खैरात नहीं मुआवजा है मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन: ओवैसी पर बरसे ‘कारसेवक’ मोहम्मद आमिर

आमिर 1 दिसंबर 1992 को देश भर से आने वाले हजारों कारसेवकों में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुँचे थे। आमिर के अनुसार 6 दिसंबर को मध्य गुंबद पर चढ़ने वाले वो पहले व्यक्ति थे।

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मस्जिद को दिए जाने वाले 5 एकड़ जमीन को खैरात बताया था। अब उनके इस बयान पर मोहम्मद आमिर उर्फ बलबीर सिंह का बयान सामने आया है। ओवैसी के इस बयान के लिए वो उन पर जमकर बरसे। बता दें कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस में मोहम्मद आमिर भी शामिल थे। फिर बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया।

बता दें कि दशकों पुराने विवाद और 134 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (नवंबर 9, 2019) को अयोध्या भूमि विवाद का फैसला सुना दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने एकमत से अयोध्या को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हुए पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन रामलला विराजमान को सौंपकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। वहीं मुस्लिम पक्षकारों को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने का निर्णय सुनाया।

असदुद्दीन ओवैसी ने अदालत के इस फैसले पर अपनी नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि वो इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना था कि उन्हें खैरात में पाँच एकड़ जमीन नहीं चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुल्क हिन्दू राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है। संघ अब काशी और मथुरा के मुद्दे को भी उठाएगा।

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अब ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मोहम्मद आमिर ने कहा कि मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को जो जमीन दी जा रही है, वो खैरात नहीं, बल्कि मुआवजा है। इससे पहले ओवैसी के बयान पर बाबा रामदेव ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि ओवैसी का अपना एक अलग मजहबी एजेंडा है। उस मजहबी एजेंडे को चलाकर ये अपना राज कायम रखना चाहते हैं और लोगों को अलग-अलग तरीके से भड़काना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “अगर ओवैसी का वश चले तो ये हैदराबाद में निजामी के समय की तरह ही दूसरा फसाद खड़ा कर दे, लेकिन इसकी औकात ही नहीं है इतनी कि हिन्दुस्तान का बँटवारा कर सके।”

आमिर 1 दिसंबर 1992 को देश भर से आने वाले हजारों कारसेवकों में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुँचे थे। आमिर के अनुसार 6 दिसंबर को मध्य गुंबद पर चढ़ने वाले वो पहले व्यक्ति थे। बता दें कि आमिर ने एक मुस्लिम महिला से शादी की है और इस्लाम की शिक्षाओं का प्रसार करने के लिए एक स्कूल चलाते हैं। मोहम्मद आमिर और मोहम्मद उमर (एक अन्य कार सेवक जिन्होंने विध्वंस में भाग लिया था) ने मिलकर अब तक 100 से अधिक मस्जिदों का निर्माण किया है।

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