ईरान में आर्थिक संकट के चलते बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी है। तेहरान से शुरू हुए ये प्रदर्शन कई शहरों में फैल चुके हैं। लोगों के बीच ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ का डॉलर के मुकाबले में रिकॉर्ड गिरावट और 42 प्रतिशत पहुँची महँगाई को लेकर गुस्सा है। लोग सड़कों पर उतरकर ईरान के इस्लामी रिजीम का विरोध कर रहे हैं, इनमें बड़ी संख्या में Gen Z छात्र-छात्राएँ भी शामिल हैं।
सबसे पहले 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के ग्रैंड बाजार के दुकानदारों और व्यापारियों ने विरोध शुरू किया। विरोध में दुकानें बंद रखी गईं। इसके बाद विरोध तेहरान, इस्फहान, शिराज, मशहद, हमेदान और तमाम शहरों तक फैल गया। तीन दिन से जारी प्रदर्शन के कुछ वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसमें लोग सड़कों पर उतरकर नारे लगा रहे हैं- ‘मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा’, ‘आजादी-ए-आजादी’ और ‘तानाशाही का अंत हो।’
Many videos are coming in from Iran, showing people chanting in unison in the streets: “Mullahs must leave Iran” and “Death to the dictatorship.”
— Masih Alinejad ?️ (@AlinejadMasih) December 29, 2025
This is the voice of a people who do not want the Islamic Republic.
Hear the voices of unarmed people who have taken to the streets.… pic.twitter.com/yNIqkTViOu
प्रदर्शनों पर ईरान की सरकार ने कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने गृह मंत्री को प्रतिनिधियों से बातचीत करने का निर्देश दिया। साथ ही राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर मोहम्मदरेजा फरजिन का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया और उनकी जगह पूर्व अर्थव्यवस्था एवं वित्त मंत्री अब्दोलनासेर हेम्मती को नियुक्त किया गया है।
विरोध प्रदर्शन में Gen Z छात्रों की भागीदारी
इन प्रदर्शनों में जेन जी छात्र देशभर के 10 प्रमुख विश्वविद्यालयों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें तेहरान की 7 सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी शामिल हैं। इल्ना और सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, मध्य शहर इस्फहान के टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के साथ ही यज्द और जंजन जैसे शहरों के संस्थानों में भी विरोध प्रदर्शन हुए।
Tehran, 30 Dec: Students at Tehran University chase away suppressive forces trying to enter the campus
— M. Hanif Jazayeri (@HanifJazayeri) December 30, 2025
One brave woman can clearly be heard rallying the crowd with chants of "Down with the Dictator"
The MEK network in Iran has reported #IranProtests in 10 other universities too pic.twitter.com/rMNM2s67O9
तेहरान के अमीरकबीर यूनिवर्सिटी, ख्वाजे नसीर और बाकी कैंपसों में छात्रों ने हड़ताल, भूख हड़ताल और कैंटीन के घटिया भोजन को सड़क पर फेंककर विरोध जताया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिस की आँसू गैस, फायरिंग और गिरफ्तारियों की कार्रवाई भी सामने आई हैं, फिर भी छात्र डटकर प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।
December 28—Tehran, Iran
— People's Mojahedin Organization of Iran (PMOI/MEK) (@Mojahedineng) December 28, 2025
Khajeh Nasir University students launched a hunger strike, placing their meals on the floor in protest against poor academic and welfare conditions and officials’ indifference—saying even their table has become a tool of dissent.#IranProtests pic.twitter.com/hzv23XazUa
अमीरकबीर यूनिवर्सिटी के पास IRGC के बसिज बलों ने छात्रों पर हमला किया, जिसमें एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया और कई को गिरफ्तार किया गया। जेन जी की यह भागीदारी साल 2022 के महसा अमीनी प्रदर्शनों की याद दिलाती है और आंदोलन को नई ताकत दे रही है।
ईरान में आर्थिक उथल-पुथल
ईरान में ये प्रदर्शन देश में जारी आर्थिक संकट को लेकर हो रहे हैं। यह संकट ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ की भारी गिरावट से शुरू हुआ, जो आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों, खराब सरकारी नीतियों और वैश्विक दबाव से अर्थव्यवस्था चरमरा गई, जिससे महँगाई आसमान छूने लगी और लोग सड़कों पर उतर आए।
