दुनिया की सबसे बड़ी तेल संपदा वाले देशों में से एक वेनेजुएला फिर से अमेरिकी निशाने पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 दिसंबर 2025 को एक बड़ा ऐलान किया कि सभी सैंक्शंस वाले तेल टैंकरों पर ‘संपूर्ण ब्लॉकेड‘। इसका मतलब साफ है कि वेनेजुएला में तेल लेने या बेचने वाले जहाजों को रोक देना।
डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन को ‘फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन’ करार दिया। इन सबके लिए ट्रंप ने बहाना बनाया है नार्को-टेररिज्म, ड्रग्स और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को। लेकिन सच्चाई क्या है, वो कम ही लोग समझ पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये सब तेल के खेल की आड़ है। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं। ये भंडार करीब 303 अरब बैरल के हैं। वहीं, अमेरिका की पुरानी रिफाइनरियाँ इसी हेवी क्रूड ऑयल के संशोधन के लिए बनी थी, जो फिलहाल ठप हैं। ऐसे में ट्रंप का असली मकसद मादुरो को हटाकर तेल पर कंट्रोल हासिल करना लगता है, ताकि वो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गति दे सकें।
हालाँकि अमेरिका की यह घेराबंदी सिर्फ वेनेजुएला को नहीं, पूरी दुनिया को हिला सकती है। सप्लाई चेन के बाधित होने से तेल कीमतें बढ़ेंगी। खासकर भारत जैसे आयातक देशों पर असर पड़ेगा। भारत 85% तेल बाहर से लाता है। वेनेजुएला से सस्ता हेवी क्रूड मिलना बंद होने से डीजल महँगा होगा, ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ेगी, महँगाई चढ़ेगी।
बता दें कि ट्रंप ने मार्च 2025 में वेनेजुएला तेल खरीदने वाले देशों पर 25% टैरिफ भी लगा दिया था। जिससे भारत की रिलायंस जैसी कंपनियों ने वेनेजुएलन तेल से तौबा कर लिया था। कुछ ऐसा ही हाल ट्रंप ने रूसी तेल को लेकर किया है, ऐसे में भारतीय कंपनियों को नुकसान ही नुकसान होता दिख रहा है।
वैसे, ट्रंप ने वेनेजुएला की घेरेबंदी का बहाना जिन ड्रग्स को बताया है, वो आँकड़ों पर तो कहीं टिकता ही नहीं दिखता, क्योंकि वेनेजुएला ड्रग्स का ट्रांजिट पॉइंट तो है, लेकिन US तक पहुँचने वाले कोकीन का सिर्फ 5-8% हिस्सा ही होकर यहाँ से गुजरता है। जबकि ड्रग्स के अमेरिका में पहुँचने का मुख्य जमीनी रास्ता मैक्सिको है।
बहरहाल, इन सारी चर्चाओं के बीच आइए समझते हैं, तेल के उस खेल को, जिसके लिए डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को एक और जंग में ढकेलने के लिए तैयार खड़े दिख रहे हैं।
वेनेजुएला का तेल खजाना: दुनिया का सबसे बड़ा, लेकिन उत्पादन क्यों गिरा?
वेनेजुएला को ‘तेल का सौदा’ कहते हैं। यहाँ दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं- 303.3 अरब बैरल। यह सऊदी अरब (297 अरब) से भी ज्यादा है। ज्यादातर तेल ओरिनोको बेल्ट में है, जो एक्स्ट्रा-हेवी क्रूड से भरा है। यह तेल गाढ़ा, चिपचिपा और सल्फर युक्त होता है। इसे निकालना मुश्किल और महँगा है। लेकिन इसकी माँग भी ज्यादा होती है, क्योंकि इस भारी तेल को रिफाइन करने पर इससे डीजल, एस्फाल्ट और हेवी इंडस्ट्री के फ्यूल बनते हैं। भंडारों के हिसाब से वेनेजुएला और रूस दुनिया के करीब 67% हेवी ग्रेड के तेल का भंडार रखते हैं।
अब वेनेजुएला के तेल उत्पादन की बात करें तो उत्पादन के मामले में वेनेजुएला की हालत खराब है। साल 2000 में 3.2 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तेल का उत्पादन करने वाला वेनेजुएला नवंबर 2025 में सिर्फ 860,000 bpd तेल ही निकाल पाया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि ह्यूगो चावेज और मादुरो के शासन में PDVSA (स्टेट ऑयल कंपनी) का बुरा हाल हो गया था।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, वेनेजुएला का अक्टूबर में 1.01 मिलियन bpd था, लेकिन गिरावट जारी है। अगर सैंक्शंस हट जाएँ तो 1-2 साल में तेल का उत्पादन 2 मिलियन bpd तक पहुँच सकता है। लेकिन ट्रंप की नई घेराबंदी से फिलहाल ये गिरावट की ओर ही जा रही है।
अमेरिकी रिफाइनरियाँ वेनेजुएला के तेल पर ही बनीं, अब क्यों परेशान?
