Monday, July 15, 2024
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दक्षिण कोरिया में मस्जिद बनाने को लेकर बवाल: स्थानीय लोगों ने सुअर भूनकर किया विरोध, पाकिस्तानी के हमले के बाद से तनाव

स्थानीय लोगों ने मोहल्ले में पोस्टर लगाकर भी मस्जिद निर्माण का विरोध किया। इन पोस्टरों में 'इस्लाम एक दुष्ट मजहब है जो लोगों को मारता है', 'हम इस्लामी मस्जिद के निर्माण का कड़ा विरोध करते हैं', 'सबसे पहले कोरियाई लोग' और 'आतंकवादियों का अड्डा' जैसे वाक्य लिखे हुए हैं। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी मस्जिद निर्माण जारी है। इसके 2022 के अंत तक शुरू होने की भी उम्मीद है।

दक्षिण कोरिया (South Korea) में प्रवासी मुस्लिमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच यहाँ डेगू के दहेयोन-डोंग में रहने वाले लोग प्रवासी मुस्लिमों द्वारा इलाके में बनाई जा रही मस्जिद का विरोध कर रहे हैं। कोरिया हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, विगत गुरुवार (15 दिसंबर 2022) को स्थानीय लोग निर्माणाधीन मस्जिद के पास इकट्ठा हुए और वहाँ उन्होंने सुअर का मांस पकाकर पार्टी की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दहेयोन-डोंग इलाके में बन रही मस्जिद का विरोध करने के लिए स्थानीय लोगों ने ‘डेगू मस्जिद विरोधी समिति’ का गठन किया है। यह समिति ही अप्रवासी मुस्लिमों द्वारा बनाई जा रही मस्जिद का विरोध कर रही है।

सोशल मीडिया पर शेयर की गई बारबेक्यू पार्टी (आउटडोर पार्टी) की तस्वीरों में एक छोटी मेज पर सुअर का सिर दिखाया गया है। तस्वीरों में दहेयोन-डोंग के लोगों को सुअर का मांस भूनते और उससे बने कई व्यजनों का लुफ्त उठाते देखा गया। बता दें कि सुअर को इस्लाम में हराम माना जाता है।

स्थानीय लोगों ने क्यूंगपुक नेशनल यूनिवर्सिटी के गेट के पास आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक पाकिस्तानी छात्र ने स्थानीय कोरियाई पर हमला किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी छात्र द्वारा किए गए हमले को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

मस्जिद निर्माण का विरोध कर रही ‘डेगू मस्जिद विरोधी समिति’ ने कहा, “एक स्थानीय निवासी ने मस्जिद निर्माण कर रहे व्यक्ति का टेंट हटाने की कोशिश की थी। पाकिस्तानी छात्र द्वारा उस पर हमला किया गया, लेकिन पाकिस्तानी छात्र पर छोटा-मोटा अपराध का आरोप लगाया गया।” यह आरोप तब लगाया जाता है, जब कोर्ट द्वारा किसी औपचारिक परीक्षण के बिना छोटे अपराधों के लिए जुर्माना लगाया जाता है।

कोरिया हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कानून व्यवस्था बनाए रखने और दोनों गुटों के बीच किसी प्रकार की झड़प को रोकने के लिए डेगू उत्तरी जिला पुलिस स्टेशन ने मस्जिद के पास इमरजेंसी टीम को तैनात किया है। गौरतलब है कि इससे पहले इसी साल अक्टूबर में मस्जिद निर्माण का विरोध कर रहे लोगों ने मस्जिद के बगल में सुअर का कटा हुआ सर रखकर विरोध किया था।

दक्षिण कोरिया के डेगू शहर के दहेयोन-डोंग के स्थानीय लोग और अप्रवासी मुस्लिमों के बीच संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। इस विवाद का कारण एक मस्जिद है, जिसका निर्माण 2020 के अंत में शुरू हुआ था। नाटकों और पॉप संस्कृति के लिए मशहूर दक्षिण कोरिया तेजी से बदल रही जनसांख्यिकीय चुनौती का सामना कर रहा है। साल 2020 के आँकड़ों के अनुसार, ‘अप्रवासी’ अब कुल आबादी का 3.3% हैं और उनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।

