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तेलंगाना में 4 बार MLA रहे BRS नेता चेनमानेनी रमेश की भारतीय नागरिकता हाई कोर्ट ने रद्द की, ₹30 लाख का जुर्माना भी: जर्मन सिटीजन होने की बात छिपाई थी

कोर्ट ने पाया कि रमेश ने अपनी जर्मन नागरिकता छुपाकर न्यायपालिका और जनता को गुमराह किया। यह पहली बार है जब किसी पूर्व विधायक की भारतीय नागरिकता रद्द की गई है।

तेलंगाना हाई कोर्ट ने 9 दिसंबर 2024 को एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व बीआरएस विधायक चेनमानेनी रमेश की भारतीय नागरिकता रद्द कर उन्हें जर्मन नागरिक घोषित किया। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने पाया कि रमेश ने अपनी जर्मन नागरिकता छुपाकर न्यायपालिका और जनता को गुमराह किया। यह पहली बार है जब किसी पूर्व विधायक की भारतीय नागरिकता रद्द की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने अपने फैसले में कहा कि चेनमानेनी रमेश 2009 से भारतीय नागरिक होने का दावा करते हुए चुनाव लड़ते रहे, जबकि वे जर्मन नागरिक थे। गृह मंत्रालय पहले ही उनकी भारतीय नागरिकता रद्द कर चुका था। हाई कोर्ट ने मंत्रालय के इस फैसले को सही ठहराया।

चेनमानेनी रमेश ने 1990 के दशक में जर्मनी की नागरिकता ली थी। उन्होंने वहाँ नौकरी की, शादी की और परिवार बसाया। 2008 में उन्होंने भारतीय नागरिकता हासिल करने का दावा किया, लेकिन गृह मंत्रालय की जाँच में पाया गया कि रमेश ने अपनी जर्मन नागरिकता छोड़ी ही नहीं थी। उनका जर्मन पासपोर्ट 2023 तक वैध था।

रमेश ने 2009 में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से पहली बार विधायक का चुनाव जीता। बाद में वे बीआरएस (तत्कालीन टीआरएस) में शामिल हो गए और 2010, 2014, और 2019 में विधायक चुने गए।

कॉन्ग्रेस नेता और वर्तमान विधायक आदी श्रीनिवास ने चेनमानेनी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी। कोर्ट ने रमेश पर लगाए गए 30 लाख रुपये के जुर्माने में से 25 लाख रुपये आदी श्रीनिवास को देने का आदेश दिया, जबकि बाकी 5 लाख रुपये तेलंगाना स्टेट लीगल सर्विसेस अथॉरिटी को दिए जाएँगे।

आदी श्रीनिवास ने 2009 से चेनमानेनी रमेश की नागरिकता को लेकर सवाल उठाए थे। श्रीनिवास का कहना था कि रमेश ने गलत जानकारी देकर भारतीय नागरिकता हासिल की और चुनाव लड़ा। रमेश ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा उनकी नागरिकता रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी। लेकिन कोर्ट ने पाया कि रमेश ने जर्मन नागरिकता छोड़ने का कोई सबूत पेश नहीं किया।

इस फैसले से तेलंगाना की राजनीति में हलचल मच गई है। कॉन्ग्रेस के टिकट पर साल 2023 में विधायकी जीते आदी श्रीनिवास ने इसे न्याय की जीत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह फैसला उन लोगों के लिए संदेश है जो झूठे दावे कर चुनाव लड़ते हैं।”

चेनमानेनी रमेश के लिए यह फैसला राजनीतिक और कानूनी तौर पर एक बड़ा झटका है। भारतीय संविधान और जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत, गैर-भारतीय नागरिक चुनाव लड़ने या वोट देने के पात्र नहीं होते।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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