5 नवंबर बीत जाने के बाद कॉन्ग्रेस नींद से उठी और यह ध्यान आया कि उन्होंने एक और अंतिम तिथि में चूक कर दी। इसके बाद ट्विटर पर यूज़रों ने मौका नहीं गँवाया कॉन्ग्रेस को उसके पूर्व अध्यक्ष से भी बड़ा मज़ाक बताने में, एक ने लिखा कि जल्दी क्या है, अभी तो नया साल पड़ा हुआ है.....
इमरजेंसी के दौरान इंदिरा का समर्थन। चुनाव में कॉन्ग्रेस का समर्थन। मुस्लिम लीग का समर्थन। फिर कॉन्ग्रेस के विरोध के लिए पवार के साथ मंच साझा करना। 2 राष्ट्रपति चुनावों में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार का समर्थन। बालासाहब ठाकरे के रहते ही शिवसेना 'सौदेबाजी' में पारंगत हो गई थी।
धनबाद जिले में विधानसभा की 6 सीटें हैं। इन सीटों के लिए अब तक कुल 40 लोग दावेदारी पेश कर चुके हैं। इसके लिए ब्रजेंद्र प्रसाद सिंह ने सभी से पाँच-पाँच हजार रुपए लिए। कुल मिलाकर उन्होंने 2 लाख रुपए की वसूली की।
संजय राउत ने दावा किया था कि महाराष्ट्र के हित में कॉन्ग्रेस और एनसीपी का समर्थन शिवसेना को मिल सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया और पवार की मुलाकात में क्या खिचड़ी पकती है।
झाविमो सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। कॉन्ग्रेस महागठबंधन में झाविमो को बनाए रखने के पक्ष में है। राजद 14 सीटों की मॉंग कर रहा है, जबकि झामुमो उसे चार-पॉंच से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं है।
"कॉन्ग्रेस पार्टी भले ही दस साल आगे की सोच रखने का दावा करती हो मगर सच्चाई यह है कि इस पार्टी के लोग अगले दस मिनट में क्या कर डालेंगे, इसका किसी को कोई अंदाज़ा नहीं। हकीकत यह है कि आप आने वाले समय में एक वेब सीरीज बना सकते हैं कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी जनता से दूर होती चली गई।"
वेदांती ने कहा, "राम मंदिर के निर्माण में देरी के लिए कॉन्ग्रेस और पाकिस्तान जिम्मेदार हैं। वे नहीं चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट में यह मसला सुलझे।" साथ ही कॉन्ग्रेस पर विभाजनकारी राजनीति का भी आरोप लगाया।