Homeराजनीतिनेशनल कॉन्फ्रेंस नेता हिलाल अकबर लोन को PSA के तहत किया गया गिरफ़्तार

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता हिलाल अकबर लोन को PSA के तहत किया गया गिरफ़्तार

इससे पूर्व गत सप्ताह प्रशासन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अली मोहम्मद सागर, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पीडीपी के वरिष्ठ नेता सरताज मदनी, नईद अख्तर को PSA के तहत बंदी बनाया है।

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता हिलाल अकबर लोन को छह माह तक हिरासत में रखने के बाद सोमवार को प्रशासन ने एक बार फ़िर से जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत गिरफ़्तार कर लिया। हिलाल अकबर के पिता मोहम्मद अकबर लोन पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य विधानसभा के स्पीकर और बारामूला-कुपवाड़ा संसदीय क्षेत्र के मौजूदा सांसद हैं।

हिलाल अकबर लोन को भी कश्मीर घाटी में पाँच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को लागू किए जाने के मद्देनजर प्रशासन ने हिरासत में लिया था। इसके साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कॉन्ग्रेस, माकपा व अन्य दलों के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया था। शुरूआत में इन नेताओं को सेंटूर की एक जेल में रखा गया था, लेकिन पिछले वर्ष नवंबर माह से हिलाल अकबर लोन और कुछ अन्य नेताओं को सब जेल के एमएलए हॉस्टल में रखा गया था।

वहीं PSA के तहत बंदी बनाए जाने के बाद हिलाल अकबर लोन को गुपकार रोड पर एक बंगले में बनाई गई अस्थायी सब जेल में ले जाया गया है। इससे पूर्व गत सप्ताह प्रशासन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अली मोहम्मद सागर, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पीडीपी के वरिष्ठ नेता सरताज मदनी, नईद अख्तर को PSA के तहत बंदी बनाया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -