स्पेस के नजदीक हों और आक्रमण करने वाले हों, उन्हें S-500 की दीवार से होकर गुजरना होगा यानी ये एयर डिफेंस सिस्टम को आधुनिकतम बनाने वाला है।
सबसे बड़ी बात ये है कि रूस भारत की शर्तों को भी स्वीकार करता है। चाहे वह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हो या कोड शेयरिंग हो, साझा निर्माण हो या तकनीक के क्षेत्र में रिसर्च की बात हो। यानी भारत की ‘मेक इन इंडिया’ के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक अहम कदम होगा। S-400 का एडवांस वर्जन है S-500। S-400 ने ही ऑपरेशन सिंदूर के वक्त भारत के लिए ‘रक्षा कवच’ साबित हुआ।
2030 इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम
भारत और रूस के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। 2030 तक इसे बढ़ाकर 100 अरब डॉलर यानी 899460.40 करोड़ रुपए तक पहुँचाने का लक्ष्य है। पिछले कुछ सालों से भारत रूस से क्रूड ऑयल तेजी से खरीद रहा है। दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ने में इसका अहम रोल रहा है। फिर भी भारत निर्यात के मुकाबले 13 गुना ज्यादा आयात करता है।
भारत रूस से 63.8 अरब डॉलर का सामान मँगवाता है, जबकि रूस भारत से 4.8 अरब डॉलर का सामान खरीदता है। ऐसे में रूस अब भारत के साथ व्यापार संतुलित करने को लेकर पहल करने वाला है ताकि द्विपक्षीय संबंधों पर बाहरी देशों का असर नहीं पड़े।
भारत दौरे के दौरान राष्ट्रपति पुतिन क्रूड ऑयल को लेकर भी बड़ा ऑफर दे सकते हैं। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, पेट्रो केमिकल्स सहित अहम ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग के साथ साथ तकनीक और उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग और साझेदारी का विस्तार होगा। इससे पारस्परिक और इंटरनेशनल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
भारत की करेंसी का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा व्यापार में हो, इसके लिए सिस्टम बनाए जाएँगे।
उत्तर- दक्षिण के बीच अंतरराष्ट्रीय परिवहन को प्रोत्साहित करने, समुद्री मार्ग को बढ़ावा देने को लेकर भी समझौता हो सकता है। चेन्नई व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्गों से व्यापार में वृद्धि का प्रस्ताव भी है। यानी व्यापार में किसी तरह की रुकावट न आए, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है।
कृषि उत्पादों, खाद्य और उर्वरकों द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ाने पर समझौता होगा। मानवीय सहायता, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, संस्कृति, पर्यटन, खेल, स्वास्थ्य देखभाल और दूसरे क्षेत्रों में बातचीत को विस्तार मिलेगा।


