Saturday, July 4, 2020
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विकीपीडिया vs ऑपइंडिया: वामपंथी नैरेटिव और गिरोह की साजिश, ऑपइंडिया के खिलाफ यूँ खेला जा रहा खेल

विकीपीडिया एक ऐसी जगह है जहाँ पर अधिकांश आमजन जानकारी लेने के लिए आते हैं। ऐसे में इसे विश्वसनीय स्रोत मानना, केवल भूल के अलावा कुछ भी नहीं है। क्योंकि इसको पूरा वामपंथ का एक धड़ा हैंडल करता है, जिनकी मर्जी और नैरिटिव के बिना यहाँ पर कोई जानकारी ज्यादा देर तक नहीं ठहरती।

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Nupur J Sharma
Editor, OpIndia.com since October 2017

नरेंद्र मोदी सरकार के लगातार दूसरी बार केंद्र में चुने जाने से आहत वामपंथी संस्थानों ने गैर-वामपंथी आवाजों को दबाने का पुरजोर प्रयास किया। इस बीच ऑपइंडिया एक ऐसा संस्थान बनकर उभरा जो लगातार वामपंथियों की मंशा को उजागर करता रहा और आज भी कर रहा है। मगर, इस दौरान ऑपइंडिया के उद्देश्यों को कई मायनों में न केवल हेट कैंपेन्स के द्वारा नकारात्मक दिखाने का प्रयास हुआ, अपितु विकीपीडिया पेज के जरिए भी ऑपइंडिया की छवि धूमिल करने की कोशिश हुई।

विकीपीडिया पर ऑपइंडिया का पेज इतना नेगेटिव क्यों है?

विकीपीडिया पर ऑपइंडिया का पेज इतना नेगेटिव क्यों है? ये वो सवाल है जिसके बारे में लोगों ने हमसे कई बार पूछा। लेकिन, इस सवाल जवाब बेहद सरल है। वो ये कि हमने एक बने-बनाए इकोसिस्टम को चुनौती दी।

वो चुनौती जिसमें हमने वामपंथियों के झूठ का हमेशा पर्दाफाश किया, एजेंडे व प्रोपगेंडे की पोल खोली, कॉन्ग्रेस के भ्रष्टाचार पर मुखर रिपोर्टिंग की… इसलिए हमें मालूम था कि जो हमारी विश्वनीयता पर हमले हुए वो सब एक आम बात थी।

विकीपीडिया को वास्तविकता में वामपंथियों के एक धड़े द्वारा ही संचालित किया जाता है। इसलिए इस पर ऑपइंडिया की ऐसी छवि का दिखना बेहद सामान्य है।

दरअसल, जो पेज आप लोगों को विकीपीडिया पर दिखता है उसमें ऑपइंडिया के बारे में हमारी ओर से कुछ नहीं लिखा गया। इस जानकारी को उसी गिरोह के लोग संपादित करते हैं, जिन्हें ऑपइंडिया तथ्यों को पेश करके बेनकाब करता है।

संक्षिप्त में बताएँ तो विकीपीडिया पर ऐसी जानकारी के लिए ये बिंदु ही उत्तरदायी हैं;

  1. विकीपीडिया के पेजों पर ब्रांडो का स्वामित्व नहीं है।
  2. वामपंथियों ने ही इस बात को विकीपीडिया पर सुनिश्चित किया है कि ऑपइंडिया पक्षपाती है।
  3. अगर, इस पेज पर कोई आकर निष्पक्ष नजरिया दिखाता है, तो अन्य सहभागी उसे धमकाते हैं और बाद में ब्लॉक कर देते हैं।
  4. एडिटर्स ने हिंदुत्व और हिदुवाद के ख़िलाफ़ कई बार अपनी कुत्सित सोच का प्रमाण दिया है।
  5. हमने इनसे, इन सब बातों पर लड़ने की बजाय हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया।

ऑपइंडिया और विकीपीडिया की लड़ाई कहाँ से शुरू हुई

कुछ 2-3 साल पहले ऑपइंडिया का विकीपीडिया पेज था। जिस पर ऑपइंडिया से संबधी सभी जानकारी मौजूद थी और वो ये भी बताता था कि हमारा उद्देश्य आखिर है क्या? लेकिन कुछ समय पहले हमारे पेज को डिलीट कर दिया गया। हमें लगा कि ये उसी इकोसिस्टम का काम है, जिसे हमसे परेशानी होती है और जो समझता है कि हम विकीपीडिया पर बतौर पोर्टल पहचाने जाने के अधिकारी नहीं हैं।

हालाँकि, ये मालूम चलने के बाद हमें इस बात का कोई गम नहीं हुआ। हम बिना विकीपीडिया पेज के आगे बढ़ते रहे, आपके बीच अपनी पहचान बनाते रहे। मगर, कुछ समय बाद हमने देखा कि ऑपइंडिया का पेज विकी पर वापस आ चुका है। पर इस पोर्टल से संबंधित सूचनाएँ बेहद बरगलाने वाली है। जो न केवल ऑपइंडिया के कंटेंट को पक्षपाती बताती हैं, बल्कि अपमानजनक भी हैं।

