Wednesday, June 23, 2021

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प्रदूषण

जब 4 दिन में स्मॉग से मरे 12000 लोग: वे सॅंभल गए, लेकिन हम दिल्ली वाले कब सीखेंगे

ये वाकया लंदन के सबसे बड़े नागरिक संकटों में गिना गया। जिसके कारण 2 लाख से ज्यादा लोग बीमार पड़े और 12,000 लोगों से ज्यादा की जानें गईं। तबाही के इस धुएँ को वहाँ ग्रेट स्मॉग ऑफ लंदन का नाम दिया गया।

7 दिन में डेंगू के 230 मामले: केजरीवाल ने कहा डेंगू की तरह ही प्रदूषण को भी हराएँगे

पिछले हफ्ते डेंगू के 230 से अधिक नए मामले सामने आए थे। यह इस साल अब तक के एक हफ्ते में सबसे ज्यादा है। दिल्ली में इस साल अब तक डेंगू के 1,069 मामले सामने आ चुके हैं।

4 साल में ग्रीन टैक्स का 20% ही केजरीवाल सरकार ने किया खर्च, फिर क्यों न घुटे दिल्ली का दम

आरटीआई जवाब में कहा गया कि दिल्ली सरकार ने साल 2015 में कुल ₹1174.67 करोड़ का ग्रीन टैक्स जमा किया था, जिसमें से केवल ₹272.51 करोड़ ही खर्च किए गए। इस ₹272 करोड़ में से ₹265 करोड़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खर्च किए गए।

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर प्रियंका चोपड़ा ने किया रियेक्ट: लोगों ने पूछा- सिगरेट पीने में नहीं होती क्या दिक्कत?

एक यूजर ने प्रियंका चोपड़ा से पूछा, सुट्टा पीने में दिक्कत नहीं होती, पॉल्यूशन से परेशानी है। वहीं, किसी ने उन्हें उनके पोस्ट पर दोगला कहा, तो किसी ने पूछा कि उन पटाखों का क्या, जो उन्होंने अपनी शादी में दगवाए?

7 तरह के प्रदूषण रोधी मास्क बाजार में, दिल्ली-NCR में आपके लिए होगा यह BEST, एक है बिल्कुल फ्री

प्रदूषित हवा में साँस लेने से बचने के लिए अच्छे क्वालिटी का मास्क लेना बेहद जरूरी है, ताकि आप 'विषपान' की स्थिति वाले दिल्ली-एनसीआर में अपनी सेहत का ख्याल रख सकें।

दिल्ली का ‘कूड़े का पहाड़’: अगले साल ताजमहल से भी हो जाएगा ऊँचा

गाजीपुर का लैंडफिल साइट साल 1984 में शुरू किया गया था। इसकी क्षमता 2002 में ही पूरी हो गई थी। लेकिन, अभी भी शहर का मलबा सैकड़ों ट्रकों के जरिए यहाँ डाला जा रहा है। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि हर दिन लगभग 2 टन कचरा डाला जाता है।

सोचिएगा कामरेड! कैसे बदला ‘उत्तम खेती, मध्यम बान, नीच चाकरी, भीख निदान’ की कहावतों का देश

दिल्ली जैसे राज्यों में अंग्रेजों के दौर से ही गाय पालने पर पाबंदियाँ हैं। आस-पड़ोस के राज्यों से जब पशु घटे और खेत में पुआल जलने लगा तो धुआं दिल्ली तक भी पहुँचने लगा। अब साँस लेने में दिक्कत हो रही हो, तो परेशानी की जड़ में भी जाने की सोचिएगा कामरेड।

मंदी का डर पर्यावरण पर हावी: प्लास्टिक पाबंदी से पीछे हटी मोदी सरकार

मीडिया रिपोर्टों में इस फैसले से मंदी गहराने की आशंकता जताई गई थी। सरकार ने बताया है कि 11 सितंबर को मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल रोकने के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने और जनांदोलन के ज़रिए इसका इस्तेमाल बंद करने का है।

जल-संकट, प्लास्टिक जैसी कई समस्याएँ हल हो गईं होतीं, अगर हम अपना देसी ज्ञान सहेज पाते

इस तकनीक से दो से तीन दिन तक पौधों को पानी मिलता रहता है। इस्तेमाल करने के बाद फेंक दी जाने वाली बोतलों का इस तरह से दोबारा इस्तेमाल भी होता है।

फोटो फ़ीचर: ‘नमामि गंगे’ से बदलती माँ गंगा की सूरत

सीधे नदी की सफ़ाई करने से पहले उसमें करोड़ों लीटर गिरते हुए कचड़े को रोकना, उसे दूसरी तरफ़ मोड़ना, उसे रसायनों एवं अन्य तरीकों से ट्रीट करना सबसे पहला कदम था जिसका परिणाम इन तस्वीरों में दिख रहा है।

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