केंद्र सरकार को 'फ्री मेट्रो राइड' के संबंध में दिल्ली सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। फिर भी लगभग सभी मीडिया संस्थानों ने "केंद्र सरकार ने ख़ारिज/अस्वीकार या रिजेक्ट की केजरीवाल सरकार की महिलाओं के लिए 'फ्री मेट्रो राइड' योजना" जैसी भ्रामक और फेक रिपोर्ट प्रकाशित की।
अंकित के पिता यशपाल सक्सेना ने हाल ही में वादा न पूरा करने के लिए दिल्ली सरकार के प्रति अपनी गहरी नाराज़गी जताई थी। उन्होंने बताया था कि किस तरह दिल्ली सरकार ने उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा न देकर नाउम्मीद किया।
दिल्ली में महिलाओं को दी जाने वाली ’फ्री मेट्रो राइड’ के रूप में केजरीवाल सरकार की लोकलुभावन चुनावी योजना को बड़ा झटका देते हुए केंद्र सरकार ने 27 जून को लोकसभा में इसे खारिज कर दिया।
एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने 11 जून को मनोज कुमार को आईपीसी की धारा 186 और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 131 के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने पुलिसवालों की गवाहियों को विश्वसनीय मानते हुए ये फैसला सुनाया था और बहस के लिए 25 जून की तारीख मुकर्रर की गई थी।
गंभीर ने ट्वीट किया, “ऊपर वाला अब और करीब से देखेगा। मेरी माताओं, बहनों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए मैंने आज से अपने संसदीय क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरा लगवाने का काम शुरू कर दिया है। वैसे मफलरवाले (केजरीवाल) सर जी मेरा एक कैमरा आपके झूठे वादों पर भी फोकस्ड है।”
यदि AAP के बागी विधायक कपिल मिश्रा की मानें तो अरविन्द केजरीवाल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को मीटिंग के बहाने बुलाकर आगामी विधानसभा चुनाव में AAP को ही वोट दिलवाने की कसम खिलाने वाले थे। लेकिन अब केजरीवाल ने यह प्लान रद्द कर दिया है।
दिल्ली मेट्रो के पहले प्रबंध निदेशक और ‘मेट्रो मैन’ के नाम से मशहूर ई श्रीधरन ने मेट्रो में महिलाओं को मुफ़्त यात्रा की सुविधा देने की आम आदमी पार्टी सरकार की पहल को मेट्रो के लिए नुकसानदायक बताया था। उन्होंने सुझाव दिया कि छूट की राशि सीधे महिलाओं के खाते में ट्रांसफर की जाए।
केजरीवाल इससे पहले भी कई हवाई योजनाओं की चर्चा कर चुके हैं। जिन पर अभी तक ग्राउंड वर्क की प्रोग्रेस शून्य है। बाद में किसी न किसी वजह से वह योजना फाइलों में फँस जाती है। ऐसे समय में कई विशेषज्ञों का कहना है कि केजरीवाल सरकार जानबूझकर ऐसे काम करती है कि फाइल नियम विरुद्ध हो या इसके लिए आवश्यक तैयारी के अभाव के कारण फाइल उप राज्यपाल के यहाँ फँस जाए, जिससे AAP की पूरी मशीनरी को एक बार फिर से 'कि हम तो दिल्ली की महिलाओं को मुफ्त योजना देना चाहते थे लेकिन मोदी फाइल ही आगे नहीं बढ़ने दे रहें' पर आकर रुक जाती है।
टाटा पॉवर-DDL ने जोर देते हुए कहा है कि वो 68 लाख रुपए हर महीने इन स्ट्रीटलाइट्स के रख-रखाव में ही खर्च करते हैं, लेकिन दिल्ली स्थित आम आदमी सरकार की एजेंसियों ने अभी तक उनके रुपयों का भुगतान नहीं किया है।
DMRC ने क़ानूनी सलाहकार से भी चर्चा की और यह जानने का प्रयास किया कि क्या इस तरह की वित्तीय सब्सिडी या अनुदान राज्य सरकार द्वारा दिल्ली मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 के तहत यात्रियों के एक विशेष वर्ग को दी जा सकती है?