एंड्रिया का कहना है कि उनके शौहर भारत में होने वाली सभी आपराधिक गतिविधियों के लिए आवाज उठाते हैं और वो सिर्फ अपने मजहब के लिए ही नहीं, बल्कि हिंदुओं और ईसाइयों के लिए भी आवाज उठा रहे हैं। वो कहती हैं कि उनके पति इस लड़ाई में अकेले हैं और उनके साथ जो किया जा रहा है, वो अन्याय है।
शिवभक्त काँवड़िया जब इन इलाकों से गुजरता है तो पत्थरबाजी और मार-पीट की खबरें कैसे आती हैं? क्या इसके उलट आपने कहीं सुना है कि ईद की नमाज पढ़ते, या ईद तो छोड़िए हर शुक्रवार सड़क घेर कर देश के कई इलाके में नमाज पढ़ते शांतिप्रिय पर किसी ने आवाज भी उठाई हो?
लिबरल गैंग के पास हिन्दुओं के खिलाफ बोलने के लिए और कोई आधार नहीं बचा है। बम धमाके न सही, 'ज़बरदस्ती जय श्री राम बुलवाया जा रहा है' ही सही! बंदूक लेकर कथित हिन्दू आतंकवादी सड़कों पर भले नहीं उतर रहे, लेकिन लोगों को बीफ़ करी खाने भी तो नहीं मिल रही!
चश्मदीद गणेश ने कहा है कि इमरान के साथ मारपीट आपसी दुश्मनी की वजह से हुई थी। जय श्री राम नहीं बोलने पर मारपीट की बात झूठी है। इमरान को गणेश और उसकी पत्नी ने ही बचाया था।
ऋचा भारती उर्फ़ ऋचा पटेल के ख़िलाफ़ अभद्र टिप्पणी करने के मामले में अबु आजमी वसीम खान के ख़िलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। फिलहाल अबु आजमी वसीम खान फरार है और पुलिस ने उसकी धड़-पकड़ की कोशिशें तेज कर दी हैं।
अभिनेता एजाज ख़ान ने टिक-टॉक ऐप पर भड़काऊ वीडियो बना कर पोस्ट किया था। एजाज ख़ान ने हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा की बात की थी और सोशल मीडिया पर वह भड़काऊ और विवादास्पत पोस्ट्स के लिए कुख्यात हैं।
राँची की अदालत ने ऋचा भारती वाले मामले में दिया गया 'कुरान बाँटने' वाला आदेश वापस ले लिया है। अदालत ने यह निर्णय इस केस की जाँच कर रहे इन्वेस्टीगेशन अधिकारी के निवेदन पर लिया।
"एक अधिवक्ता काला कोट पहनने के बाद हिन्दू और मुस्लिम नहीं होता है। हिन्दू ही नहीं बल्कि कई मुस्लिम अधिवक्ताओं तक ने 'कुरान बाँटने' के इस फैसले पर आश्चर्य व्यक्त किया है और कहा कि इस प्रकार की शर्त कोई न्यायालय कैसे रख सकता है?"
हो सकता है अंजुमन इस्लामिया वालों को ‘फक योर सिस्टर’ का या ‘तेरी माँ मेरी रखैल’ आदि का मतलब मालूम न हो, लेकिन कोर्ट के जजों को तो ज़रूर पता होगा कि इन शब्दों से एक लड़की की ‘मोडेस्टी आउटरेज’ होती है। और यह क़ानूनन जुर्म है।
ऋचा ने कहा, "आज कुरान बाँटने का आदेश दिया गया है, कल को इस्लाम स्वीकार करने या नमाज पढ़ने का आदेश देंगे तो वह कैसे स्वीकार किया जा सकता है। क्या किसी समुदाय विशेष वाले को सजा के तौर पर दुर्गा पाठ करने या हनुमान चालीसा पढ़ने का आदेश कोर्ट ने सुनाया है?"