Saturday, July 20, 2024
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आलू के बोरे, कच्चा रास्ता, अल्ताफ-यूनुस सरगना… नेपाल से भारत में आ रहे जाली नोट: रिपोर्ट में दावा- नकली नोट माँगे तो तस्कर ने पटकी 500 की गड्डियाँ

रिपोर्ट की माने तो भारतीय जाली नोटों के कारोबार में दुबई, मलेशिया, बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोग शामिल हैं। नेपाल का परसा और बारा जिला इसका अड्डा है। सरगना दुबई में है। रिपोर्ट में 80 करोड़ रुपए के नकली नोट नेपाल पहुँचने और उसे होली तक भारत के बाजार में खपाने का लक्ष्य तय किए जाने की बात भी कही गई है।

ऑपइंडिया ने हाल ही में भारत-नेपाल सीमा (India Nepal Border) पर बदलती डेमोग्राफी को लेकर सिलसिलेवार रिपोर्ट किया था। बताया था कि कैसे जनसंख्या में बदलाव का असर जमीन पर दिख रहा है। सीमा पर हो रही तस्करी, कानून व्यवस्था के लिए पैदा चुनौतियों और भारत की आंतरिक सुरक्षा को खतरे को लेकर भी हमने रिपोर्ट की थी।

अब दैनिक भास्कर ने नेपाली सीमा से हो रहे जाली नोट के कारोबार को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं। एक रिपोर्ट में बताया है कि जब उसके रिपोर्टर इस कारोबार में संलिप्त लोगों तक पहुँचे और जाली नोट माँगे तो उन्होंने नकली भारतीय नोट के 500 की गड्डियाँ पटक दी। इस रिपोर्ट की माने तो भारतीय जाली नोटों के कारोबार में दुबई, मलेशिया, बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोग शामिल हैं। नेपाल का परसा और बारा जिला इसका अड्डा है। सरगना दुबई में है। रिपोर्ट में 80 करोड़ रुपए के नकली नोट नेपाल पहुँचने और उसे होली तक भारत के बाजार में खपाने का लक्ष्य तय किए जाने की बात भी कही गई है।

दैनिक भास्कर के मुताबिक नेपाल में नकली नोटों के सबसे बड़े तस्कर अल्ताफ मियाँ और यूनुस अंसारी हैं। दोनों ISI के एजेंट बताए जाते हैं। पूर्व सांसद मिर्जा दिलशाद बेग के उत्तराधिकारी के तौर पर काम कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि नोटों के अलावा अल्ताफ और यूनुस सोने और ड्रग्स की भी तस्करी में शामिल हैं। दोनों फ़िलहाल जेल में हैं और वहीं से अपने सिंडिकेट को संचालित करते हैं।

जानकारी के मुताबिक नकली नोटों को सीमा के आर-पार ले जाने के लिए आलू के बोरे और लकड़ी के गट्ठरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन नकली नोटों में डॉलर सहित कुछ विदेशी मुद्राएँ भी शामिल हैं। साइकिल से खेतों और कच्चे रास्तों से नोट भारत में लाए जाते हैं। इस काम में बच्चों और महिलाओं का भी इस्तेमाल हो रहा है।

ज्यादातर तस्करी वीरगंज, रुपनदेही, सोनौली और सिद्धार्थनगर के बढ़नी बाॅर्डर से होती है। डील सेट होने से पहले वीडियो कॉल पर माल दिखाया जाता है। उसके बाद फोन पर रेट तय किया जाता है। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर दिग्विजय कुमार और अलोक द्विवेदी ने रिपोर्ट में बताया है कि नेपाल पुलिस इस तस्करी को रोकने में कोई रूचि नहीं लेती।

गौरतलब है कि इसी साल सितम्बर में बिहार की सीतामढ़ी पुलिस ने मेजरगंज और बैरगनिया में नकली नोटों की तस्करी के आरोप में नेपाल के पति-पत्नी सहित 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से भारतीय और नेपाली नकली नोटों के साथ अवैध हथियार भी बरामद हुए थे। अक्टूबर 2022 में भी गोरखपुर के गगहा क्षेत्र से नकली नोटों की खेप पकड़ी गई थी। अगस्त 2019 में दिल्ली पुलिस ने नेपाल से नकली नोटों की तस्करी करने वाले आलम अंसारी को गिरफ्तार किया था। उसके पास से ₹ 5.50 लाख रुपये के नकली नोट बरामद हुए थे। तब स्पेशल सेल ने खुलासा किया था कि नकली नोट भारत में नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से भेज जाता था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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