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, लेकिन आयात भी खूब करता है। अमेरिका की गल्फ कोस्ट की रिफाइनरियाँ जिनकी अमेरिकी क्षमता की कुल 40% तक कैपेसिटी है, वो हेवी क्रूड के लिए डिजाइन की गईं थी। ये रिफायनरियाँ 1970-80 के दशक में मैक्सिको, कनाडा और वेनेजुएला के हेवी तेल के हिसाब से बनीं थी। खासकर वेनेजुएला का मेरेय ब्लेंड (सुपर-हेवी) के लिए ये परफेक्ट फिट हैं। लेकिन वेनेजुएला से तेल के इंपोर्ट पर रोक लगने की वजह से ये फैक्ट्रियाँ लगभग ठप हैं। अभी ये कुल 15-17% ही उत्पादन कर पा रही हैं।
अब डोनाल्ड ट्रंप की ब्लॉकेड से US को भी नुकसान होना तय है। हेवी क्रूड की कमी से डीजल प्राइस बढ़ेंगे। रिफाइनरियाँ लाइट क्रूड (शेल ऑयल) पर कम प्रॉफिट कमाती हैं। EIA के मुताबिक, US ने 2001 में 1.3 मिलियन bpd वेनेजुएला से लिया, अब 100,000 से कम। कनाडा से ज्यादा आयात होगा, लेकिन पाइपलाइन लिमिट्स हैं। विशेषज्ञ कहते हैं, US ‘स्टक’ है, एनवायरनमेंटल रेगुलेशंस से नई रिफाइनरियाँ नहीं बनीं। ऐसे में ट्रंप तेल तो चाहते हैं, लेकिन बहाने से।
ट्रंप के बहाने नार्को-टेररिज्म में वेनेजुएला का रोल कितना बड़ा?
ट्रंप का मुख्य आरोप है: मादुरो नार्को-टेररिस्ट हैं, वो कार्टेल डे लॉस सोल्स चला रहे रहे हैं। US ने इसे टेररिस्ट ग्रुप घोषित कर दिया है। UNODC के मुताबिक, US-बाउंड कोकीन का सिर्फ 5% वेनेजुएला रूट से आता है, जबकि 80% ईस्टर्न पैसिफिक (कोलंबिया-इक्वाडोर) से और मैक्सिको के रास्ते आता है। वहीं, फैंटेनिल चीन से मैक्सिको के रास्ते अमेरिका में जाता है।
सैंक्शंस के नीचे तेल का काला बाजार, कैसे व्यापार करता है वेनेजुएला?
यहाँ ये समझना अहम है कि अमेरिका ने वेनेजुएला को साल 2017 से ज्यादा ही टारगेट पर रखा है। सरकारी कंपनी PDVSA पर इसी साल बैन लगाया गया था, तो अमेरिकी लोगों के वेनेजुएला से कारोबार पर साल 2019 में रोक लगा दी गई। हालाँकि वेनेजुएला उनकी कोशिशों से रुका नहीं, बल्कि शैडो फ्लीट्स के जरिए अपना कारोबार करता रहा। लेकिन पूरी नाकाबंदी से इस पर काफी हद तक लगाम लग जाएगी। वेनेजुएला न तो कच्चा तेल अवैध तरीके से बाहर भेज सकेगा और न ही रूक से नेफ्था जैसे उत्पाद खरीद सकेगा, जो रिफायनिंग के लिए बेहद जरूरी उत्पाद है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर छाएगा संकट
वैसे तो दुनिया भर में तेल सप्लाई में वेनेजुएला का हिस्सा महज 1% ही है, लेकिन वो अधिकतर हेवी क्रूड का उत्पादन करता है। हैवी क्रूड की कमी से इसे बाय-प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ेंगी। हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की सप्लाई में दिक्कत आएगी, तो मिडल डिस्टिलेट (डीजल) का मार्केट भी टाइट हो जाएगा। रूस-ईरान पर बैन की वजह से दुनिया पहले से ही परेशान है और अब वेनेजुएला की घेरेबंदी इस वैश्विक समस्या को और ज्यादा बढ़ा देगी।
भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा वार
भारत तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार है। साल 2023-24 में भारत ने वेनेजुएला से 254,000 bpd लिया था। मुख्य रूप से रिलायंस और नायरा एनर्जी वेनेजुएलन तेल को प्रोसेस करते हैं। लेकिन ट्रंप के 25% टैरिफ से फरवरी 2025 में ये खरीदी 93,000 bpd तक गिर गई थी। इसकी सप्लाई रूस से बढ़ी थी, लेकिन रूस पर भी बैन के चलते अब दिक्कतें अपना असली असर दिखाएँगी
इस वजह से भारत में डीजल 10-15 प्रतिशत महँगा हो सकता है। इसकी वजह से ट्रांसपोर्ट और कृषि क्षेत्र पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। नतीजे जीडीपी पर नकारात्मक असर के तौर पर दिख सकते हैं। यही नहीं, भारत में महँगाई भी 6-7 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
तेल का खेल कब होगा खत्म?
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला की घेरेबंदी तेल के लालच में है। वैश्विक सप्लाई चेन से उन्हें कोई मतलब नहीं दिखता। वो सिर्फ अमेरिका की जेब भरना चाहते हैं और वेनेजुएलन तेल भंडारों पर कब्जे की नीयत बनाए बैठे हैं। ऐसे में ग्लोबल साउथ को एकजुट होकर अमेरिकी प्रेशर के मुकाबले के लिए तैयार होना पड़ेगा, क्योंकि वेनेजुएला पर संकट आएगा तो नुकसान ग्लोबल साउथ को ज्यादा होगा।


