इस विशाल मंदिर को विशिष्ट बनाने के लिए स्टील का कोई उपयोग नहीं किया जाएगा। रामलला की मूर्ति भूतल पर ही रखी जाएगी। छत पर एक "शिखर" होगा, जो विशाल राम मंदिर की भव्यता को प्रदर्शित करेगा।
"हमें मस्जिद की ज़रूरत नहीं, नमाज तो हम कहीं भी पढ़ लेंगे..ट्रेन में, प्लेन में ज़मीन पर, कहीं भी पढ़ लेंगे। लेकिन हमें बेहतर स्कूल की ज़रूरत है। तालीम अच्छी मिलेगी 22 करोड़ मुस्लिमों को, तो इस देश की बहुत सी कमियाँ ख़त्म हो जाएँगी।"
संजुक्ता ने लिखा है कि आज भारतीय मुस्लिम राजनीतिक तौर पर अनाथ हो गए हैं। एक भी ऐसा नेता नहीं है, जिसने अयोध्या फ़ैसले पर अल्पसंख्यकों के अधिकार की बात की हो।
श्रीराम के जन्म को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओं की आस्था पर मुहर लगा दी। इसके पीछे कई कारण रहे, जिनमें से एक कारण भगवान विष्णु भी हैं। वही विष्णु, जिन्होंने श्रीराम के रूप में अवतार लेकर सरयू तट को पवित्र किया। जब वो ख़ुद बोलें तो भला कौन न माने?
मोनिका ने दावा किया है कि उनके पति तहसीन पूनावाला को शो में काफ़ी प्यार और समर्थन मिला। वह काफी पॉपुलर थे। लेकिन अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों की वजह से तहसीन अब लौट आए हैं।
लेख में कहा गया है कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दूरगामी असर होगा। समय के साथ यह देखने को मिलेगा। लेखक ने 'उम्मीद' जताई है कि भारत के लिए यह उतना घातक नहीं हो, जिस तरह वह फैसला पाकिस्तान के लिए साबित हुआ।
सामान्यत: जब एक पीठ द्वारा किसी विषय पर फैसला दिया जाता है, तो निर्णय को लिखने वाले न्यायाधीश का नाम इसमें दिया जाता है। लेकिन अयोध्या के फैसले को किसने लिखा है, इसका जिक्र नहीं किया गया है।
जैश-ए-मोहम्मद ने हमले से संबंधित जानकारी और सूचनाओं के लिए 'डार्क वेब' की तकनीक का सहारा लिया, जिसमें सारी बातें इनक्रिपटेड थीं। कोडवर्ड के सहारे चल रही इस बातचीत को डिकोड कर सुरक्षा एजेंसियों ने...
“कैफू भैया इंडिया में सिर्फ कुछ तबक़ों ने माहौल बिगाड़ दिया है वरना इंडिया जैसे हिंदू बहुसंख्यक देश में कैफ और जहीर खान जैसे क्रिकेटर हीरो के श्रेणी में आते हैं और शाहरुख, सलमान और आमिर खान सुपरस्टार हैं। ये एक पूरे हिंदुस्तानी का प्यार है। बाकी आपका मैसेज बहुत ही अच्छा है।”
Stan (अगर H को साइलेंट कर दें तो, जो कि टेलिग्राफ के संपादक की मंशा भी थी, तभी उसने इसे ब्रेक करके हेडलाइन बनाई) का अर्थ शैतान होता है। खैर... शायद इन्हें नहीं पता लेकिन ये हेडलाइन बनाते-बनाते खुद हेडलाइन बन जाएँगे, JNU से गायब होते वामपंथियों की तरह।