वेदों की भूमि पर वैदिक मंत्रोच्चार ही होगा न? 'सेंगोल' तमिल ही नहीं, हिन्दू गौरव का प्रतीक है। संविधान में श्रीराम और श्रीकृष्ण मौजूद हैं, फिर 'सेक्युलर' गिरोह को दिक्कत क्यों?
विमर्शों का कोई अंतिम या लिखित निष्कर्ष निकले यह आवश्यक नहीं पर विमर्श हो यह आवश्यक है क्योंकि वर्तमान काल भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की यात्रा के मूल्यांकन का काल है।