संजय राउत को 'तोता' बताते हुए विधायक ने कहा है कि फडणवीस मुख्यमंत्री बने तो शिवसेना टूट जाएगी। उन्होंने कहा कि वे खुद शिवसेना के करीब 25 विधायकों के संपर्क में हैं।
अख़बार ने 1955-99 का भी दौर याद दिलाया, जब शिवसेना महाराष्ट्र के राजग गठबंधन में 'बड़ा भाई' की भूमिका में थी और बालासाहब ठाकरे ने मातोश्री से रिमोट कण्ट्रोल सरकार चलाई थी। अगर उस समय भाजपा सीएम पद माँगती तो क्या शिवसेना दे देती?
असम ने पिछले चार दशक में इस मुद्दे पर काफी हिंसक झड़पें देखी हैं। 1978 में इसके लिए 'थ्री-D' का नारा प्रचलित हुआ थ्री-D यानी डिटेक्शन, डिलीशन और डिपोर्टेशन यानी अवैध रूप से रह रहे प्रवासी को ढूँढो (डिटेक्शन), मिटाओ (डिलीशन) और बाहर भेज दो (डिपोर्टेशन)।
एनआरसी की आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए जस्टिस गोगोई ने मीडिया घरानों की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के चलते इस मुद्दे को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसके चलते स्थिति खराब हो गई।
संजय राउत के मुताबिक 'महाराष्ट्र के हित में' शिवसेना के साथ कॉन्ग्रेस और एनसीपी आ सकते हैं। बकौल राउत शिवसेना को समर्थन का आँकड़ा 175 तक पहुँच सकता है। 288 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आँकड़ा 145 है।
पवार ने एक बार फिर शिवसेना को झटका देते हुए कहा है कि वो विपक्ष में बैठेंगे। नासिक में एनसीपी के संस्थापक-अध्यक्ष ने कहा कि चूँकि उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश प्राप्त हुआ है, इसीलिए उनकी पार्टी सरकार गठन की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगी।
शिवसेना को समर्थन पर कॉन्ग्रेस का विभाजन साफ-साफ नजर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण इसके पक्ष में बताए जाते हैं। वहीं, सुशील शिंदे और संजय निरुपम जैसे नेता इसका विरोध कर रहे हैं।
दिल्ली में 1 मई 2014 को ग़ैर-सब्सिडी वाले LPG की क़ीमत ₹928.50 थी और उसी साल जनवरी में इसकी क़ीमत ₹1241.00 थी। मौजूदा कीमत (₹681.50) से तुलना करें तो पता चलता है कि 2014 से यह ₹247.00 सस्ती है न कि ₹302.50 महॅंगी, जैसा सुरजेवाला ने दावा किया है।
“बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है। इसके अलावा निर्दलीयों का समर्थन भी है, गठबंधन ने 288 में से 161 सीटें जीतकर जनादेश हासिल किया है। हम इस जनादेश का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें नहीं लगता कि एक स्थिर सरकार बनाने में कोई बाधा है।”
कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में अल्पमत की सरकार बन सकती है, जिसे बाहर से एनसीपी समर्थन दे सकती है। जिस तरह से 2014 के चुनाव के बाद 288 सदस्यीय विधानसभा में जब 122 विधायकों वाली फड़नवीस की अल्पमत सरकार ने शपथ ली थी तो एनसीपी ने उसे बाहर से समर्थन दिया था।