"मैं तो इस तस्वीर में उमर अब्दुल्ला को पहचान ही नहीं पा रही हूँ। मुझे काफ़ी दुख महसूस हो रहा है। मैं उदास हूँ। ये काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे लोकतांत्रिक राष्ट्र में ऐसा हो रहा है। ये सब आख़िर कब थमेगा?"
अटॉर्नी जनरल ने पीठ के सामने एक-एक कर ऐतिहासिक घटनाक्रम का ब्योरा दिया। साथ ही कश्मीर का भारत में विलय और जम्मू कश्मीर संविधान सभा के गठन के बारे में विस्तार से बताया।
अगर आप आकाश और उनकी माँ का अनुभव पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को लेकर 'सॉरी-सॉरी' खेलने की बात करने वाले पाखंड कर रहे हैं। एक महिला जो आज पंडितों के लिए रोने का दिखावा कर रही, कभी उनके ख़ून की प्यासी हुआ करती थी।
आज विधु कहते हैं कि सब कुछ भुलाकर उन लोगों से कश्मीरी पंडितों को गले मिल लेना चाहिए, प्रेम करना चाहिए और सब भुला देना चाहिए। एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार कहते हैं कि निर्देशक ने वर्षों की इस चुप्पी को तोड़ने के लिए सिर्फ एक 'सॉरी' की गुज़ारिश की है, उन्होंने बहुत ज्यादा तो नहीं माँगा।
इससे पहले, चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (CDS) और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत ने कहा था कि अगर आतंक का ख़ात्मा करना है तो आतंकवादियों से अमेरिका की तरह लड़ाई लड़नी होगी। जैसा कि उन्होंने 9/11 के बाद आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी।
घंटों चली मुठभेड़ के बाद हिजबुल के 3 आतंकियों को ढेर कर दिया। मारे गए तीन आतंकियों में एक नाम आदिल डार का भी है। जो कुछ समय पहले एसपीओ की नौकरी छोड़ आतंकवादी बना था और पूर्व विधायक अहमद डार के घर से सुरक्षाकर्मियों की राइफल लेकर फरार हो गया था।
“देश हमेशा सबसे पहले है। जिंदगी इंतजार करेगी यह वादा है। एक सैनिक की जिंदगी का बस एक और दिन। भारतीय सेना का एक जवान कश्मीर घाटी में भारी बर्फबारी की वजह से अपनी शादी में नहीं पहुँच सका। दुल्हन के परिवार वाले नई तारीख को लेकर...”
सबा नक़वी ने एक टीवी डिबेट के दौरान अपने चिरपरिचित अंदाज में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला। न केवल कश्मीरी पंडितों के घाटी में लौटने को लेकर एतराज जताया बल्कि जम्मू-कश्मीर पर भारत के अधिकार को लेकर भी सवाल उठाए।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने रियासी के मुरी गाँव में एक फुटब्रिज और एक पानी की टंकी का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा, "आज, मुझे कई विकास परियोजनाओं के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों के संबंध में उपायुक्त द्वारा आदेश जारी किए गए थे।"
नदीमर्ग तत्कालीन सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के पैतृक गॉंव से महज 7 किमी दूर है। 54 लोगों की आबादी वाले इस गॉंव में 7 आतंकी घुसे। हिंदुओं को उनके नाम से पुकार घरों से बाहर बुलाया। चिनार के पेड़ के नीचे सबको जमा किया और...