Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाJ&K: अनंतनाग में डीसी ऑफिस के बाहर ग्रेनेड अटैक, सुरक्षा बलों ने शुरू किया...

J&K: अनंतनाग में डीसी ऑफिस के बाहर ग्रेनेड अटैक, सुरक्षा बलों ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन

कड़ी सुरक्षा वाले परिसर के बाहर सुरक्षा गश्ती दल पर सुबह करीब 11 बजे ग्रेनेड फेंका गया। उन्होंने बताया कि ग्रेनेड का निशाना चूक जाने के कारण वह सड़क के पास ही फट गया, जिससे वहाँ गुजर रहे 10 लोग घायल हो गए।

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में उपायुक्त कार्यालय के बाहर शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को आतंकवादियों ने ग्रेनेड हमला किया। हमले में एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी और एक पत्रकार समेत 10 लोग घायल हो गए। इसमें एक 12 साल का बच्चा भी शामिल है। कुछ लोगों को काफी गंभीर चोटें आई हैं।

पुलिस के अधिकारी ने बताया कि अनंतनाग में कड़ी सुरक्षा वाले परिसर के बाहर सुरक्षा गश्ती दल पर सुबह करीब 11 बजे ग्रेनेड फेंका गया। उन्होंने बताया कि ग्रेनेड का निशाना चूक जाने के कारण वह सड़क के पास ही फट गया, जिससे वहाँ गुजर रहे 10 लोग घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। 

हमले के बाद इलाके में तनाव उत्पन्न हो गया है। अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर हमले में शामिल आतंकवादियों की तलाश शुरू कर दी है। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

बता दें कि आज जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के 2 महीने हो गए हैं। इस फैसले से आतंकियों के आका काफी बौखलाए हुए हैं। जम्मू-कश्मीर का माहौल बिगाड़ने के लिए वे कई तरह की साजिशें रच रहे हैं। हालॉंकि अब तक उन सारे मंसूबे सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण नाकाम रहे हैं। आतंकी भारतीय सीमा में घुसपैठ की लगातार कोशिश भी कर रहे हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -