'स्क्रॉल' को आपातकाल वाली फैंटसी पूरी करनी है। उसका सपना है कि काश कोई इंदिरा आज आपातकाल लगा कर उसे झुकने को कहे और वह रेंगने लगे। अंडमान-निकोबार से आँकड़े निकाल कर यह साबित किया जा रहा है कि आपातकाल से पूरा देश ख़ुश था।
"हाँ, हम छोटे हो सकते हैं, लेकिन झूठे या नकली नहीं। छल हमारी संस्कृति नहीं है। हम रोज़ चुनौतियाँ देते हैं।"- अंसिफ अशरफ़ (प्रबंध सम्पादक, ब्रिटिश हेराल्ड)
अगर मारे गए किसी "समुदाय विशेष" के परिवार को मिले सरकारी मुआवजे को देखें और उसकी तुलना भीड़ द्वारा मार दिए गए डॉ नारंग, रिक्शाचालक रविन्द्र जैसी दिल्ली में हुई घटनाओं से करें तो ये अंतर खुलकर सामने आ जाता है।
अभिनन्दन सेखरी ने इस वीडियो को लेकर आज के माहौल को 'डर वाला' साबित करने की कोशिश की। अभिनन्दन ने इस घटना के हवाले से लिखा कि एक सौम्य स्लोगन को हथियार बनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को British Herald द्वारा 'World’s Most Powerful Person' घोषित करने से जिनके (दिलों में आग) सुलगनी थी, वह सुलगी। और वे ज़हर उगले बिना रह नहीं पाए। पत्रकारिता के स्तर को गिराते हुए यह मीडिया गिरोह अब विकिपीडिया को 'भरोसेमंद सूत्र' मानने लगे हैं।
फेक न्यूज़ फ़ैलाने का स्वाति का पुराना इतिहास है। उन्होंने ऑपइंडिया को मानहानि नोटिस भेजते हुए आरोप लगाए कि हमारे चलते उन्हें पाठकों की संख्या में कमी झेलनी पड़ी है।
हम स्वीडन जैसे आर्थिक रूप से सशक्त देश नहीं हैं जहाँ पर नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा और हेल्थ चेकअप के मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। हमारे संसाधन इतने सीमित हैं कि कुल बजट का 2.5% हिस्सा स्वास्थ्य के लिए झोंकना अभी हमारा लक्ष्य ही है और वर्तमान सरकार इस लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही है। लेकिन हमारा देश का अभी भी एक बड़ा वर्ग कुपोषित है और यही कुपोषण चमकी बुखार जैसी बिमारियों का पहला कारण है, ना की आयुष्मान भारत योजना।
गोधरा कांड मामले पर बीबीसी ने अपने अनेक झूठ को दो छोटे वाक्यों में समेट दिया। 2011 में बीबीसी ने खुद रिपोर्ट की थी कि इस्लामी भीड़ ने साबरमती एक्सप्रेस पर हमला किया था, जिसमें 31 लोग दोषी पाए गए थे। इन सभी 31 लोगों को कारसेवकों को जिंदा जलाने के आरोप में अपराधी पाया गया था। खास बात ये थी कि ये सभी समुदाय विशेष से थे।
प्रोपेगेंडा पोर्टल 'द वायर' बड़ी चालाकी से अपने हैडलाइन में ऐसे शब्द लिखता है जैसे कोर्ट ने अपराधी संजीव भट्ट को उम्र कैद की सजा उसके 30 साल पुराने अपराध के कारण नहीं बल्कि 'मोदी के गुजरात दंगों शामिल' होने की बात कहने के लिए दिया गया है।
ये पत्रकारिता के कुछ ऐसे संस्थान हैं, जो भोजन शुरू करने से पहले अन्न का प्रथम अंश जवाहरलाल नेहरू और दूसरा अंश गाँधी परिवार के लिए रख देते हैं। कम ही लोग ये बात जानते हैं कि BBC जैसे मीडिया गिरोह राहुल गाँधी द्वारा हर चुनाव नतीजों के बाद त्याग दिए गए जनेऊ गले में धारण कर के ही कार्यक्षेत्र को रवाना होते हैं।