आजाद भारत में भी राम के खिलाफ साजिशें बंद नहीं हुईं। इसके अगुवा खुद नेहरू थे। लंबे संघर्ष के बाद 5 अगस्त का वो दिन आ रहा है जब पीएम मोदी खुद मंदिर की शिला स्थापित करेंगे।
इस क़ानून के तहत, जो धार्मिक स्थल आज़ादी के समय जिस संप्रदाय का था वो आज और भविष्य में, भी उसी का रहेगा। जैसे किसी भी मस्जिद को मंदिर में नहीं बदला जा सकता है।
मोहम्मद इस्लाम जल्द ही अयोध्या जाकर महंत नृत्यगोपाल दास को यह पौराणिक महत्व वाला सिक्का भेंट करने जा रहे हैं। साथ ही मोहम्मद इस्लाम चाहते हैं कि यह सिक्का बेचकर जो भी धन इकठ्ठा हो, उससे एक ही ईंट सही, लेकिन राम मंदिर में जरूर लगवाई जाए।
"बाबरी मस्जिद के मलबे के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। ऐसे में मलबे के हटाने के समय उसका अनादर किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि हम तीन शताब्दी से इस मस्जिद में नमाज पढ़ते आ रहे थे, इसलिए इसके मलबे पर हम अपने हक के लिए याचिका दायर करेंगे।"
राम जन्मभूमि मंदिर में विघ्न डालने के आज आखिरी दरवाजे भी सुप्रीम कोर्ट ने बंद कर दिए हैं। जमीयत उलेमा ए हिन्द, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इशारे पर याचिका डालने वालों, इरफ़ान हबीब-प्रशांत भूषण के लिबरल गिरोह समेत 18 याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट की नई संविधान पीठ ने ख़ारिज कर दी हैं।