क्या हिन्दू आस्था के सबसे बड़े और अहम प्रतीक भगवान श्री राम के मंदिर निर्माण का सफर इतना सरल और खुशनुमा था? इसका जवाब इस मंदिर के इतिहास और बाबरी मस्जिद विवाद के साक्षी लोगों से बेहतर और कौन दे सकता है।
इस ट्वीट में सरफराज ने लिखा, "ये मस्जिद हमारा था और हमारा रहेगा। आज वो पावर में हैं तो मंदिर बना लिया। हम पावर में होंगे तो फिर से मस्जिद होगा। क्योंकि इतिहास रिपीट होता है।"
उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर सरकार द्वारा पाँच एकड़ जमीन जरूर आवंटित कर दी गई है, फिर भी इससे जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा होने में समय लग रहा है।
सुबह चार बजे के आसपास रामजन्मभूमि स्थान में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा हो गई। खबर आई कि भगवान प्रकट हो गए हैं। तड़के साढ़े चार बजे घंटे-घड़ियाल बजने लगे, साधु शंखनाद करने लगे और लोग जोर-जोर से गाने लगे, भए प्रगट कृपाला...