केंद्र सरकार की तरफ से इस मामले में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि कोई भी हाई कोर्ट या उसके जज कभी भी लोकपाल कानून, 2013 के दायरे में नहीं आ सकते।
हाई कोर्ट के भीतर मामलों के तेज निपटान के लिए एड हॉक जजों की नियुक्ति को लेकर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 224A का हवाला देते हुए फैसला दिया था।