जब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश सुधारों का जोखिम उठा सकते हैं तो पूरी दुनियाँ को सभ्यता सिखाने वाले पश्चिमी देश अफगानिस्तान से आँखें मूँदकर कैसे भाग सकते हैं?
दरअसल जरंज, अफगानिस्तान और ईरान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है और देलाराम (Delaram) से जरंज तक सड़क निर्माण भारत द्वारा ही कराया गया था जिसके माध्यम से भारत की योजना अफगानिस्तान के गारलैंड हाइवे होते हुए हेरात, कांधार, काबुल और मजार-ए-शरीफ तक पहुँचने की थी।
तालिबान की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अफगानिस्तान में सड़कों पर लाशों के ढ़ेर लगे हुए हैं। इसके अलावा लड़कियों का अपहरण किया जा रहा है ताकि तालिबानी लड़ाकों से उनका निकाह कराया जा सके।
मजार-ए-शरीफ शहर में स्थित कॉन्सुलेट में कुछ अधिकारी और अन्य भारतीय अभी मौजूद हैं। अब इन सभी को वहाँ से सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी भारतीय वायुसेना को दी गई है।
अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिक वापस लौट गए हैं। इसके बावजूद अमेरिका लगातार अफगान सेना की मदद कर रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान 572 आतंकवादियों को मार गिराया और 309 अन्य को घायल कर दिया है।