26/11 हमलों की बरसी के मौके पर मेंगलुरु की दीवारों पर भयावह बातें लिखी (ग्राफिटी) हुई थीं। जिसमें चेतावनी दी गई थी कि ‘संघी और मनुवादियों’ को ख़त्म करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद ली जा सकती है।
द वायर सरीखे एजेंडापरस्त मीडिया समूहों के लिए इस श्रेणी का गिरगिटनुमा विश्लेषण या दावा कोई नई बात नहीं है। प्रोपेगेंडा ही इनका एकमात्र उद्देश्य है भले उसके लिए स्क्रीन पर कुछ अनर्गल ही क्यों न परोसना पड़े।
सोनू निगम ने वीडियो में लेख प्रकाशित करने वाले मीडिया समूह के संबंध में कहा, “यह वीडियो उन दल्लों के लिए है।” फिर उन्होंने ट्रिब्यून के संपादक को संबोधित करते हुए कहा, “तू सोता कैसे है दल्ले?”
PM मोदी ने कहा कि किसी एक बात जिसने हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुँचाया है- वो राष्ट्रहित से ज्यादा प्राथमिकता अपनी विचारधारा को देना है