ये सभी दलित और वाल्मीकि समुदाय के युवक थे, जिन्होंने भीम आर्मी जैसे संगठनों और फर्जी नारा देने वालों के बहकावे में आकर हिन्दू धर्म से विमुख होना शुरू कर दिया था।
विहिप ने 5000 ऐसे पुजारियों को प्रशिक्षित कर विभिन्न मंदिरों में नियुक्त किया है, जो एससी-एसटी हैं। विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने पैनल में इन पुजारियों को जगह दी है।