श्री-श्री 1008 श्री रवीश कुमार जी महाराज के विरोधियों ने उनके हर पोस्ट और प्राइम टाइम पर कमेंट सेक्शन में लिख कर भक्तों को रवीशिया अफ़ीम की ख़ुमारी से बाहर लाने की कोशिश की लेकिन भक्त तो परमअज्ञान की अवस्था पा चुके थे, उनका उस प्रपंच सागर से बाहर आना नामुमकिन हो चुका था। वो बेचारे सूअरों की तरह कीचड़ में ही आनंद पा रहे थे।
इसमें कोई शक नहीं कि पुरुष महिलाओं से सामान्यतः थोड़े अधिक आक्रामक होते हैं, लेकिन यह किसी सांस्कृतिक ज़बरदस्ती या 'toxic masculinity' के चलते नहीं, बायोलॉजिकल कारणों से होता है। इसलिए जहर फैलाने के लिए कुछ भी लिखने से पहले...
उर्दू मॉनिटर नामक अख़बार और कारवाँ डेली नामक पोर्टल मामले को नया 'एंगल' देने के लिए ज़बरदस्ती मारे गए युवकों पर ही पकड़े गए आरोपित असलम और फ़रार समीर पर हमला करने का आरोप लगा रहे हैं।
स्वाति चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री की छवि को खराब करने और उनका मजाक उड़ाने की नियत से इस तस्वीर को अपने ट्विटर हैंडल पर ‘offered without comments’ कैप्शन के साथ शेयर किया। मगर लोगों ने स्वाति की काली करतूत को रंगे हाथों पकड़ लिया।
जब संजीव नेवर की शिकायत पर राष्ट्रीय SC आयोग ने हस्तक्षेप किया तो जाँच में निकल कर आया कि पुलिस ने कई सारी गलतियाँ की थीं। SHO को मूल FIR बदलने के लिए निलंबित कर दिया गया, और बदले के इरादे से पीड़ित परिवार पर दाखिल दो FIRs नकली निकलीं, और पीड़ितों को पुलिस सुरक्षा दी गई।
समुदाय विशेष को यह सोचने की ज़रूरत है कि विवेकानंद के 'सर्व-धर्म-समभाव' वाले पन्ने पर क्यों विभाजन की खूनी दास्ताँ लिखी, क्यों मुस्लिम-बहुल कश्मीर को हिन्दू-बहुल भारत का साथ मंज़ूर नहीं और क्यों कश्मीरी पंडितों के साथ वो किया, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।
NDTV: आरोप है कि NNPLC को FIPB बोर्ड की मंजूरी उस समय के FDI प्रावधानों को ताक पर रखकर दी गई। प्रणय रॉय, राधिका रॉय और विक्रम चंद्रा पर मुकदमा IPC की धारा 120-B, 420, और भ्रष्टाचार-निरोधी अधिनियम, 1988 की धारा 13(1) और 13(2) के अंतर्गत दर्ज किया गया है।
द वायर' का पत्रकार यह जानना चाहता था कि क्या पीड़ित ने बजरंग दल के कहने पर पुलिस में मामला दर्ज कराया है? हालाँकि, पीड़ित ने पत्रकार द्वारा बार-बार बात घुमाने के बाद भी अपने बयान पर कायम रहते हुए बताया कि पुलिस को उसने जो बयान दिया है, वह उसका ख़ुद का है।
वायर की पूरी कश्मीर रिपोर्टिंग केवल और केवल झूठ और प्रोपेगंडा पर ही आधारित है। यही नहीं, इसका मकसद भी केवल भारत की बुराई नहीं, बल्कि 'हिन्दू फ़ासीवाद', 'डरा हुआ मुसलमान' के दुष्प्रचार से हिन्दुओं को बदनाम करने के साथ दबाए रखना, और 'इस्लाम खतरे में है' के हौव्वे को भड़काकर जिहाद को बढ़ावा देना है।
मज़े की बात यह कि 2001 में संघ के मुख्यालय पर तिरंगा फ़हराए जाने पर तालियाँ पीटने वाला वायर कश्मीर में तिरंगे की सम्प्रभुता पर उसी साँस में सवाल खड़े कर रहा है! दोगलेपन की ऐसी सानी मिलना मुश्किल है।