अमेरिकी समाचार मीडिया कंपनी सीएनएन ने भारत-विरोधी प्रचार का इतिहास रहा है। उसने एक आर्टिकल प्रकाशित किया है ‘नस्लवादी अब खुलेआम भारतीय-अमेरिकियों को निशाना बना रहे हैं।’
सीएनएन ने जानकारी दी है कि कैसे भारतीय मूल के एफबीआई निदेशक काश पटेल, निक्की हेली और विवेक रामास्वामी को दिवाली की शुभकामनाएँ देने पर श्वेत ईसाई राष्ट्रवादियों को दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।

लेख में कहा गया है, “कुछ भारतीय-अमेरिकी रूढ़िवादी इस बात से हैरान हैं कि राजनीतिक दक्षिणपंथी धड़ा अब उन पर निशाना साध रहे हैं।”
सीएनएन ने बढ़ते भारत-विरोधी नस्लवाद के लिए ‘राजनीतिक दक्षिणपंथ’, हाशिए पर चले गए स्थानीय लोग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वीजा नियमों में की गई सख्ती को जिम्मेदार ठहराया है। लेख में आगे कहा गया है, “MAGA गठबंधन के कुछ सदस्य खुलेआम कह रहे हैं कि केवल श्वेत ईसाई ही अमेरिका में रहने के हकदार हैं।”
यह साफ था कि अमेरिकी समाचार चैनल ने रिपब्लिकनों की आलोचना करने और नस्लवाद-विरोधी मुहिम को मजबूत करने के लिए यह लेख प्रकाशित किया था, लेकिन सीएनएन ने भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी बयानबाजी के लिए मशहूर लोगों के विचार भी इसमें शामिल किया।
रकीब नाइक
- सीएनएन ने जिन विशेषज्ञों को शामिल किया है उनमें रकीब नाइक भी एक थे। उन्हें ‘ ऑर्गनाइज हेट स्टडी सेंटर’ का संस्थापक और कार्यकारी निदेशक बताया गया।
अमेरिकी समाचार एजेंसी ने दावा किया है कि रकीब नाइक ने कहा कि उनकी टीम ने अकेले अक्टूबर में भारतीयों और अमेरिकी भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद और द्वेष फैलाने वाले लगभग 2,700 पोस्ट रिकॉर्ड किए।
HW started as a Twitter handle in 2019, & its website also became operational in the same year. It had no fathers until owned by Raqib Hameed Naik in 2023 with the help of WaPo journo Pranshu Verma. Verma didn’t even check the dates claiming it was founded in April 2021!
— DisInfo Lab (@DisinfoLab) September 30, 2023
(2/n) pic.twitter.com/D4xfOF1OHB
दरअसल नाइक एक इस्लामवादी और एक शातिर फर्जी खबर फैलाने वाला है। वह हिंदू-विरोधी दुष्प्रचार संगठन ‘हिंदुत्व वॉच’ का संस्थापक है, जिसका ट्विटर अकाउंट भारत में जनवरी 2024 में बंद कर दिया गया था।
यह भारत-विरोधी कट्टरपंथी है। इसने 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में हिंदू नरसंहार को नकारने की कोशिश की। इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं को रातोंरात पलायन के लिए मजबूर किया और जमकर रक्तपात मचाया। नाइक ने काशी की ज्ञानवापी मस्जिद में मिले ‘शिवलिंग’ का मज़ाक भी उड़ाया था। इसके बावजूद, सीएनएन ने नाइक को सोशल मीडिया पर ‘भारत-विरोधी कट्टरता’ पर एक विशेषज्ञ के तौर पर पेश किया।
रोहित चोपड़ा
- अमेरिकी समाचार मीडिया कंपनी ने रोहित चोपड़ा नाम के एक व्यक्ति का भी हवाला दिया। अमेरिका के सांता क्लारा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के तौर पर उनका विचार छापा गया है।
इसमें कहा गया है, ” रोहित चोपड़ा अति-दक्षिणपंथी समुदायों का ऑनलाइन अध्ययन करते हैं और नाइक के साथ ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट’ के सह-लेखक हैं।”
चोपड़ा ‘इंडियाएक्सप्लेन्ड’ नाम से एक हिंदूफोबिक एक्स हैंडल चलाते हैं, जिसे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या का आह्वान करने के कारण निलंबित कर दिया गया था।

