ये रोजाना रूटीन को ट्रैक करते, सुबह कहाँ जाते हैं मादुरो, किससे मिलते हैं। कब क्या करते हैं। यहाँ तक कि उनके घर के कुत्ते-बिल्लियों की आदतों की भी जानकारी ली गई।
घर से लेकर बाहर तक की हर जानकारी लेने के लिए अमेरिकी जासूस काराकस की गलियों में छिप कर रह रहे थे। आसमान से भी कई अमेरिकी स्टेल्थ ड्रोन उड़ते रहते, जो वीडियो और फोटो भेजते थे। 2019 में अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में इतनी खटास आ गई थी कि अमेरिका ने अपना दूतावास वहाँ बंद कर दिया था। वेनेजुएला का दूतावास भी अमेरिका में बंद किया गया था। ऐसे में जासूस अगर पकड़े जाते, तो मौत निश्चित थी।
मादुरों का करीबी एक ऐसा व्यक्ति था, जो अमेरिका को पूरी खबर देता था। मादुरो को पकड़ने की जिम्मेदारी अमेरिका के सबसे खतरनाक और स्पेशल यूनिट डेल्टा फोर्स को सौंपा गया। स्पेशल टीम ने स्पेशल ट्रेनिंग की। ट्रेनिंग के दौरान हर संभव आने वाली दिक्कतों की ट्रेनिंग दी गई, जैसे- अंधेरे में हमला करना, लोहे के दरवाजे तोड़ना आदि। ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नाम से ये ऑपरेशन चलाया गया।
डेल्टा फोर्स को बता दिया गया था कि राष्ट्रपति मादुरो अपने घर बदलते रहते हैं और 6 से 8 ठिकाने हैं, जहाँ वे परिवार के साथ रहते हैं। ऑपरेशन के दिन अमेरिका को शाम तक नहीं पता चल पाया था कि राष्ट्रपति मादुरो रात कहाँ गुजारने वाले हैं। ऑपरेशन के लिए ये जानना जरूरी था, ताकि उस परिसर में ही अमेरिकी सैनिक उतरे, जहाँ वे ठहरे हों।
विमानों और हेलीकॉप्टरों की तैनाती बढ़ाई गई
ऑपरेशन से कई दिनों पहले अमेरिका ने अपने क्षेत्र में लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों की संख्या काफी बढ़ा दी थी। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रीपर ड्रोन, खोजी ड्रोन और दूसरे हथियार तैनात किए गए। हमले से एक हफ्ते पहले सीआईए ने वेनेजुएला के एक बंदरगाह पर ड्रोन स्ट्राइक की, जो ड्रग से भरे नौकाओं और जहाजों को नष्ट करने के लिए थी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इसकी जानकारी दी थी कि नौका में ड्रग्स भरे थे इसलिए इस पर हमला किया गया और इस दौरान 115 लोग मारे गए।
क्रिसमस पर होने वाला था हमला
वेनेजुएला पर छिटपुट हमले महीनों से जारी थे। अमेरिकी हमलों को रोकने के लिए राष्ट्रपति मादुरो ने अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा। हमले को रोकने के बदले में वेनेजुएला के तेल तक अमेरिका की पहुँच को स्वीकार किया जाने वाला था। हालाँकि राष्ट्रपति ट्रंप ने मादुरो को देश छोड़कर तुर्किए जाने को कहा। इसके बाद मादुरो ने प्रस्ताव वापस ले लिया। अमेरिका ने इस पर कहा कि मादुरो डील को लेकर सीरियस नहीं हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने 25 दिसंबर को ही हमले की अनुमति दे दी थी। लेकिन हमले का वक्त निश्चित करने का अधिकार सेना और डेल्टा फोर्स की अगुवाई करने वाले सेना के अधिकारी को दे दिया गया। अमेरिकी सेना ने क्रिसमस का वक्त चुना था क्योंकि उस वक्त कई वेनेजुएलाई अधिकारी छुट्टी पर थे, लेकिन मौसम खराब होने की वजह से ऑपरेशन टल गया।
3 जनवरी की रात वेनेजुएला का आसमान साफ था। इसको देखते हुए शाम 4.30 बजे उपकरणों को व्यवस्थित कर दिया गया। एयरक्राफ्ट, रीपर ड्रोन, सर्च एंड रेस्क्यू हेलीकॉप्टर और फाइटर जेट तैनात कर दिए गए।
हमले का पूरा लाइव टेलीकास्ट राष्ट्रपति ट्रंप ने देखा