यूँ तो ईरान की मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहले ही कमजोर थी, लेकिन दिसंबर 2025 में यह ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गई- एक अमेरिकी डॉलर के बदले 14 लाख रियाल। पहले जहाँ एक डॉलर से 50-60 हजार रियाल मिलते थे, अब लाखों रियाल चाहिए। इससे आयात होने वाले सामान जैसे तेल, दवा, अनाज महँगे हो गए। ईरान वैसे भी तेल बेचकर कमाई करता है, लेकिन प्रतिबंध से डॉलर नहीं मिल पाते इसीलिए रिजर्व खत्म हो गए।
देश में महँगाई दर 42 प्रतिशत तक बढ़ गई, यानी पिछले साल की तुलना में चीजें औसतन 42 प्रतिशत महँगी हो गईं। उदाहरण के लिए रोटी, दूध, सब्जी की कीमतें 72 प्रतिशत तक उछल गईं। एक आम परिवार जो पहले एक लाख में गुजारा कर लेता था, अब 2 से 3 लाख भी कम पड़ जाते हैं। इतना सब होने के बाद केंद्रीय बैंक प्रमुख ने इस्तीफा दे दिया क्योंकि वे मुद्रा स्थिर नहीं कर पाए।
इस्लामी शासन से परेशान ईरान
ईरान में जारी प्रदर्शनों में शामिल लोग इस्लामिक रिजीम यानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामी सरकार के खिलाफ हैं, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से चली आ रही है। शुरू में आर्थिक गुस्सा था, लेकिन अब लोग तानाशाही शासन के खिलाफ विद्रोह बना चुके हैं, जहाँ ‘मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा’ जैसे नारे गूँज रहे हैं।
प्रदर्शनकारी इन्हें ‘मुल्ला तानाशाह’ कहकर कोस रहे हैं, क्योंकि देश का पैसा सैन्य हथियारों, प्रॉक्सी युद्दों (जैसे हिजबुल्लाह, हूती) पर खर्च किया जा रहा है, बजाए जनता की भलाई पर। देश में खासकर महिलाओं के हिजाब कानून और सख्त इस्लामी नियमों से तंग आ चुके हैं।
तेहरान के विश्वविद्यालयों में छात्र ‘इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद’ चिल्ला रहे हैं और धार्मिक प्रतीकों को निशाना बना रहे हैं। व्यापारी भी कह रहे हैं कि रिजीम की नीतियों से अर्थव्यवस्था बर्बाद हुई, न कि अमेरिकी सैंक्शंस से। यह 1979 क्रांति के खिलाफ पहला बड़ा विद्रोह लगता है, जहाँ लोग धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की माँग कर रहे हैं।
ईरान में प्रदर्शन पर अमेरिका का बयान और भूमिका
ईरान में इस्लामी शासन के विरोध में जारी प्रदर्शनों पर अमेरिका ने खुलकर समर्थन जताया है। खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को प्रोत्साहित किया और इस्लामी शासन की आलोचना की। ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था को ‘टूट चुकी’ बताया और कहा कि सरकार हर विरोध को दबाने के लिए लोगों पर गोली चलाती है।
29 दिसंबर 2025 को मार-ए-लागो में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “ईरान में जब भी दंगे होते हैं या कोई समूह बनता है। वे लोगों पर गोली चला देते हैं। वे लोगों को मार देते हैं।” उन्होंने इस्लामी रिजीम को ‘क्रूर’ करार दिया और कहा कि देश में सालों से असंतोष है, लेकिन रिग चेंज की सीधी माँग नहीं की। ट्रंप ने मुद्रा ‘रियाल’ की गिरावट और महँगाई पर फोकस किया।
UN राजदूत माइक वॉल्टज ने एक्स पर लिखा, “ईरान के लोग आजादी चाहते हैं। हम तेहरान और पूरे देश में प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं।” वहीं अमेरिकी सरकार के फारसी अकाउंट ने कहा कि वाशिंगटन ईरानी लोगों की आवाज को सुनने का समर्थन करता है और रिजीम से भी मौलिक अधिकारों का सम्मान करने को कहा। साथ ही इस्लामी शासन की प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की भी निंदा की। ये बयान प्रदर्शन के तेज करने में सहायक साबित हुए।
The people of Iran want freedom. They have suffered at the hands of the Ayatollahs for too long.
— Ambassador Mike Waltz (@USAmbUN) December 29, 2025
We stand with Iranians in the streets of Tehran and across the country as they protest a radical regime that has brought them nothing but economic downturn and war.…
बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर सैंक्शंस बढ़ाए हैं, जो आर्थिक संकट की जड़ हैं। लेकिन प्रदर्शनों पर अप्रत्यक्ष समर्थन देकर दबाव बनाया। ईरानी की इस्लामी सरकार ने इन बयानों को हस्तक्षेप बताया है, जबकि राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने बातचीत का संकेत दिया है।