चोपड़ा ने एक सर्वे में शामिल होने के लिए लोगों को आगे आने को कहा। इस सर्वे में पूछा गया था कि क्या भारतीय प्रधानमंत्री की हत्या उनके अपने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की जाएगी।

एक ट्वीट में, इस घटिया प्रोफेसर ने नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर साझा की और दावा किया, “ऐसे कपड़े पहने हुए हैं जैसे वह किसी भक्त का बलात्कार करने, पत्नी की हत्या करने या दंगा भड़काने जा रहे हों।”
उनके ट्वीट वायरल होने के बाद, प्रमुख वैश्विक थिंक टैंक ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन (ORF) ने उन्हें अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया। एनडीटीवी के पत्रकार शिव अरूर के अनुसार, इसी ‘प्रोफ़ेसर’ की कई साल पहले बाल पोर्नोग्राफ़ी के आरोप लगे थे और जाँच चल रही थी। भारत ने उनके ट्वीट पर बैन लगा दिया गया।
यही कारण है कि उन्होंने ‘वैश्विक हिंदुत्व को ख़त्म करने’ वाले सम्मेलन का बचाव करने और इस आयोजन के खिलाफ हिन्दुओं के विरोध को कम करके आंका। इसके बावजूद सीएनएन ने उन्हें अमेरिका में भारत-विरोधी नस्लवाद के ‘विशेषज्ञ’ के रूप में पेश करने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई।
भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी बयानबाज़ी के लिए मशहूर चोपड़ा ने अमेरिकी समाचार चैनल से कहा, “यह एक तरह की चेतावनी होनी चाहिए कि अल्पसंख्यकों के प्रति नस्लवाद से आप भी अछूते नहीं हैं।”
सिद्धार्थ वेंकटरामकृष्णन
- सीएनएन ने एक और विवादास्पद ‘विशेषज्ञ’ सिद्धार्थ वेंकटरामकृष्णन का मत लिया है। वह इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक डायलॉग (आईएसडी) में विश्लेषक के रूप में काम करते हैं।
उन्होंने पहले भी ‘लव जिहाद‘ को एक साजिश बता कर इसके असर को कम आंकने की कोशिश की थी, जबकि इसके हज़ारों मामले दर्ज हैं। ‘लव जिहाद’ गैर-मुस्लिम महिलाओं को इस्लाम में धर्मांतरित करने की एक चाल है।
सिद्धार्थ ने WIRED को दिए इंटरव्यू में ऑपइंडिया के ‘लव जिहाद’ को लेकर लिखे लेखों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इन लेखों में दिए गए कंटेंट को एक्स और टेलीग्राम जैसे दूसरे प्लेटफॉर्म पर फैलाया जाता है। उनका कहना है कि “इन लेखों की वजह से कुछ जगहों पर मुसलमानों के खिलाफ हिंसा या मुसलमानों को भगाने के आह्वान किए जाते हैं।”
उनका कहना है कि ऐसे लेख हिंदुत्व या हिंदू राष्ट्रवाद के अंतर्गत आते हैं। यह एक राजनीतिक विचारधारा है, जो दावा करती है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है जिसे इस्लाम और ईसाई धर्म जैसे बाहरी प्रभावों से खतरा है। ISD ने अपने लेख में इन बातों को छापा है।
इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक डायलॉग ने न केवल हिंदुत्व के बारे में झूठ फैलाया है, बल्कि 2022 के लीसेस्टर दंगों के लिए ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ (बिना किसी सबूत के) को दोषी ठहराने की कोशिश की है। इस इंस्टीट्यूट में सिद्धार्थ वेंकट रामकृष्णन एक विश्लेषक के रूप में काम करते हैं।
(मूल रूप से यह लेख अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)