राष्ट्रपति ट्रंप मार ए लागो क्लब में डिनर कर रहे थे। इस वक्त कैबिनेट के सदस्य और दूसरे नजदीकी लोग मौजूद थे। कमरे में एक बड़ा स्क्रीन लगा हुआ था, जिस पर पूरा ऑपरेशन राष्ट्रपति ट्रंप ने सेना के अधिकारियों और अहम लोगों के साथ देखा। रात 10.46 बजे ट्रंप ने डिनर करने के बाद ऑपरेशन शुरू करने की इजाजत दी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देखा कि कैसे हाई-ट्रेंड अमेरिकन डेल्टा फ़ोर्स के सैनिक काराकस में निकोलस मादुरो के घर में घुसे। उस वक्त वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सो रहे थे। अमेरिकी सैनिक करीब 2 बजे हेलीकॉप्टर से परिसर में उतरे। राष्ट्रपति मादुरो के सिक्योरिटी को हमले का अंदाज लग गया था। इसलिए दोनों तरफ से फायरिंग हुई। इस फायरिंग में एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर डैमेज हुआ। इस बीच विस्फोटक का इस्तेमाल कर दरवाजा तोड़ा गया।
3 मिनट के अंदर सैनिक पहुँच गए। उन्हें पहले से ही चप्पे चप्पे का पता था इसलिए तुरंत ये राष्ट्रपति मादुरो के कमरे तक पहुँच गए। राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी अपने सेफ रूम में जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अमेरिकी सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया।
दरअसल स्टील-एनफ़ोर्स्ड सेफ रूम में वे दोनों चले भी गए थे, लेकिन उसे बंद नहीं कर पाए, इसलिए अमेरिकी सैनिक उन्हें पकड़ने में कामयाब रहे। यह पूरा घटनाक्रम बड़े से पर्दे पर अमेरिका में बैठे राष्ट्रपति ट्रंप और उनके साथियों ने लाइव देखा।
यह महीनों तक चले कैंपेन का नतीजा था । राष्ट्रपति ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को हटाना चाहते थे, लेकिन बड़ी लड़ाई में फँसे बिना। इसलिए महीनों की मेहनत के बाद क्रिसमस से कुछ दिन पहले ऑपरेशन को हरी झंडी दी गई।
साउथ फ्लोरिडा में अपने शानदार प्राइवेट क्लब में इकट्ठा हुए नेशनल सिक्योरिटी अधिकारियों से ट्रंप ने कहा, “गुड लक, और गॉडस्पीड।”
अमेरिकी हेलीकॉप्टर जल्द ही समुद्र के पार, पानी से 100 फीट ऊपर काराकास की ओर उड़ने लगी। शनिवार सुबह ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर मादुरो की तस्वीर पोस्ट की। तस्वीर में मादुरो अमेरिकी सैनिकों की कस्टडी में थे। उन्हें हथकड़ी लगाई गई थी। वे ग्रे स्वेटपैंट पहने हुए थे और ब्लैकआउट गॉगल्स लगा रखी थी।

पहले बिजली काटी, फिर एयरक्राफ्ट ने बोला धावा
ऑपरेशन की शुरुआत साइबर अटैक से की गई। सबसे पहले काराकस की बिजली काट दी गई। 150 से ज्यादा मिलिट्री एयरक्राफ्ट 20 अलग अलग बेस और नेवी शिप्स से उड़े और एक साथ कई ठिकानों पर हमला कर दिया। ये लोग समुद्र से थोड़ी ही ऊपर उड़ रहे थे। जैसे ही विमान कराकस की ओर बढा, अमेरिकी सेना ने ये सुनिश्चित किया कि सबकुछ सही से हो। किसी को ऑपरेशन की भनक न लगे।
अमेरिका ने ज्यादातर अटैक रेडियो टावर और ऐसी जगहों पर किए, जिससे जनहानि कम हो। हेलीकॉप्टर ने 160 स्पेशल ऑपरेशन एविएशन रेजिमेंट के नाइट स्टॉकर्स, जो रात में कम ऊंचाई पर उड़ने के लिए मााहिर हैं, उनका इस्तेमाल किया गया।
मादुरो को न्यूयॉर्क लाया गया
मादुरो को न्यूयॉर्क नेशनल गार्ड बेस लाया गया। फिलहाल उन्हें ब्रुकलिन जेल में रखा गया है। पूरे ऑपरेशन में अमेरिका के करीब आधा दर्जन सैनिक घायल हुए जबकि वेनेजुएला के करीब 40 लोगों की जान गई। इनमें सैनिक के साथ-साथ आम जनता भी शामिल है।
अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल भंडार पर है। राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा कर दी है कि अमेरिका अब तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करेगा। साथ ही कहा है कि वेनेजुएला को अमेरिका चलाएगा। हालाँकि इस तरह चलाना है इसकी जानकारी नहीं दी है। दूसरी तरफ वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को कार्यभार संभालने के लिए कहा है।


