इन “Coalition partners” की खोजबीन में सबसे पहला कनेक्शन जो निकल कर सामने आता है, वह है दुनिया के सबसे क्रूर, जिहादी, मानवाधिकार के भक्षक देशों में से एक पाकिस्तान का है। कुछ मामलों में तो यह कनेक्शन भी भी सेना की गोद में बैठे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI से सीधा-सीधा निकलता है।
"वे क्या करना चाहते हैं, यह उनकी इच्छा है। हमने उन्हें आतंक को मुख्यधारा बनाते देखा है। अब वे नफ़रत की भाषा को मुख्यधारा में इस्तेमाल करना चाहते हैं। यह उनकी इच्छा है, अगर वे यही करना चाहते हैं। ज़हरीले शब्द अधिक समय तक नहीं चलते।"
जिहादी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए इमरान खान का ये बयान उस समय आया है जब वो जल्द ही संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करने वाले है और साथ ही विश्व के सबसे शक्तिशाली देख अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं।
"मोदी सरकार के इस कदम से साफ हो गया है कि राष्ट्र विरोधी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए देश में कोई जगह नहीं है। जन संघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू- कश्मीर में एक संविधान और एक विधान को लेकर जो संघर्ष किया उनका पक्ष आखिरकार सही साबित हुआ है और नेहरू और शेख अब्दुल्ला गलत साबित हुए हैं।"
NRC को पूरे देश में लागू करने पर मदनी ने कहा, "मेरी इच्छा होती है मैं इसे सारे मुल्क में करने की माँग करूँ, जिससे पता चल जाएगा कि घुसपैठिए कितने हैं। जो असली हैं, उन पर भी दाग लगाया जाता है, तो पता चल जाएगा। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है।"
स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरे ज़ोर-शोर से चल रहीं हैं। 5,10,870 मरीजों का पंजीकरण हुआ है, और 15,157 सर्जरियाँ हुईं हैं। ₹108 करोड़ केवल जम्मू-कश्मीर बैंक से निकाले गए हैं।
सेरिंग ने साफ किया था कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग हिंदुस्तानी नागरिक हैं। उन्होंने पाकिस्तान के ज़मीन या लोगों पर किसी भी तरह के अधिकार को नकार दिया था।
यूएन ने बार-बार पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे को उछालने पर कहा है कि दोनो देशों को शांतिपूर्ण तरीके से इस मामले का समाधान ढूँढना होगा। इस पर उनकी ओर से मध्यस्ता का अभी कोई विचार नहीं हैं।
पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA) ने बताया कि जब शिया मुस्लिम मुहर्रम की अपनी सबसे महत्वपूर्ण रस्म निभाएँगे, उस दौरान मोबाइल फोन सेवाएँ और इंटरनेट बंद रहेंगे.......
तेहरान ने इस्लामाबाद को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी तीसरे देश के खिलाफ इस तरह के पोस्टर लगाना राजनयिक मानदंडों के खिलाफ है। पाकिस्तान ने एक मौखिक नोट के जरिए जब इस मुद्दे को उठाया तो तेहरान ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।