पहले कॉन्ग्रेसी पत्रकार मृणाल पांडे ने महाभारत की 'द्रौपदी' पर गलत तथ्य प्रस्तुत कर उनकी छवि को बिगाड़ा। पोल खुली तो वामपंथी पैटर्न पर चलते हुए सनातनी विद्वान को ही ब्लॉक कर दिया।
AIMIM की बुर्के वाली पार्षद सहर शेख सिर्फ मुंब्रा को हरा नहीं रंगना चाहती हैं, बल्कि वो '15 मिनट' के मायने भी बखूबी जानती हैं। और उनकी बात पर हँसने वाली भीड़ भी इसके मायने जानती है।
कर्नाटक के संगीतकार टीएम कृष्णा यूट्यूब चैनल 'द देशभक्त' को दिए गए एक इंटरव्यू में वंदे मातरम्, आनंदमठ और हिंदू पहचान के लेकर अपनी नापसंदगी खुलकर जाहिर की।
'घूसखोर पंडत' नाम कोई मासूम क्रिएटिविटी नहीं है, यह वही प्रोपेगेंडा है जो बॉलीवुड और नेटफ्लिक्स सालों से इस्तेमाल करते आए हैं, जहाँ पंडित और ब्राह्मण पहचान 'सेफ टारगेट' मानी जाती है।