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फाइटर जेट के इंजन से Hammer मिसाइल तक, भारत में बनेंगे हाईटेक हथियार: Katana सिस्टम से मजबूत होगी सेना, जानिए कैसे रक्षा क्षेत्र में गेमचेंजर साबित हो रहा ‘मेक इन इंडिया’

'ऑपरेशन सिंदूर' के वक्त पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक निशाना लगाने वाला हैमर हथियार अब भारत में बनेगा। इतना ही नहीं पाँचवी पीढ़ी के फाइटर प्लेन के इंजन बनाने की तैयारी भी भारत में हो रही है। राफेल के फ्यूलजाल यानी फाइटर प्लेन का ढाँचा भी भारत में बनेगा। इसे 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किया गया घातक हथियार Hammer का उत्पादन अब भारत में होगा। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत ये रक्षा उपक्रम के क्षेत्र में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा Katana weapon भारतीय सेना को मिलने वाला है। इसके लिए भारत की एक रक्षा कंपनी ने फ्रांस-जर्मनी की रक्षा कंपनी KNDS के साथ समझौता किया है। ये दोनों हथियार अचूक निशाना लगाने के लिए मशहूर हैं।

भारत ने कई ऐसे समझौते किए हैं जिसका मकसद तकनीक हासिल करना और भारत में हथियारों का निर्माण है। राफेल के पार्ट्स ‘फ्यूजलाज’ के उत्पादन के लिए हैदराबाद में संयंत्र लग रहे हैं। इसके लिए डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच समझौता हुआ है।

फ्रांस की कंपनी सेफ्रान और डीआरडीओ के बीच 120 KN शक्ति वाला स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने पर समझौता हुआ है, जिसकी तकनीकि भारत को ट्रांसफर की जाएगी। यानी निकट भविष्य में भारत में ऐसे इंजन का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा, जो पाँचवी पीढ़ी के फाइटर जेट में इस्तेमाल होगा।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दिखा Hammer का जलवा

पहले बात करते हैं Hammer की। भारत और फ्रांस के बीच राफेल के सबसे खुँखार हथियार Hammer को लेकर डील पक्की हो गई है।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL और फ्रांस की साफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस ने मिलकर Hammer को भारत में ही बनाने का फैसला किया है।

एयरो इंडिया 2025 के दौरान फरवरी में दोनों कंपनियों ने एमओयू साइन किया था। लेकिन अब दोनों ने मिलकर ज्वाइंट वेंचर कंपनी यानी जेवीसी बनाने पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। ये कंपनी प्राइवेट लिमिटेड होगी जिसमें दोनों का शेयर 50-50 फीसदी होगा। नई कंपनी हैमर के निर्माण, आपूर्ति और दीर्घकालिक रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी।

BEL के सीएमजी मनोज जैन और साफ्रान के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट अलेक्जेंडर जिग्लर ने समझौते पर साइन किए। इस दौरान रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और सफरान के सीईओ ओलिवियर एंड्रीज मौजूद थे।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में ये एक अहम कदम है।

अचूक निशाने के साथ जरूरत के मुताबिक बदल लेता है टारगेट

HAMMER यानी Highly Agile Modular Munition Extended Range का इस्तेमाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय सेना ने किया। इसके सटीक टारगेट से पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया। इसकी बनावट ऐसी है कि इसे हल्के फाइटर प्लेन तेजस से लेकर राफेल तक में आसानी से फिट किया जा सकता है। ये बेहद सटीक और लंबी दूरी का एयर टू ग्राउंड हथियार है।

खराब मौसम, धुंध हो या देर रात का अंधेरा, हैमर की गाइडेंस तकनीक उसे टारगेट पर निशाना लगाने में मदद करती है। राफेल के साथ इसे ज्यादातर फिट किया गया है। फ्रांस का ये सबसे आधुनिक एयर टू ग्राउंड स्मार्ट बम है। ये दुश्मन के बंकर, कमांड सेंटर, रडार और पुलों को 70 किलोमीटर दूर से भी उड़ा सकता है। ये उड़ते हुए भी अपना रास्ता बदल सकता है और जैमिंग की परवाह नहीं करता।

HAMMER (फोटो साभार- NDTV)

इसकी खासियत यह भी है कि कम ऊँचाई से छोड़े जाने पर भी ये उतने ही घातक तरीके से टारगेट पर हिट करता है। भारत में इसका उत्पादन होने पर सेना को जल्दी जल्दी ये हथियार मिल पाएगी और लागत भी कम आएगा।

HAMMER के 60 फीसदी स्वदेशीकरण का टारगेट

शुरुआत में कुछ पार्ट्स फ्रांस से आएँगे। धीरे-धीरे हैमर के 60 फीसदी पार्ट्स का उत्पादन भारत में ही होगा। इनमें इलैक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल और सब एसेम्बली से जुड़े पार्ट्स शामिल हैं। इसकी क्वालिटी, एसेम्बली और टेस्टिंग BEL करेगी। इसका फायदा ये होगा कि सेना को सप्लाई करना आसान होगा। खर्च कम लगेंगे। भारत में पार्ट्स के बनने पर नई नौकरियाँ निकलेंगी। भारत का पैसा विदेश नहीं जाएगा। तेजस को भी हैमर का साथ आसानी से मिल जाएगा।

