कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा बनाई गई जाँच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस हिंसा में ममता बनर्जी की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के स्थानीय नेताओं की अहम भूमिका रही।
मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद जब शांति बैठकें होनी शुरू हुईं तो उसमें दूर-दूर से टीएमसी के नेता आए, मगर बहरामपुर सीट से सांसद होने के बावजूद युसूफ इन बैठकों से गायब दिखे।