पूरी दुनिया में जानलेवा कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या अब बढ़कर पाँच लाख से अधिक हो गई है जिसमें से 22,000 के ज्यादा लोग इस महामारी के कारण जान गँवा चुके हैं।
राहत पैकेज की तुलना से पहले यह ध्यान रखना जरूरी है कि अन्य देशों ने व्यापक स्तर पर नुकसान देख ऐसी घोषणा की है। वहीं भारत ने स्थिति हाथ से निकलने से पहले एक कल्याणकारी पैकेज की घोषणा की है। आगे मुमकिन है कि सरकार अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसी पैकेज की घोषणा करे।
"भारत में घर में रहना सबसे अच्छा है लेकिन घर में रहने के लिए लोगों को पैसे और खाने की जरूरत होगी। हमें न सिर्फ 21 दिनों के लिए सोचना और प्लान करना चाहिए बल्कि उसके अगले कुछ हफ्तों की भी योजना होनी चाहिए।"
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेस करके कहा कि देश के 80 करोड़ लोगों को सस्ते दर पर राशन दिया जाएगा। केंद्र सरकार देश के 80 करोड़ लोगों को हर महीने 7 किलो प्रति व्यक्ति राशन देगी, जोकि 3 महीने के लिए एडवांस होगा।
रेलवे ने सारी पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के आवागमन पर पहले ही रोक लगा दी है। केवल सामान ढोने वाले ट्रेनें ही चल रही हैं, जिन्हें गुड्स ट्रैन कहा जाता है। अब फ्लाइट सेवाओं पर भी पाबन्दी लगा दी गई है।
इस तरह देखें तो लॉकडाउन की वैसे तो कोई ठीक-ठीक परिभाषा मौजूद नहीं है, लेकिन आमतौर पर संक्रमण को रोकने के लिए सरकारें इस तरह के कदम उठाती हैं। लॉकडाउन में सरकार का लक्ष्य यह होता है कि लोग यहाँ-वहाँ कम आएँ-जाएँ। जनता का आवागमन बाधित हो, जिससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
कोरोना जैसी महामारी के बीच सरकार ने फार्मास्युटिकल घटकों के लिए चीन पर चली आ रही निर्भरता को ख़त्म करने के उद्देश्य से देश में बड़े पैमाने पर दवा निर्माण की मदद के लिए 14 हजार करोड़ रुपए निवेश की घोषणा की है।
स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न नहीं होने के कारण यह राशि जारी करने पर रोक लगी हुई थी। लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मोदी सरकार चाहती है कि स्थानीय प्रशासन के पास धन की कमी नहीं रहनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि 200 मिली सेनिटाइजर की कीमत 100 रुपए से ज्यादा नहीं होगी और अन्य आकार की बोतलों की कीमत भी इसी अनुपात में रहेंगी। ये कीमतें 30 जून 2020 तक पूरे देश में लागू रहेंगी।