भविष्य में कटाना हथियार भी भारतीय बेड़े में शामिल होगा। भारत की रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी ने सेना को आधुनिकतम हथियार उपलब्ध कराने के मकसद से फ्राँस-जर्मन रक्षा समूह के साथ 20 नवंबर 2025 को समझौता किया। समझौते के मुताबिक, दोनों कंपनियाँ भारतीय सेना को कटाना हथियार की आपूर्ति करेगी।

कटाना प्रिसिजन-गाइडेड हथियार मिलेगा सेना को

कटाना एक 155 मिमी का प्रिसिजन-गाइडेड हथियार है, जिसे फ्रांस‑जर्मनी की रक्षा कंपनी KNDS ने विकसित किया है। भविष्य में भारतीय सेना को एडवांस और सटीक तोपखाना गोला‑बारूद उपलब्ध कराने के लिए केएनडीएस के साथ भारत की रक्षा कंपनी SMPP ने समझौता किया है। कटाना की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सटीकता है, यानी यह दूर बैठे दुश्मन के ठिकानों पर सटीक वार कर सकता है। इसमें लगा नेविगेशन सिस्टम इसे राह दिखाता है।

कंपनी आधुनिक तोपखाना सिस्टम का भी निर्माण करेगी। बताया गया है कि एसएमपीपी और उसकी सहयोगी कंपनियाँ मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए कटाना हथियार भारतीय सेना को उपलब्ध कराएँगे। साथ ही देश में आधुनिक तोपखाना, गोला-बारूद बनाएँगे।

कटाना बैलिस्टिक रेंज, एक्सटेंडेड रेंज और हाई प्रिसिजन जैसे अलग‑अलग मॉडल में उपलब्ध है। इसका तोपखाना और गोला-बारूद भारतीय सेना की मौजूदा 155 मिमी तोपों के साथ आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे सेना की आक्रामक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। ये समझौता ऐसे वक्त हुआ है, जब सेना को आधुनिक तोपखाना और गोला- बारूद की सख्त जरूरत है।

‘राफेल सपोर्ट हब’ बन सकता है भारत

यूरेशियन टाइम्स में भारत के पूर्व एयर मार्शल अनिल चोपड़ा का एक लेख छपा है। इसमें भारत के राफेल फाइटर जेट के ग्लोबल हब बनने की संभावनाओं पर चर्चा की गई है। अनिल चोपड़ा के मुताबिक, भारतीय सेना ने 114 ‘मेक इन इंडिया’ राफेल खरीदने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा है। भारत अगर 114 राफेल खरीदता है तो वो एफ4 वैरिएंट होंगे। भारत के पास फिलहाल राफेल F3R वैरिएंट है, जिसे और अपग्रेड किया गया है।

इसमें करीब 2 लाख करोड़ रुपए यानी 22 अरब डॉलर का खर्च होगा। अगर ये ऑर्डर दे दिया जाता है तो देश के इतिहास में ये सबसे बड़ा डिफेंस डील होगा। वायुसेना के पास फिलहाल 36 राफेल हैं और 26 मरीन राफेल का ऑर्डर नौसेना के लिए कर दिया गया है। ये मरीन परमाणु हथियारों को ढोने में सक्षम होंगे।

एयर मार्शल अनिल चोपड़ा के मुताबिक, राफेल विमानों के फ्यूजलाज का भारत में निर्माण शुरू होने वाला है। इसके लिए डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड यानी टीएएसएल के बीच जून 2025 में समझौता हुआ। हैदराबाद में फ्यूजलाज बनाने के लिए संयंत्र लगाया जा रहा है। ये पहला मौका है जब राफेल से जुड़ा कोई पार्ट्स फ्रांस के बाहर बन रहा है।

राफेल का फ्यूजलाज (फोटो साभार-Thibaud MORITZ / AFP)

बताया जा रहा है कि साल 2028 तक हर महीने 2 फ्यूजलाज बनने यहाँ शुरू हो जाएँगे। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को नई ताकत मिलेगी। डसॉल्ट पहले ही टाटा के साथ मिलकर हर साल 25 फ्यूजलाज बनाने पर सहमत हो चुका है। इसके अलावा भारत में एक एमआरओ प्लांट, एम-88 इंजनों के ओवरहॉल की सुविधा भी विकसित की जा चुकी है।

दुनियाभर में राफेल की बढ़ती माँगों को देखते हुए माना जा रहा है कि निकट भविष्य में भारत एशिया में ‘राफेल सपोर्ट हब’ बन जाएगा

फ्रांस के साथ मिलकर एडवांस इंजन बनाने की तैयारी

अनिल चोपड़ा के मुताबिक, फ्रांस की कंपनी सेफ्रान और डीआरडीओ ने संयुक्त इंजन कार्यक्रम शुरू करने पर सहमति जताई है। इसके तहत 120 KN शक्ति वाला स्वदेशी जेट इंजन विकसित किया जाएगा। भारत इसका इस्तेमाल पाँचवी पीढ़ी के फाइटर प्लेन AMCA के लिए करेगा।

सफ्रान ने 100 फीसदी तकनीक ट्रांसफर को मंजूरी दे दी है। इसमें अहम क्रिस्टल ब्लेड तकनीक भी शामिल है। धीरे धीरे इंजन की क्षमता 140KM तक किया जाएगा। दुनियाभर में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के पास ऐसे इंजन वाले फाइटर जेट हैं। चीन भी अब तक पाँचवी पीढ़ी का फाइटर जेट नहीं बना पाया है। उसे भी 5-7 साल अभी और लग सकते हैं।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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