"छात्र होने का मतलब यह नहीं है कि वे कानून-व्यवस्था अपने हाथ में ले सकते हैं। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुॅंचाया जा सकता। ऐसे हालात में पुलिस को कदम उठाना ही होगा।"
अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर... एक ही झूठ बार-बार। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर J&K हाई कोर्ट के जजों ने जॉंच कर खोल दी पोल। अब सिद्धार्थ वरदराजन को बताना चाहिए जेलों में बंद करीब 150 नाबालिग कहाँ गए? या फिर पाकिस्तान से हुई किस 'डील' के तहत यह झूठ फैलाया गया।
लोकसभा के बाद बुधवार (11 दिसंबर) को राज्यसभा में लंबी बहस के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पास हो गया है। इस विधेयक की वोटिंग में कुछ 230 वोट पड़े। जिसमें विधेयक के पक्ष में 125 और विरोध में 105 वोट पड़े थे।
राम जन्मभूमि मंदिर में विघ्न डालने के आज आखिरी दरवाजे भी सुप्रीम कोर्ट ने बंद कर दिए हैं। जमीयत उलेमा ए हिन्द, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इशारे पर याचिका डालने वालों, इरफ़ान हबीब-प्रशांत भूषण के लिबरल गिरोह समेत 18 याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट की नई संविधान पीठ ने ख़ारिज कर दी हैं।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एक आस्था को तरजीह देना वाला बताया गया है। कहा गया है कि हिन्दू पक्ष को जन्मभूमि की ज़मीन देने का आधार केवल आस्था को माना गया है। मस्जिद के पक्ष में पुरातात्विक साक्ष्यों को नज़रंदाज़ कर दिया गया।
रिव्यू पिटिशन से पहले 29 अक्टूबर 2019 को जेल प्रशासन ने सभी कानूनी रास्ते बंद हो जाने पर दोषियों को राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने के लिए सात दिन का वक़्त दिया था। इनमें से केवल विनय शर्मा ने ही इसके लिए अर्जी दाखिल की थी।
अगर सिर्फ आरोप के आधार पर किसी को बलात्कारी कहकर गोली मारने का जोश थोड़ा कम हो गया हो तो सोचिएगा। न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने, और ‘बनाना रिपब्लिक’ होने में फर्क तो होता है ना?
"रिव्यू पिटिशन पर जो भी फ़ैसला होगा, वो चाहे हमारे हक़ में आए या न आए, हमको वो फ़ैसला भी क़बूल है। लेकिन, यह भी एक हक़ीक़त है कि क़यामत तक बाबरी मस्जिद जहाँ थी, वहीं रहेगी। चाहे वहाँ पर कुछ भी बन जाए। वो मस्जिद थी, मस्जिद है... मस्जिद ही रहेगी।"
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि न्याय त्वरित रूप से किया जा सकता है या फिर ऐसा होना चाहिए। जस्टिस बोबडे ने कहा कि न्यायिक सुधार की प्रक्रिया जुडिशरी ख़ुद करेगी और इसे सार्वजनिक रूप से करना है या नहीं, इसपर बहस हो सकती है।