दहेयोन-डोंग में मस्जिद के बनने से स्थानीय दक्षिण कोरियाई डरे हुए हैं और वह अपने घरों को छोड़ने के लिए भी तैयार हैं। यहाँ की क्यूंगपुक नेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्र 2014 से नमाज अदा करने के लिए दहेयोन-डोंग में एक घर का इस्तेमाल कर रहे थे।

जनवरी 2020 में मस्जिद निर्माण का हुआ था विरोध (फोटो साभार: द न्यूयॉर्क टाइम्स)

हालाँकि, साल 2020 में 6 मुस्लिमों (पाकिस्तान और बांग्लादेश से) के एक ग्रुप द्वारा यहाँ जमीन खरीदे जाने के बाद से यहाँ सब कुछ बदलने लगा। उसी साल दिसंबर में इन मुस्लिमों ने स्थानीय अधिकारियों की अनुमति लेकर 20 मीटर लंबी मस्जिद बनानी शुरू कर दी। अप्रवासी मुस्लिमों का तर्क था कि अब तक जहाँ वह नमाज पढ़ रहे थे, वहाँ एक बार में केवल 150 लोग ही इकट्ठे हो सकते हैं।

स्थानीय कोरियाई लोगों की शिकायतें

स्थानीय कोरियाई लोगों का कहना है कि बीते कई वर्षों से वे लोग मुस्लिमों के साथ ही रह रहे हैं। अब तक उनसे कोई समस्या नहीं रही, लेकिन अब मस्जिद बन जाने से नमाज से होना वाला शोर बढ़ जाएगा। लोगों की यह भी आशंका है कि मस्जिद निर्माण से यह इलाका भीड़-भाड़ भरा हो जाएगा।

साल 2020 मस्जिद निर्माण शुरू होने के बाद से स्थानीय जिला प्रशासन के यहाँ के लोगों ने लगातार शिकायतें भेजनी शुरू कर दीं। इसके बाद लोगों के दवाब में आकर मस्जिद बनाने की अनुमति रद्द कर दी गई और मस्जिद का निर्माण रुक गया था।

हालाँकि, स्थानीय लोगों की यह खुशी थोड़े दिनों की ही थी, क्योंकि इसके बाद मुस्लिमों ने जिला प्रशासन के फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर दी। कोर्ट में उन्हें जीत मिल गई। इसके बाद इसी साल सितंबर में कोरियाई सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए मस्जिद निर्माण की अनुमति दे दी थी।

इसके बाद भी स्थानीय लोगों ने हार नहीं मानी और जिला प्रशासन से मस्जिद को ‘स्थानांतरित’ करने की माँग करने लगे। हालाँकि, उनकी यह अपील भी किसी काम नहीं आई। हालातों से मजबूर कोरियाई लोग अब दहेयोन-डोंग में मस्जिद के निर्माण को किसी ना किसी बहाने रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

मस्जिद के विरोध में लगे हुए पोस्टर (फोटो साभार: कोरियाई हेराल्ड)

कोरियाई लोग अब मस्जिद के गेट पर वाहनों को खड़ा कर रहे हैं और गली में सूअरों के कटे हुए सिर रख रहे हैं। यहाँ तक कि मस्जिद के पास खुले में सूअर का मांस भी पका रहे हैं। यही नहीं, नमाज के समय तेज आवाज में गाने भी बजा कर विरोध कर रहे हैं।

इसके अलावा, स्थानीय लोगों ने मोहल्ले में पोस्टर लगाकर भी मस्जिद निर्माण का विरोध किया। इन पोस्टरों में ‘इस्लाम एक दुष्ट मजहब है जो लोगों को मारता है’, ‘हम इस्लामी मस्जिद के निर्माण का कड़ा विरोध करते हैं’, ‘सबसे पहले कोरियाई लोग’ और ‘आतंकवादियों का अड्डा’ जैसे वाक्य लिखे हुए हैं। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी मस्जिद निर्माण जारी है। इसके 2022 के अंत तक शुरू होने की भी उम्मीद है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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