आरोपित को उसी जगह से गिरफ़्तार किया गया था, जहाँ से उसने घाट को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। उत्तराखंड पुलिस ने कहा है कि जाँच जारी है। धमकी भरे कॉल के बाद, इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पुलिस विभाग की सोशल मीडिया निगरानी शाखा ने रविवार को 22 मुक़दमे दर्ज किए और 40 लोगों को हिरासत में लिया। एडीजी लखनऊ जोन पीवी रामाशास्त्री के मुताबिक, शनिवार देर रात तक ही 37 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
यह दूसरा मजहब यदि सचमुच सहिष्णु है तो तत्काल कम से कम काशी और मथुरा के मंदिरों को खुद खाली करे और हिंदुओं के साथ वहाँ भव्य मंदिर बनवाए। बाकी, 30 हज़ार मंदिरों की तो बात भी नहीं हुई है….
चिंता का विषय यह है कि इन लोगों ने उन छात्रों को भी शिक्षित किया जो भविष्य में सैकड़ों लोगों को शिक्षित करेंगे। यह हमारी शिक्षा की स्थिति की एक भयानक तस्वीर को उजागर करता है। इससे यह बात भी स्पष्ट हो जाती है कि वर्तमान सरकार को प्राथमिकता के आधार पर छात्रों को पढ़ाए जाने वाले इतिहास के पाठ्यक्रम में संशोधन की आवश्यकता क्यों है?
VHP के नेताओं ने भी संतों द्वारा सुझाई गई दो तारीखों पर अपनी सहमति दी है और कहा कि उनके द्वारा सुझाई गईं तारीख़ों से बेहतर और कोई तारीख़ नहीं हो सकती। कुल मिलाकर अब सरकार पर भी दबाव रहेगा कि वो जल्द ही ट्रस्ट बनाए और इसमें संतों के प्रमुख वर्गों को शामिल करें।
पटकथा लेखक सलीम ख़ान के अलावा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर) जमीरउद्दीन शाह ने अयोध्या फ़ैसले पर आधारित टीवी पर एक चर्चा के कार्यक्रम में कहा था कि मुस्लिमों को दी जाने वाली ज़मीन पर स्कूल या अस्पताल का निर्माण क्यों नहीं कर लेना चाहिए? अयोध्या में पहले से ही पर्याप्त मस्जिदें हैं।
ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मोहम्मद आमिर ने कहा कि मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को जो जमीन दी जा रही है, वो खैरात नहीं, बल्कि मुआवजा है।
जस्टिस गांगुली का कहना है कि अल्पसंख्यकों ने अरसे तक वहाँ मस्जिद देखी है, जिसे तोड़ डाला गया। साथ ही संविधान के अस्तित्व में आने से पहले वहॉं मस्जिद थी। इसलिए उन्हें इस फ़ैसले को समझने में मुश्किल आ रही है।
बैठक में आशंका जताई कि कुछ राष्ट्रविरोधी तत्व माहौल खराब करने की साजिश रच सकते हैं। ऐसी ताकतों को रोकने के लिए धर्मगुरुओं से सहयोग की डोभाल ने अपील की।
बाबरी मस्जिद का टूटना भले ही भारतीय कानून की दृष्टि में एक आपराधिक घटना है, लेकिन हिन्दुओं के इतिहास के हिसाब से यह उस आस्था के साथ न्याय है जिसके मंदिर की दीवार पर मस्जिद खड़ी की गई थी।