यहाँ साफ कर दें कि ऑपइंडिया का विकी पेज ऑपइंडिया द्वारा नहीं बनाया गया। बल्कि इसे तैयार करने वाला खुद को ‘Winged Blades of Godric’ बताता है।

ऑपइंडिया पेज से संबंधित जानकारी

सबसे दिलचस्प बात देखिए कि साल 2018 में डिलीट होने वाले हमारे असली पेज का जिक्र भी विकी के आर्टिकल में किया गया है। इसे डिलीट करवाने के लिए Wings Blade of Godric ने खुद अपना मत रखा था और कहा था कि ऑपइंडिया विकीपीडिया पर होने के लायक नहीं है।

2018 का पेज, जहाँ ऑपइंडिया को डिलीट करने के लिए डिस्कशन हुआ

अब हालाँकि, Wings Blade of Godric ने जो हाल में पेज बनाया है। उसे 10 नवंबर 2019 को क्रिएट किया गया था। आप चाहें तो ये सब एडिट हिस्ट्री में साफ दिखेगा।

अब इसके बाद पेज में मौजूद जानकारी यदि पढ़े तो ये मालूम चलेगा कि पहले वाक्य से ही ऑपइंडिया की छवि को नकारात्मक पेश करने का प्रयास किया गया और बिना किसी रिसर्च के उसे फेक न्यूज वेबसाइट कह दिया गया।

इसके बाद उन सभी पोर्टल्स जैसे ऑल्टन्यूज व बूम का हवाला दिया गया जिन्होंने ऑपइंडिया के ख़िलाफ़ लिखा और खुद ऑपइंडिया ने उनके झूठ को पकड़ा।

कौन है Wings Blade of Godric 

Wings Blade of Godric का असली नाम अनुरीक बिस्वास है। वह कोलकाता का रहने वाला है और उसका राजनैतिक झुकाव उसके द्वारा एडिट किए लेखों को देखकर मालूम होता है।

बता दें अनुरीक बिस्वास लगातार उन लोगों के बारे में विकीपीडिया पर जानकारी को अपनी विचारधारा मुताबिक एडिट करता रहता है जो वामपंथियों के ख़िलाफ़ खुलेआम आवाज बुलंद करते हैं। मसलन-रिपब्लिक टीवी, जग्गी वासुदेव, अर्नब गोस्वामी और यहाँ तक स्वराज भी।

इस संपादक का खुद मानना है कि असल में सच्चाई वामपंथियों के विरोध में होती है, इसलिए जाहिर है वह तो उसे फेक न्यूज ही मानेगा।

इसके अलावा ये वामपंथी विकीपीडिया पर हिंदुओं के ख़िलाफ़ भी कई बार एडिटिंग कर चुका है। जैसे इसने जय श्री राम को ‘वार क्राई’ कहकर संबोधित किया था। 

‘DBXray and Newslinger’.

अब इतने के बाद ऑपइंडिया से नफरत करने वालों में केवल WBG के नाम का खुलासा नहीं होता। बल्कि उसके अजीज दोस्त DBXray का नाम भी पड़ताल में सामने आता है।

DBXray वो व्यक्ति है जो विकीपीडिया पर इस बात को सुनिश्चित करता है कि कोई भूल से भी ऑपइंडिया के लिए निष्पक्ष होकर अपनी राय न लिख दे।

वे इस बात पर गौर करता रहता है और जैसे ही कोई निष्पक्ष लिखता है, वे तुरंत उसे बदलकर फेक न्यूज वेबसाइट लिख देता है।

DBXray का असली नाम दीपेश राज है। ये वही विकीपीडिया का एडिटर है जिसने दिल्ली दंगों में इस्लामिक कट्टरपंथियों की भूमिका को खारिज कर दिया था। अंकित शर्मा की हत्या पर ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड मानने से इनकार किया था और बाद में लिख दिया था कि जब तक कोर्ट उसे दोषी नहीं मानता तब तक उसका नाम नहीं मेंशन हो सकता।

इसके अलावा जब उससे हेटस्पीच में वारिस पठान का नाम लिखने को कहा गया तो उसने कपिल मिश्रा का नाम लिख दिया था। वास्तविकता में वारिस पठान ने ऐसा बयान दिया था जिससे दंगों की आग में घी का काम किया। 

इन्हीं सब हरकतों के कारण हमने इस विकीपीडिया के एडिटर का खुलासा भी किया। लेकिन इससे जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद ऑपइंडिया पर हमले और बढ़ गए। जिससे विकीपीडिया पर ऑपइंडिया को ब्लैकलिस्ट करने की माँग उठने लगी।

