IAF द्वारा गिराए गए पाकिस्तानी F-16 फाइटर प्लेन में विंग कमांडर शहज़ाद उद्दीन थे, जिन्हें भारतीय सैनिक समझकर पाकिस्तान की जनता ने खुद बेरहमी से पीटा था और उनकी मृत्यु हो गई।
अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव दिया है। कूटनीतिक तौर इसे पर भारत की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान मीडिया फिलहाल इस समय पर जोरो-शोरों से प्रमाण देने पर तुला हुआ है कि उसे शांति और अमन चाहिए... शायद पाकिस्तान इस बात को अच्छे से जानता है कि अब भारत किसी भी कीमत पर चुप नहीं रहने वाला है।
सीमा पर टेंशन और वायु सेना के एक मिसिंग पायलट के बीच पाक उप-उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय ने बुलाया है। कयास लगाया जा रहा है कि यह बुलावा पायलट की सकुशल वापसी के संबंध में ही है।
आतंकवाद पर लगाम लगाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बड़ी जीत हुई है। तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जो घोषणापत्र जारी किया गया, उसमें आतंकवाद और आतंकी ठिकाने नष्ट करने का स्पष्ट संदेश दिया गया।
क्या पाकिस्तान अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने अपने आतंकियों की परेड करवाएगा ताकि वह भारत के दावों को नकार सके? क्या वह 350 आतंकियों को UN के सामने ले जाकर कहेगा- 'लो देखो, हमारे सारे आतंकी अभी भी ज़िंदा हैं। भारत झूठ बोल रहा।'
पुंछ और नौशेरा सेक्टर में भारतीय सीमा में पाकिस्तानी विमान घुसे और उन्होंने भागते समय हड़बड़ाहट में बम गिराए, जिसमें किसी भी भारतीय के हताहत होने की सूचना नहीं है।
हमारे देश के आम नागरिकों पर 2004 से 2014 के बीच कई बार हमले हुए मगर तब राजनैतिक इच्छाशक्ति ऐसी थी ही नहीं कि नागरिकों को बचाने का सशस्त्र बलों को कोई आदेश दिया जाता। अब हालात बदल गए हैं।
पहले स्थानीय निवासियों ने सर्जिकल स्ट्राइक की पुष्टि की। उसके बाद रही-सही कसर विपक्षी नेताओं से लेकर पाकिस्तानी मीडिया ने भी इमरान खान सरकार और पाकिस्तानी सेना को घेर कर निकाल दी।
खैबर पख्तूनख़्वा के बालाकोट के निवासियों द्वारा किए गए खुलासे ने पाकिस्तान में एक और सर्जिकल स्ट्राइक की पुष्टि कर दी, साथ ही पाकिस्तान सशस्त्र बल के प्रवक्ता द्वारा शुरू की गई लीपापोती को ध्वस्त भी।