लेख में कहा गया है कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दूरगामी असर होगा। समय के साथ यह देखने को मिलेगा। लेखक ने 'उम्मीद' जताई है कि भारत के लिए यह उतना घातक नहीं हो, जिस तरह वह फैसला पाकिस्तान के लिए साबित हुआ।
कॉन्ग्रेस विधायकों ने सर्वसम्मति से शिवसेना को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला किया है। इसको लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) को एक पत्र प्रस्तुत करने की योजना बना रही है। राजस्थान में कॉन्ग्रेस की मीटिंग में...
"हम अपने अधिकार के लिए लड़ रहे थे। हमें दान के रूप में पाँच एकड़ की जमीन नहीं चाहिए। हमें इस 5 एकड़ भूमि के प्रस्ताव को अस्वीकार करना चाहिए, हमें संरक्षण नहीं चाहिए।”
कॉन्ग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव और अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडीशा और सिक्किम के विधानसभा चुनावों में प्रचार अभियान के लिए 820 करोड़ रुपए खर्च किए थे। यह आँकड़ा 2014 में पार्टी द्वारा आम चुनाव के दौरान खर्च किए गए 516 करोड़ रुपए से कहीं ज्यादा है।
"यह उत्कृष्ट भावनाओं को प्रेरित करती है लेकिन जब यह सिर चढ़ कर बोलेगी तो ऐसी स्थिति में यह उन मूल्यों को कुचल डालेगी, जिसकी रक्षा देश करना चाहता है। राष्ट्रवाद और देशप्रेम के बीच में भ्रम की ऐसी स्थिति पैदा हो रही है कि यदि इसे इसे छूट मिलती रही तो इसके परिणाम विस्फोटक होंगे।"
"सभी कॉन्ग्रेस विधायक एकजुट हैं। कोई भी विधायक पार्टी से अलग नहीं होगा। पार्टी हाईकमान के आदेश का विधायक पालन करेंगे। उन्होंने कहा, “हम बीजेपी को राज्य में सरकार बनाने नहीं देंगे राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) हमारी सहयोगी है, वे हमारे साथ हैं।"
यह सोचे जाने की ज़रूरत है कि सौ करोड़ से ज्यादा की आबादी के धर्म को गाली देने की हिम्मत कहाँ से आती है? ऐसी आस्था जिसने न मज़हबी हिंसा की, न जबरिया मतांतरण, उससे शोएब दानियाल जैसों की दुश्मनी क्या है?
आज़ादी के बाद से ही 'सेक्युलरासुर' सरकारें गौ भक्तों को हिकारत भरी नज़रों से देखती रही हैं। 7 नवंबर 1966 को गौ भक्तों के दमन का वह आदेश भी "इंदिरा इज़ इंडिया, इंडिया इज़ इंदिरा" के अंदाज़ में ही दिया गया था।
मैनपुरी पुलिस ने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से प्रियंका गाँधी की फ़र्ज़ी ख़बर का खंडन किया है। कहा कि उन्होंने बेवजह इस मुद्दे को जातिवादी रंग दिया। दो पक्षों के बीच जो झड़प हुई थी वो राजपूत परिवार के बीच हुई थी।
5 नवंबर बीत जाने के बाद कॉन्ग्रेस नींद से उठी और यह ध्यान आया कि उन्होंने एक और अंतिम तिथि में चूक कर दी। इसके बाद ट्विटर पर यूज़रों ने मौका नहीं गँवाया कॉन्ग्रेस को उसके पूर्व अध्यक्ष से भी बड़ा मज़ाक बताने में, एक ने लिखा कि जल्दी क्या है, अभी तो नया साल पड़ा हुआ है.....