रेलवे ने सारी पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के आवागमन पर पहले ही रोक लगा दी है। केवल सामान ढोने वाले ट्रेनें ही चल रही हैं, जिन्हें गुड्स ट्रैन कहा जाता है। अब फ्लाइट सेवाओं पर भी पाबन्दी लगा दी गई है।
देश में बढ़ते कोरोना वायरस संक्रमण और उससे उपजे डर के कारण मास्क की कालाबाजारी चरम पर है। इस कालाबाजारी के आलम में सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से भी मास्क गायब होने की खबरें आनी शुरू हो गईं हैं। वाकया जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल का है, जहाँ से तकरीबन ढाई लाख से ज्यादा मास्क गायब हो गए हैं।
क्या आप जानना चाहेंगे कि इस लेख में क्या लिखा है और केरल सरकार की प्रशंसा के लिए कौन से तर्क दिए गए हैं? केरल अकेला ऐसा राज्य है जहाँ कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है, जहाँ सभी मज़हबों के लोग एक साथ रहते हैं, यहाँ भाजपा को एक ही सीट मिली, अन्य राज्यों में ऐसा नहीं होता- यही सब।
अमित कपूर लगातार अपने वीडियो में कहते हैं कि यह वायरस कोई बड़ा मुद्दा नहीं है बस आप को साफ़ सफाई का ध्यान रखना है, छींकते या खाँसते समय मुँह पर रुमाल रखिए।
केरल सरकार के रोक लगाने के बावजूद चर्च के पादरी ने सरकार के आदेश की अवहेलना करते हुए एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया, जिसमें कम से कम 100 लोगों ने हिस्सा लिया था।
दिल्ली में अब तक 30 मामले सामने आए हैं जिनमें से 5 का संबंध इस महिला से है। महिला द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण संक्रमित हुए लोगों में महिला की दो बेटियाँ, उसका भाई, माँ और एक डॉक्टर शामिल हैं। इस डॉ की वजह से मोहल्ला क्लिनिक में आने वाले न जाने कितने मरीज भी संदेह के दायरे में......
उत्तरी दिल्ली में एक शख्स ने मणिपुर की एक महिला पर पान थूका और फिर कोरोना कहकर वहाँ से भाग गया। इसके बाद मणिपुर की महिला ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई। विजयनगर थाने की पुलिस ने आरोपित शख्स के खिलाफ आईपीसी की धारा 509 के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों का कहना था कि सरकार को इन विदेशियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी लेकिन कुछ लोगों की मदद से इन लोगों को धार्मिक स्थल की आड़ में छिपाया गया। इन लोगों ने अपनी मेडिकल जाँच भी नहीं करवाई और बिहार में घूम-घूमकर इस्लाम का प्रचार करते रहे।
सीजेआई बोबडे ने कहा कि अब अदालत कोर्ट रूम में नहीं लगेगी। इसलिए वकीलों को भी आने की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि हफ्ते भर बाद फिर से समीक्षा की जाएगी। उसके बाद निर्णय लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट अगले आदेश तक केवल बेहद जरूरी मामलों की ही सुनवाई करेगा। वकीलों को लिंक मुहैया कराया जाएगा, जिससे वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर पाएँगे।