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खार्ग आईलैंड है ईरान का ‘स्पेयर हार्ट’, फिर भी उस पर हमले की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे इजरायल-US: जानें- कैसे सिर्फ IRGC ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए अहम है ये नन्हा सा द्वीप

खार्ग द्वीप पर होने वाली कोई भी सैन्य हलचल सिर्फ ईरान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक 'एनर्जी सुनामी' लेकर आएगी। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर उसके तेल बुनियादी ढांचे को छुआ गया, तो वह पूरे क्षेत्र के ऊर्जा नेटवर्क को मलबे में बदल देगा।

फारस की खाड़ी के नीले पानी के बीच बसा एक छोटा सा कोरल (मूंगा) द्वीप, जिसकी लंबाई महज कुछ किलोमीटर है, आज दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति और सबसे जिद्दी शासन के बीच युद्ध का केंद्र बन गया है। यह कहानी है ‘खार्ग द्वीप’ की। इसे आप ईरान की ‘तिजोरी’ कह सकते हैं या उसकी रगों में दौड़ता ‘खून’, क्योंकि ईरान जितना भी कच्चा तेल दुनिया को बेचता है, उसका 90 प्रतिशत हिस्सा इसी नन्हे से द्वीप से होकर गुजरता है।

आज जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध दूसरे सप्ताह में है, तब ट्रंप प्रशासन की मेज पर जो सबसे बड़ा नक्शा खुला है, वह खार्ग द्वीप का ही है। लेकिन इस द्वीप पर एक भी मिसाइल दागने का मतलब है- पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग लग जाना। यही वजह है कि खार्ग द्वीप फिलहाल इस महायुद्ध का वह ‘नो-गो जोन’ बना हुआ है, जहाँ हमला करना जीत की गारंटी तो है, लेकिन विनाश का आमंत्रण भी।

ईरान की इकोनॉमी का ‘कंट्रोल रूम’: क्यों खार्ग ही है असली निशाना?

खार्ग द्वीप ईरान के बुशहर प्रांत के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे एक प्राकृतिक किला बनाती है। ईरान के बड़े तेल क्षेत्रों जैसे अहवाज, मारून और गचसरन से पाइपलाइनों के जरिए कच्चा तेल इसी द्वीप तक लाया जाता है। यहाँ विशालकाय स्टोरेज टैंक हैं जिनकी क्षमता लगभग 3 करोड़ बैरल तेल जमा करने की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस द्वीप के टर्मिनल को नष्ट कर दिया जाए, तो ईरान की तेल निर्यात क्षमता रातों-रात शून्य हो जाएगी। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के पास आने वाला पैसा रुक जाएगा और ईरान का पूरा सरकारी ढाँचा चरमरा सकता है।

पेंटागन के पूर्व सलाहकार माइकल रुबिन जैसे रणनीतिकारों का मानना है कि खार्ग पर हमला करना ईरान के शासन के पैर काटने जैसा होगा। 2024 में भारी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने तेल बेचकर 78 अरब डॉलर कमाए हैं, और इस कमाई का रास्ता खार्ग से ही निकलता है।

हाल के दिनों में ईरान ने यहाँ से तेल का निर्यात बढ़ाकर 40 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुँचा दिया है, जो एक रिकॉर्ड है। यह इस बात का सबूत है कि ईरान युद्ध के लिए अपनी तिजोरी भरने में जुटा है। खार्ग द्वीप सिर्फ एक बंदरगाह नहीं, बल्कि वह वित्तीय इंजन है जो ईरान की मिसाइलों और ड्रोन प्रोग्राम को पैसा मुहैया कराता है।

युद्ध के रणनीतिकारों के लिए खार्ग द्वीप ईरान की सबसे कमजोर और सबसे महत्वपूर्ण नस (Achilles’ Heel) है। अगर वाशिंगटन या इजरायल ईरान के सैन्य साजो-सामान के वित्तपोषण को रोकना चाहते हैं, तो खार्ग को पंगु बनाना ही एकमात्र रास्ता बचता है। यही कारण है कि इजरायली विपक्षी नेता यायर लैपिड जैसे लोग खुलेआम कह रहे हैं कि ‘खार्ग को नष्ट करो और ईरान के शासन को गिरते हुए देखो।’

इतिहास की गवाही: क्यों हर अमेरिकी राष्ट्रपति ने खार्ग से बनाए रखी दूरी?