इस ब्लैकलिस्ट की माँग ने मुख्यत: उस समय जोर पकड़ा जब हमने दिल्ली दंगों पर अपनी रिपोर्ट की और पक्षपाती मीडिया रिपोर्ट्स का खुलासा किया। जिसे हम टॉक पेज के स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं।

बता दें, DBXRAY, जिसने दिल्ली दंगों पर हिंदू घृणा से सना आर्टिकल लिखा था, हमारे खुलासे के बाद वामपंथी उसे बचाने के लिए उसके पक्ष में लेख लिखने लगे और ऑपइंडिया को ब्लैकलिस्ट करने की माँग इसलिए कि क्योंकि इसके बाद उसके लिंक को प्लेटफॉर्म पर सोर्स की तरह इस्तेमाल करना प्रतिबंधित हो जाता।

ऑपइंडिया को ब्लैकलिस्ट करने की माँग में शामिल न्यूजलिंगर कौन है?

WBG द्वारा ऑपइंडिया पेज बनाने के बाद विकीपीडिया पर इसे अब न्यूजलिंगर नाम के यूजर द्वारा संचालित किया जाता था। ऑपइंडिया पर हमले बोलने वाला न्यूजलिंगर कौन है?

ऑपइंडिया को ब्लैकलिस्ट कराने की कोशिशों में जुटे न्यूजलिंगर के बारे में अभी हाल में एक पत्रकार सौम्यादित्य ने बताया कि पिछले दिनों ऑफलाइन हैरेसेंट के मामले में उसे विकीपीडिया से ब्लॉक कर दिया गया। इसकी सूचना उन्होंने कुछ दिन पहले ट्विटर पर दी।

उन्होंने बताया कि कैसे उसने फर्जी पहचान बनाकर उसने एक एजेंसी को पीआर बनकर संपर्क किया और प्लैटफॉर्म पर एडिटिंग को लेकर पैसों से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि न्यूलिंगर अपने उपद्रव के कारण खूब पहचाना जाता है।

सौम्यादित्य ने इस दौरान इस बात का भी खुलासा किया कि विकीपीडिया पर आप मनमुताबिक एडिट नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, “50 भारतीय एडिटर्स की गैंग है, जो विकीपीडिया को कंट्रोल करते हैं।” वे कहते है कि आप भले ही पीएचडी हैं और उसपर एडिट करते हैं, लेकिन अगर उनके गिरोह के लोगों में कोई प्रथम वर्ष का छात्र है तो वो आपका एडिट दोबारा रिवर्स कर सकता है। यहाँ सौम्यादित्य गूगल के एल्गोरिदम के बारे में बात करते हैं और बताते हैं कि ये एक ओपन सोर्स है, जहाँ लोग अपनी जानकारी अनुसार एडिट कर सकते हैं।

हालाँकि, वह यह भी कहते हैं, विकीपीडिया में अपने एडिट को हटाए जाने पर एडिटर्स से सवाल पूछने की आजादी भी होती है। मगर, जैसे ही आप यहाँ एडिटर्स पर सवाल उठाएँगे, वो आपके संपादन को बोगस या निराधार करार देेंगे। जब आप उन्हें ज्यादा परेशान करेंगे या सवाल पूछना बंद नहीं करेंगे तो मुमकिन है आपको ब्लॉक कर दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि विकीपीडिया एक ऐसी जगह है जहाँ पर अधिकांश आमजन जानकारी लेने के लिए आते हैं। ऐसे में इसे विश्वसनीय स्रोत मानना, केवल भूल के अलावा कुछ भी नहीं है। क्योंकि इसको पूरा वामपंथ का एक धड़ा हैंडल करता है, जिनकी मर्जी और नैरिटिव के बिना यहाँ पर कोई जानकारी ज्यादा देर तक नहीं ठहरती। मगर, बावजूद इसके गूगल की गणित के मुताबिक हर मुद्दे पर इसका सर्च सबसे पहले दिखता है।

ऐसे में ऑपइंडिया से जुड़ी जानकारी जो ये विकी पेज मुहैया करता है, उससे ऑपइंडिया के पाठकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि सच को हमेशा बोला जाना चाहिए। ऑपइंडिया हमेशा अपनी सोच के अनुरूप हमेशा तटस्थ होकर खड़ा है और अनेकों हमलों के बाद अपना काम कर रहा है। लेकिन, हमारे सशक्त होने के बावजूद, हम ऐसी दुरात्माओं को अपने पीछे हमारे लिए अपमानजनक शब्द बोलने नहीं दे सकते। इसलिए सच उजागर होना चाहिए।

(मूल रूप से अंग्रेजी में लिखे गए ऑपइंडिया अंग्रेजी की एडिटर नुपूर शर्मा का लेख यहॉं विस्तार से पढ़ सकते हैं)

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Nupur J Sharma
Editor, OpIndia.com since October 2017

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