खार्ग द्वीप का महत्व आज का नहीं है, बल्कि दशकों से यह अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए एक पहेली बना रहा है। 1979 के ईरानी बंधक संकट के दौरान, तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर को सलाह दी गई थी कि खार्ग द्वीप पर कब्जा कर लिया जाए ताकि तेहरान घुटनों पर आ जाए।

लेकिन कार्टर ने अंततः पीछे हटने का फैसला किया क्योंकि उन्हें डर था कि इससे खाड़ी क्षेत्र में कभी न खत्म होने वाली आग लग जाएगी। 1980 के दशक में जब रोनाल्ड रीगन राष्ट्रपति थे और ईरान ने ‘होर्मुज स्ट्रेट’ में बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं, तब भी अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमला किया, लेकिन खार्ग द्वीप को हाथ नहीं लगाया।

ईरान-इराक युद्ध के दौरान सद्दाम हुसैन की इराकी सेना ने खार्ग पर भीषण हमले किए थे। तेल टर्मिनलों को काफी नुकसान भी पहुँचा था, लेकिन ईरान की इंजीनियरिंग और मरम्मत की गति इतनी तेज थी कि उन्होंने कुछ ही दिनों में परिचालन फिर से बहाल कर दिया।

यह दिखाता है कि ईरान ने इस द्वीप को बचाने के लिए कितनी तैयारी कर रखी है। आज भी, जबकि इजराइल ने तेहरान और अल्बोर्ज के ईंधन डिपो को उड़ा दिया है, खार्ग द्वीप अभी तक अछूता है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन जानता है कि खार्ग पर हमला करना ‘मधुमक्खी के छत्ते’ में हाथ डालने जैसा है।

अगर खार्ग पर मिसाइलें गिरती हैं, तो ईरान के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचेगा। ऐसी स्थिति में वह सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों के तेल बुनियादी ढांचे पर आत्मघाती हमले शुरू कर सकता है। यही वह डर है जो ट्रंप प्रशासन को सीधे हमले से रोक रहा है। खार्ग का इतिहास बताता है कि यह वह इलाका है जिसे दुश्मन डराने के लिए इस्तेमाल तो करता है, लेकिन इसे नष्ट करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता।

ट्रंप का दुविधापूर्ण फैसला: घरेलू राजनीति बनाम वैश्विक रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप के लिए खार्ग द्वीप पर फैसला लेना ‘आग से खेलने’ जैसा है। एक तरफ उनकी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ की नीति है, जिसके तहत वे ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद करना चाहते हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के अधिकारी इस द्वीप पर कब्जा करने या यहाँ कमांडो रेड (Special Forces Operation) मारने जैसे विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। ट्रंप का तर्क है कि अगर तेल का पैसा नहीं होगा, तो ईरान युद्ध नहीं लड़ पाएगा। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका की घरेलू राजनीति और महँगाई का मुद्दा है।

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (Mid-term Elections) करीब हैं। अगर खार्ग द्वीप पर हमला होता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। ‘सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज’ का अनुमान है कि तेल की कीमतों में तत्काल 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो जाएगी। ट्रंप जानते हैं कि अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतें उनकी लोकप्रियता को मिट्टी में मिला सकती हैं। वे एक तरफ ईरान को सबक सिखाना चाहते हैं, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी जनता को महँगी गैस और पेट्रोल नहीं देना चाहते।

इसके अलावा, परमाणु एंगल भी इस दुविधा को बढ़ाता है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास 60% तक संवर्धित लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम है। ट्रंप प्रशासन खार्ग द्वीप के साथ-साथ इन परमाणु भंडारों को सुरक्षित करने के लिए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।

रणनीति यह है कि किसी तरह ईरान की आर्थिक और परमाणु शक्ति को एक साथ काबू में किया जाए। ट्रंप ने खुद एक इंटरव्यू में कहा है कि ‘सभी विकल्प खुले हैं,’ जिसका मतलब है कि वे खार्ग द्वीप पर कब्जा करने या इसे पूरी तरह ब्लॉक करने से पीछे नहीं हटेंगे, बस वे सही समय और कम से कम नुकसान वाले रास्ते का इंतजार कर रहे हैं।

खार्ग की तबाही का मतलब है वैश्विक ‘एनर्जी सुनामी’

खार्ग द्वीप पर होने वाली कोई भी सैन्य हलचल सिर्फ ईरान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक ‘एनर्जी सुनामी’ लेकर आएगी। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर उसके तेल बुनियादी ढांचे को छुआ गया, तो वह पूरे क्षेत्र के ऊर्जा नेटवर्क को मलबे में बदल देगा। चूंकि खार्ग द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बेहद करीब है, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, इसलिए यहाँ की एक चिंगारी वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की गर्त में धकेल सकती है।

ट्रंप प्रशासन फिलहाल खार्ग द्वीप को एक ‘प्रेशर प्वाइंट’ की तरह इस्तेमाल कर रहा है। वे चाहते हैं कि ईरान इस डर से बातचीत की मेज पर आए कि उसकी ‘लाइफलाइन’ कभी भी काटी जा सकती है। लेकिन अगर युद्ध और भड़कता है और ईरान पीछे नहीं हटता, तो खार्ग द्वीप पर अमेरिकी कमांडो की मौजूदगी या इजरायली मिसाइलों का गिरना तय है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि खार्ग द्वीप ईरान की ढाल बना रहेगा या उसकी बर्बादी का सबसे बड़ा कारण बनेगा।

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